Thursday, 23 August 2018

अपने आलोचक कुलदीप नैयर की जब PM मोदी ने तारीफ से उन्हें कर दिया था चकित


अपने आलोचक कुलदीप नैयर की जब PM मोदी ने तारीफ से उन्हें कर दिया था चकित


वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का बुधवार रात को 95 साल की उम्र में निधन हो गया. कुलदीप नैयर काफी प्रतिष्ठित और सेकुलर नजरिए के पत्रकार रहे हैं. वह संघ-बीजेपी की राजनीतिक विचारधारा के आलोचक रहे हैं. इसलिए गत जून माह में इमरजेंसी पर आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने जब उनकी खूब तारीफ की तो वे चकित रह गए थे.
नैयर इस उम्र तक भी सक्रिय थे और हाल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी 'संपर्क फॉर समथर्न' कार्यक्रम के तहत उनसे मिलने गए थे. पीएम मोदी ने नैयर के निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए गुरुवार को ट्वीट किया कि देश को बेहतर बनाने की उनकी प्रतिबद्धता के लिए उन्हें याद रखा जाएगा.
पीएम ने कहा- नैयर को सलाम
गत 26 जून को आपातकाल की याद से जुड़े एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने इमरजेंसी के खिलाफ खुलकर खड़े होने के लिए कुलदीप नैयर और दिवंगत रामनाथ गोयनका की तारीफ की थी. प्रधानमंत्री ने कहा था, 'उनके जैसे कई लोग हमारे समर्थक नहीं रहे हैं. नैयर मेरे आलोचक रहे हैं. लेकिन वे लोकतंत्र के लिए लड़ाई लड़े हैं, इसलिए मेरा उनको सलाम है.'
इसके बाद टेलीग्राफ अखबार से बातचीत में नैयर ने यह खुलकर स्वीकार किया था कि वे नरेंद्र मोदी के प्रखर आलोचक हैं. अखबार से उन्होंने कहा था, 'इसमें कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है. यह विचारधारा का मामला है. वह हिंदुत्व में यकीन करते हैं और मैं इसके खिलाफ हूं. मैं बहुत गहराई से, गहराई से, गहराई से सेकुलर हूं.'
उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना इमरजेंसी के दौर से की थी. उन्होंने कहा था कि यह बात वह मीडिया के हालात पर कह रहे हैं और मीडिया जिस तरह से प्रोपेगंडा को बढ़ावा दे रहा है, उसकी ओर उनका संकेत है.
अमित शाह ने की थी मुलाकात
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने 'संपर्क फॉर समर्थन' कार्यक्रम के तहत 9 जून को कुलदीप नैयर से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद नैयर ने कहा था, 'हमारे विचार नहीं मिलते. हमारे विचार अलग हैं. लेकिन आपस में हमने कई चीजों पर विचारों का आदान-प्रदान किया है.

भाजपा का दृष्टि पत्र अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर होगा


भाजपा का दृष्टि पत्र अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर होगा 


भारतीय जनता पार्टी आगामी लोकसभा एवं साल के अंत में होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों का दृष्टि पत्र पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों से जोड़कर तैयार करेगी। इस बार भाजपा दृष्टि पत्र को अटल दृष्टि पत्र नाम देने जा रही है। संभवत: अगले महीने होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में इस पर अधिकृत तौर पर मुहर भी लग जाएगी। हालांकि  विधानसभा चुनाव वाले राज्य छत्तीसगढ़, मप्र एवं राजस्थान में जल्द ही अटल दृष्टि पत्र का खाका तैयार होगा। फिलहाल इन राज्यों में पार्टी की दृष्टि पत्र समिति की टीमें प्रदेश भर में लोगों से सुझाव ले रही हैं। अगले चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी छाए रहेंगे। इसके लिए भाजपा अटलजी से जुड़ी स्मृतियां जुटा रही हैं।
मप्र भाजपा सितंबर के आखिरी तक चुनावी घोषणा पत्र का खाका तैयार कर लेगी। अभी तक भाजपा इसे दृष्टि पत्र के नाम से घोषित करती आई है। लेकिन इस बार अटल दृष्टि पत्र के नाम से जारी होगा। संभवत: 25 सितंबर को मप्र भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपना 'अटल दृष्टि पत्रÓ जारी कर सकती है। 
अटल के नाम पर होंगी योजनाएं 
भाजपा का दृष्टि पत्र सामान्य रहेगा। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा प्रधानमंत्री रहते श्ुारू की गई विकास योजनाओं के क्रियान्वयन का भी दृष्टि पत्र में शामिल होगा। शिक्षा, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई, कृषि, विज्ञान, गांव-शहर के विकास की घोषणाएं अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों से जोड़कर की जाएंगी।
चुनाव में होगा अटल का गुणगान
भाजपा ने 2013 के विधानसभा एवं 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी को पूरी तरह से भुला दिया था। इन चुनावों में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने  चुनाव प्रचार के दौरान अटलजी का नाम तक नहीं लिया, लेकिन आगामी विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में अटलजी छाए रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से लेकर मप्र भाजपा के सभी नेता एवं राज्यों के मुख्यमंत्री एवं पदाधिकारी अटलजी को केंद्र में रखकर अपनी चुनावी सभाएं करेंगे।

विधानसभा चुनाव में भाजपा का ओबीसी चेहरा 'शिवराज'


विधानसभा चुनाव में भाजपा का ओबीसी चेहरा 'शिवराज'

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी वोट बैंक भी मायने रखेगा। प्रदेश में 90 सीट ऐसी हैं जहां इस वोट बैंक का अच्छा खासा प्रभाव है। भाजपा में जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ओबीसी वर्ग के चेहरे हैं।
चुनाव से ऐनवक्त पहले भाजपा ने बालकृष्ण पाटीदार, लोधी नेता प्रहलाद सिंह पटेल के भाई जालम सिंह पटेल व नारायण सिंह कुशवाह को भी ओबीसी वोट बैंक साधने के लिए मंत्री बनाया है। हालांकि ओबीसी वोट बैंक पदोन्न्ति में आरक्षण जैसे विषयों पर भाजपा से खफा है, लेकिन पार्टी इसका समाधान निकालने की कोशिश में लगी है।
उमा भारती की उपेक्षा से लोधी खफा
प्रदेश में लोधी मतदाताओं की संख्या भी बड़ी है। लोधी समाज के नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का नाम सबसे ऊपर आता है। कुछ दिनों पूर्व उमा भारती ने बयान दिया था कि वे अगले तीन साल कोई चुनाव नहीं लडेंगी।
उनका यह बयान प्रदेश में उस समय आया था, जब कोलारस और मुंगावली में उपचुनाव होने वाला था। सामाजिक सूत्रों का कहना है कि अपने नेता की उपेक्षा से लोधी वर्ग नाराज है। उन्होंने इस बयान का आशय कुछ इस तरह निकाला कि जब तक उमा भारती चुनाव से दूर रहेंगी, समाज भी भाजपा से दूर रहेगा।
सभी समाज को साध रही भाजपा
भाजपा ओबीसी वर्ग के सभी समाजों को साधने में जुटी है। लंबे समय पहले से ही पार्टी ने अपनी इस रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया था। मीणा समाज सहित कई समाजों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद शामिल हुए थे।

अटलजी पर अभद्र टिप्पणी करने वाले डॉक्टर को होशंगाबाद में जेल भेजा


अटलजी पर अभद्र टिप्पणी करने वाले डॉक्टर को होशंगाबाद में जेल भेजा


फेसबुक वॉल पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद और गायत्री मंत्र को लेकर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पीसी करुण को जेल भेज दिया गा है। सिटी कोतवाली पुलिस ने गुरुवार को उसे गिरफ्तार कर कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
सिटी कोतवाली टीआई अनूप सिंह नैन ने बताया कि केस दर्ज करने के बाद से ही आरोपित डॉक्टर की तलाश की जा रही थी। गुस्र्वार तड़के सूचना मिली कि आरोपित घर पर सो रहा है, जिसके बाद सदर बाजार स्थित घर से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गौरतलब है कि भाजपा सहित हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत की थी कि डॉ. करुण ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गायत्री मंत्र को लेकर फेसबुक वॉल पर अभद्र टिप्पणी की है। पुलिस ने जांच में शिकायत सही पाई थी। इसके बाद डॉ. करुण के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
थाने की बैंच पर बैठकर पढ़ता रहा अखबार
आरोपित डॉ.करुण को जब सिटी कोतवाली लाया गया था, तब तक तो वह कुछ देर के लिए घबराया। लेकिन थोड़ी ही देर बाद सामान्य हो गया। पुलिस ने उसे बैंच पर बैठाया, जहां वह एक अखबार पढ़ता रहा। इसके बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।
दोष सिद्ध होने पर हो सकती है तीन साल की सजा
लोक अभियोजक केके थापक ने बताया कि आरोपित को दो दिन जेल में रहना होगा। 25 अगस्त को उसकी जमानत पर सुनवाई होगी। आरोपित पर धारा 295 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) व धारा 65 (आईटी एक्ट) के तहत केस दर्ज किया गया है। दोष सिद्ध होने पर दोनों ही धाराओं में अधिकतम तीन वर्ष साल तक की सजा हो सकती है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।