Tuesday, 6 September 2016

चमत्कारों के बूते संत बनीं मदर टेरेसा : प्रमोद भार्गव

चमत्कारों के बूते संत बनीं मदर टेरेसा : प्रमोद भार्गव

आखिरकार दो अलौकिक चमत्कारों के बूते मानव सेवा के लिए समर्पित और करुणा की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा को संत की उपाधि से विभूषित कर दिया गया। रोमन कैथोलिक चर्च के वेटिकन सिटी स्थित सेंट पीटर्स में पोप फ्रांसिस ने टेरेसा को संत घोषित किया है। कोलकाता में 45 साल तक अनाथों, गरीबों और बीमार लोगों की सेवा करने वाली टेरेसा का निधन 5 सितंबर 1997 को 87 साल की उम्र में हो गया था। संत बनने से पूर्व उन्हें पीड़ित मानवता की सेवा के लिए नोबेल पुरस्कार और भारत रत्न से भी सम्ननित किया जा चुका है। टेरेसा ने कुष्ठ रोगियों की जिस आत्मीयता से सेवा की उस नाते उन्हें भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में ‘जीवित संत‘ का दर्जा स्वाभाविक रूप से दे दिया गया था। बावजूद उन्हें दो अलौकिक चमत्कारों से जोड़कर संत का दर्जा दिया गया है। जबकि वे अलौकिक चमत्कारों की बजाय मानव की प्रत्यक्ष सेवा से जुड़ी थीं। भारत में मानव सेवा के लिए लंबा जीवन गुजारते हुए मदर टेरेसा ने यह कभी दावा नहीं किया कि वे किसी अलौकिक शक्ति की सिद्धी के चलते सेवा कर रही हैं।
दरअसल रोमन कैथोलिक ईसाई धर्म में किसी व्यक्ति को संत घोषित करने के लिए उसके दो चमत्कारों की पुष्टि जरूरी है। इन चमत्कारों को स्वीकृति बेटिकन देता है। यह प्रक्रिया किसी महान व्यक्ति के निधन के बाद 5 से 50 साल के भीतर शुरू की जा सकती है। 1999 में पोप जाॅन पाॅल द्वातिय ने टेरेसा के लिए ‘केननिजैषण‘ की इजाजत दी थी। क्योंकि उन्हें संत मानने से पहले ही जीवीत संत मान लिया गया था। इस प्रक्रिया के तहत पहले चरण में ईश्वर का सेवक घोषित किया जाता है। दूसरे चरण में पूज्य, तीसरे चरण में पोप द्वारा धन्य और चौथे अथवा अंतिम चरण में संत घोषित किया जाता है। इन प्रक्रियाओं की पूर्ति के बाद ही मदर को संत घोषित किया गया है।मदर टेरेसा से जुड़ा पहला चमत्कार 2003 में सामने आया था। इस चमत्कार के अनुसार पश्चिम बंगाल के रायगंज की मोनिका बेसरा के पेट में मौजूद ट्यूमर के ठीक होने के बारे में दावा किया गया कि यह ट्यूमर टेरेसा का लाॅकेट मोनिका के गले में डालने से ठीक हुआ है। इस चमत्कार का विवरण 450 पृष्ठों में ‘मिश्नरीज आॅफ चैरिटी‘ ने वेटिकन को भेजा था। यह संस्था 1963 में टेरेसा ने मानव सेवा के लिए अलख जगाने की दृष्टि से टेरेसा ने स्थापित की थी। वेटिकन ने इस चमत्कार की पुष्टि करते हुए टेरेसा को ‘धन्य‘ घोषित कर दिया। टेरेसा के संत बनने की दिशा में यह महत्वपूर्ण चरण था। इसके बाद टेरेसा से जुड़ा दूसरा चमत्कार 2008 में सामने आया। ब्राजील के एक नागरिक ने दावा किया कि मदर की चमत्कारिक अनुकंपा से उसका ट्यूमर ठीक हुआ है। इस चमत्कार को 2015 में वर्तमान पोप फ्रांसिस ने टेरेसा की अलौकिक शक्ति माना और वेटिकन के धर्मगुरूओं एवं चिकित्कों के एक संयुक्त दल ने इस चमत्कार की पुष्टि कर दी। इन्हीं चमत्कारों के परिप्रेक्ष्य में टेरेसा को अलौकिक महिमा रूपी संत के रूप में अलंकृत कर दिया गया।दरअसल मदर टेरेसा के पहले वेटिकन सिटी में पोप ने दिवंगत सिस्टर अल्फोंजा को संत की उपाधि से अलंकृत किया था। क्योंकि अल्फोंजा का जीवन उनकी छोटी उम्र से ही भ्रामक दैवीय व अतीन्द्रीय चमत्कारों का दृष्टांत बन गया था। सिस्टर अल्फोंजा से जुड़े चमत्कार बाद में किंवदंती भी बनने लग गए।

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