प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से एनएसजी में भारत को समर्थन का आह्वान किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मौके पर भेंट की और उन्हें सियोल में हो रही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की बैठक में भारत की सदस्यता पर बनती आम सहमति के लिए योगदान करने का आह्वाहन किया । उन्होंने राष्ट्रपति शी से कहा कि चीन को भारत की सदस्य्ता पर एक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ आंकलन करना चाहिए । उन्होंने एससीओ में सदस्यता के लिए भारत को समर्थन देने पर राष्ट्रपति शी का धन्यवाद किया । दोनों के बीच यह बातचीत लगभग 30 मिनट तक चली । विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी से कहा कि चीन को सियोल में हो रही एनएसजी की बैठक में ''भारत की सदस्यता पर आम सहमति के लिए योगदान देना चाहिए ।'' चीन अभी तक एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत का समर्थन नहीं कर रहा, यह कह कर कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं । एनएसजी की दो दिवसीय बैठक दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आरम्भ हो गयी है । विकास स्वरुप ने कहा कि यह यह एक ''जटिल और नाजुक'' बातचीत की प्रक्रिया है जो सियोल में चल रही है । हमें प्रतीक्षा करनी चाहिए।'' प्रधानमंत्री मोदी जो आज दोपहर को उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित एससीओ की बैठक में भाग लेने पहुंचे, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलेंगे । राष्ट्रपति शी के साथ वार्ता के पश्चात प्रधानमंत्री मोदी ने उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति करीमोव के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की और इसे भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण क़दम बताया । एससीओ यूरेशिया का एक राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संगठन है जिसे चीन के शहर शंघाई में 2001 में रूस, चीन, कजाखस्तान, किर्गीज़िस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने मिलकर बनाया था ।राष्ट्रपति करीमोव के साथ वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने उनको उज़्बेकिस्तान के नागरिकों के लिए ई-वीज़ा की भी घोषणा की और कहा कि भारत उज़्बेकिस्तान में एक ''फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया' और एक व्यापार प्रदर्शनी आयोजित करेगा । यह सब उज़्बेकिस्तान और भारत के बीच राजनयिक संबंधों के 25 वर्ष होने की उपलक्ष में किया जायेगा । प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ में भारत की सदस्य्ता के लिए समर्थन पर राष्ट्रपति करीमोव का भी धन्यवाद किया ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मौके पर भेंट की और उन्हें सियोल में हो रही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की बैठक में भारत की सदस्यता पर बनती आम सहमति के लिए योगदान करने का आह्वाहन किया । उन्होंने राष्ट्रपति शी से कहा कि चीन को भारत की सदस्य्ता पर एक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ आंकलन करना चाहिए । उन्होंने एससीओ में सदस्यता के लिए भारत को समर्थन देने पर राष्ट्रपति शी का धन्यवाद किया । दोनों के बीच यह बातचीत लगभग 30 मिनट तक चली । विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी से कहा कि चीन को सियोल में हो रही एनएसजी की बैठक में ''भारत की सदस्यता पर आम सहमति के लिए योगदान देना चाहिए ।'' चीन अभी तक एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत का समर्थन नहीं कर रहा, यह कह कर कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं । एनएसजी की दो दिवसीय बैठक दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आरम्भ हो गयी है । विकास स्वरुप ने कहा कि यह यह एक ''जटिल और नाजुक'' बातचीत की प्रक्रिया है जो सियोल में चल रही है । हमें प्रतीक्षा करनी चाहिए।'' प्रधानमंत्री मोदी जो आज दोपहर को उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित एससीओ की बैठक में भाग लेने पहुंचे, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलेंगे । राष्ट्रपति शी के साथ वार्ता के पश्चात प्रधानमंत्री मोदी ने उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति करीमोव के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की और इसे भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण क़दम बताया । एससीओ यूरेशिया का एक राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संगठन है जिसे चीन के शहर शंघाई में 2001 में रूस, चीन, कजाखस्तान, किर्गीज़िस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने मिलकर बनाया था ।राष्ट्रपति करीमोव के साथ वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने उनको उज़्बेकिस्तान के नागरिकों के लिए ई-वीज़ा की भी घोषणा की और कहा कि भारत उज़्बेकिस्तान में एक ''फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया' और एक व्यापार प्रदर्शनी आयोजित करेगा । यह सब उज़्बेकिस्तान और भारत के बीच राजनयिक संबंधों के 25 वर्ष होने की उपलक्ष में किया जायेगा । प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ में भारत की सदस्य्ता के लिए समर्थन पर राष्ट्रपति करीमोव का भी धन्यवाद किया ।

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