सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई
कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर
नाराजगी जताई और कहा कि आजाद भारत के इतिहास में केंद्र सरकार के
कर्मचारियों का वेतन सबसे कम बढ़ा है। कांग्रेस भी आगामी 11 जुलाई को
कर्मचारियों की होने वाली हड़ताल में शामिल होगी।कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप
सुरजेवाला ने 7वें वेतन आयोग की वृद्धि को 'एकतरफा एवं अपर्याप्त' करार
देते हुए कहा कि पिछले सात दशकों में 'यह सबसे कम वेतन वृद्धि' है।
उन्होंने कहा कि 'छठे वेतन आयोग ने वेतन
और भत्तों में 20 फीसदी वृद्धि की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस
सरकार ने उसे बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया था। सातवें वेतन आयोग ने 14.29 फीसदी
वेतन बढ़ाने की सिफारिश की है और मोदी सरकार ने महज 15 फीसदी बढ़ाया है।'
उन्होंने कहा कि न्यूनतम और अधिकतम वेतन वृद्धि का अनुपात बढ़ गया
है।कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, 'उदाहरण के तौर पर सबसे अधिक वेतन वृद्धि 90
हजार से 2.50 लाख की गई है, लेकिन न्यूनतम वेतन को सात हजार से बढ़ाकर केवल
18 हजार रुपये किया गया है। यह अनुपात 1:14 है, जबकि पहले यह 1:12 का था।
स्वाभाविक है कि कम वेतन पाने वाले कर्मचारी को सबसे अधिक तकलीफ होती है।'
सुरजेवाला ने कहा कि मूल वेतन पर वेतन एवं भत्तों की यह बढ़ोतरी महज 15
फीसदी है, न कि 23.5 फीसदी जैसा कि सरकार गलत ढंग से दावा कर रही है।इसके
साथ ही पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अजय माकन ने संवाददाताओं से कहा कि
केंद्र सरकार के कर्मचारी आयोग की सिफारिशों से 'हताश एवं निराश' हैं।
लाभार्थियों के लिए यह अन्यायपूर्ण और अपमानजनक है। उन्होंने सातवें वेतन
आयोग की शिफारिशों पर खामियां गिनाते हुए कहा, “यह दुर्भाग्यूपर्ण है कि
जिन कर्मचारियों को पांचवें और छठे वेतन आयोग द्वारा 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी
दी गई थी, उन्हें अब मात्र 14.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।“माकन ने
कहा, जब हम सिफारिशों का अध्ययन करते हैं तो प्रतीत होता है कि यह कम वेतन
पाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ है और उनकी वित्तीय स्थिति को सुधारने में
विफल है। यह उच्च स्तर के अधिकारियों के पक्ष में प्रतीत होता है। उन्होंने
खास तौर पर वर्तमान में मौजूद 52 भत्तों और त्योहारों के अवसर पर या कार,
मोटरसाइकिल-स्कूटर-मोपेड खरीदने के लिए बिना ब्याज के दिए जाने वाले अग्रिम
कर्ज को खत्म किए जाने की सिफारिश पर आपत्ति जताई।माकन ने कहा कि छठे वेतन
आयोग ने जहां ग्रेड-पे के साथ वेतन में तीन से चार प्रतिशत सालाना वृद्धि
की सिफारिश की थी, वहीं सातवें वेतन आयोग ने इसे केवल तीन प्रतिशत तक सीमित
कर दिया है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर
नाराजगी जताई और कहा कि आजाद भारत के इतिहास में केंद्र सरकार के
कर्मचारियों का वेतन सबसे कम बढ़ा है। कांग्रेस भी आगामी 11 जुलाई को
कर्मचारियों की होने वाली हड़ताल में शामिल होगी।कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप
सुरजेवाला ने 7वें वेतन आयोग की वृद्धि को 'एकतरफा एवं अपर्याप्त' करार
देते हुए कहा कि पिछले सात दशकों में 'यह सबसे कम वेतन वृद्धि' है।
उन्होंने कहा कि 'छठे वेतन आयोग ने वेतन
और भत्तों में 20 फीसदी वृद्धि की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस
सरकार ने उसे बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया था। सातवें वेतन आयोग ने 14.29 फीसदी
वेतन बढ़ाने की सिफारिश की है और मोदी सरकार ने महज 15 फीसदी बढ़ाया है।'
उन्होंने कहा कि न्यूनतम और अधिकतम वेतन वृद्धि का अनुपात बढ़ गया
है।कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, 'उदाहरण के तौर पर सबसे अधिक वेतन वृद्धि 90
हजार से 2.50 लाख की गई है, लेकिन न्यूनतम वेतन को सात हजार से बढ़ाकर केवल
18 हजार रुपये किया गया है। यह अनुपात 1:14 है, जबकि पहले यह 1:12 का था।
स्वाभाविक है कि कम वेतन पाने वाले कर्मचारी को सबसे अधिक तकलीफ होती है।'
सुरजेवाला ने कहा कि मूल वेतन पर वेतन एवं भत्तों की यह बढ़ोतरी महज 15
फीसदी है, न कि 23.5 फीसदी जैसा कि सरकार गलत ढंग से दावा कर रही है।इसके
साथ ही पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अजय माकन ने संवाददाताओं से कहा कि
केंद्र सरकार के कर्मचारी आयोग की सिफारिशों से 'हताश एवं निराश' हैं।
लाभार्थियों के लिए यह अन्यायपूर्ण और अपमानजनक है। उन्होंने सातवें वेतन
आयोग की शिफारिशों पर खामियां गिनाते हुए कहा, “यह दुर्भाग्यूपर्ण है कि
जिन कर्मचारियों को पांचवें और छठे वेतन आयोग द्वारा 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी
दी गई थी, उन्हें अब मात्र 14.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।“माकन ने
कहा, जब हम सिफारिशों का अध्ययन करते हैं तो प्रतीत होता है कि यह कम वेतन
पाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ है और उनकी वित्तीय स्थिति को सुधारने में
विफल है। यह उच्च स्तर के अधिकारियों के पक्ष में प्रतीत होता है। उन्होंने
खास तौर पर वर्तमान में मौजूद 52 भत्तों और त्योहारों के अवसर पर या कार,
मोटरसाइकिल-स्कूटर-मोपेड खरीदने के लिए बिना ब्याज के दिए जाने वाले अग्रिम
कर्ज को खत्म किए जाने की सिफारिश पर आपत्ति जताई।माकन ने कहा कि छठे वेतन
आयोग ने जहां ग्रेड-पे के साथ वेतन में तीन से चार प्रतिशत सालाना वृद्धि
की सिफारिश की थी, वहीं सातवें वेतन आयोग ने इसे केवल तीन प्रतिशत तक सीमित
कर दिया है।
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