Sunday, 10 April 2016

गंगा पर बनाए जा रहे सभी बांध निरस्त हो स्वरूपानंद सरस्वती

गंगा पर बनाए जा रहे सभी बांध निरस्त हो स्वरूपानंद सरस्वती
योतिष एंव द्वारका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि गंगा तभी अविरल ओर निर्मल होगी जब गंगा पर बनाए जा रहे सभी बांध निरस्त होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आदि शंकराचार्य की जयंती पर उनके जन्मस्थान कलुड़ी में बने हवाई अड्डा का नाम शंकराचार्य के नाम पर रखे। उन्होंने मध्य प्रदेश में जहां सन्यास लिया था उस गुरु गुफा का भी जीर्णोद्धार किया जाए। उन्हांेने केदारनाथ में जहां शरीर त्याग किया वहां समाधि का जीर्णोद्धार कराया जाए या वह स्थान संतों को दे जिससे वह पुनः समाधि बना सकें।उक्त बात उन्होंने शुक्रवार को कनखल स्थित मठ में नवसंवत्सर के अवसर पर ‘सनातन पंचांग’ का विमोचन अवसर पर पत्राकारों से वार्ता करते हुए कही। शंकराचार्य ने सभी के लिए नववर्ष शांतिपूर्व व्यतीत होने की श्राी कामना की। उन्होंने कहा कि देश में कहीं अनावृष्टि तथा कहीं अतिवृष्टि हुई। इस वर्ष ऐसा न हो। शंकराचार्य गंगा की दुर्दशा पर भी चिन्तित दिखे। उन्होंने कहा कि गंगा तभी निर्मल व अविरल हो सकेगी जब गंगा पर बन रहे सभी बांध निरस्त हों। हरिद्वार में गंगा घाटों पर स्नान योग्य जल न होने पर भी चिंता जताते हुए कहा कि गंगा को आज पराधीन कर दिया गया है। गंगा देश की पहचान है, किन्तु जिस प्रकार से गंगा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है उससे देश की पहचान समाप्त होने के कगार पर है।
उन्होंने कहा कि कभी हरिद्वार में गंगा निर्मल बहा करती थी, किन्तु अब यह यहीं पर समाप्त हो गई है। कहा कि यदि गंगा अविरल बहेगी तो गंगा का प्रदूषण स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। गंगा में प्रदूषण को समाप्त करने की क्षमता है। बांधों में बंधने के कारण गंगा की यह क्षमता समाप्त हो गई है। स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि देश में भोजन बिगड़ा था किन्तु अब जल भी बिगाड़ दिया गया है। जब हरिद्वार में गंगा की स्थित ऐसी है तो आगे की स्थित का अनुमान स्वंय लगाया जा सकता है। स्वयंभू शंकराचार्यों पर प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे शंकराचार्य ज्ञान के अभाव में सनातन धर्म के विपरीत कार्य कर रहे हैं। फर्जी शंकराचार्यों के कारण जनता भ्रमित हो रही है।
उन्होंने वासुदेवानंद सरस्वती पर भी हमला बोलते हुए कहा कि पुरी, श्रंगेरी के शंकराचार्य भी उनको शंकराचार्य नहीं मानते। अदालत ने भी उन्हें शंकराचार्य मानने से इंकार कर दिया है। वे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। कहा कि जब वह न्यायालय के आदेश को नहीं मानते तो किसके आदेश को मानेंगे। कहा कि काशी विद्वत परिषद ने भी उन्हें शकराचार्य मानने से इंकार कर दिया है।जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने गंगा के लिए अभी तक कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया है। ‘मां गंगा ने मुझे बुलाया है’ का उद्घोष कर वे काशी से संासद बने। गंगा अविरल बहे यह प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है। कहा कि जब तक काशी में उत्तराखण्ड से गंगा का अविरल जल नहीं जाएगा तो गंगा काशी में कैसे निर्मल होगी। गंगा में पोत चलाए जाने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गंगा व्यवसाय के लिए नहीं है। गंगा मानव मात्र के उद्धार के लिए स्वर्ग से अवतरित हुई है। कार्य ऐसा होना चाहिए कि जो गंगा का जल गंगोत्री में बहे वैसा ही कलकत्ता में भी होना चाहिए। कहा कि गंगा भारत की विशेषता है। यदि गंगा ही नहीं रही तो यह विशेषता चूर-चूर हो जाएगी।

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