कैबिनेट ने वेतन और पेंशन लाभ पर 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में संशोधन को मंजूरी : जेटली
बैंकों को फंसे कर्ज के संकट से उबारने के लिए सरकार एक अध्यादेश लेकर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार को इस अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दी। अब यह अध्यादेश राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की मंजूरी के लिए भेजा गया है। राष्ट्रपति की मुहर लगने और गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद यह कानून बन जाएगा। सरकार इस अध्यादेश के जरिए बैंकिंग नियमन कानून में संशोधन कर रही है ताकि फंसे कर्ज के संकट का सामना कर रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को उबारा जा सके।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का लगभग 6.60 लाख करोड़ रुपये कर्ज फंसा (एनपीए) हुआ है। पिछले तीन वर्षो से राजग सरकार ने हालात संभालने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। आठ महीने पहले ही बैंकों व एनपीए वसूली से जुड़े अहम कानूनों (बैंकिंग नियमन, डीआरटी व सरफाएसी (एसएआरएफएईएसआई) कानूनों में बड़े संशोधन किये थे। लेकिन बात नहीं बन पाई है। अब नया कानून बैंकों को फंसे कर्जे से मुक्ति दिलाने के लिए एक नया रास्ता देगा। इससे एक विशेष समिति के गठन का रास्ता साफ होगा जो फंसे कर्जे की राशि को कम करने पर तेजी से फैसला करेगी।
यह समिति सभी बैंकों के लिए काम करेगी। साथ ही रिजर्व बैंक को एनपीए से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा अधिकार भी दिया जाएगा। माना जा रहा है कि बड़े ग्राहकों पर बकाये राशि का बड़ा हिस्सा माफ करने का रास्ता भी नए कानून से निकलेगा। पैसा नहीं लौटाने वाली कंपनियों की परिसंपत्तियों को दूसरी कंपनियों को बहुत ही आसानी से बेचने का रास्ता भी इससे निकलेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बिना कोई ब्यौरा दिए बगैर संवादाताओं से कैबिनेट ने बैंकिंग क्षेत्र के संबंध में कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की परंपरा रही है कि जब भी कोई प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो उनकी मंजूरी मिलने तक इसका खुलासा नहीं किया जाता। जैसे ही इसको मंजूरी मिलती है, इसका ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया जाएगा। नया कानून जान बूझ कर नहीं लौटाने वाले ग्राहकों पर सख्ती भी करेगा। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो वर्षो में जान बूझ कर कर्ज नहीं लौटाने वाले 9130 ग्राहकों में से सिर्फ 620 ग्राहकों के खिलाफ ही परिसंपत्ति जब्ती का काम शुरु हो पाया है।
बैंकों को फंसे कर्ज के संकट से उबारने के लिए सरकार एक अध्यादेश लेकर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार को इस अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दी। अब यह अध्यादेश राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की मंजूरी के लिए भेजा गया है। राष्ट्रपति की मुहर लगने और गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद यह कानून बन जाएगा। सरकार इस अध्यादेश के जरिए बैंकिंग नियमन कानून में संशोधन कर रही है ताकि फंसे कर्ज के संकट का सामना कर रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को उबारा जा सके।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का लगभग 6.60 लाख करोड़ रुपये कर्ज फंसा (एनपीए) हुआ है। पिछले तीन वर्षो से राजग सरकार ने हालात संभालने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। आठ महीने पहले ही बैंकों व एनपीए वसूली से जुड़े अहम कानूनों (बैंकिंग नियमन, डीआरटी व सरफाएसी (एसएआरएफएईएसआई) कानूनों में बड़े संशोधन किये थे। लेकिन बात नहीं बन पाई है। अब नया कानून बैंकों को फंसे कर्जे से मुक्ति दिलाने के लिए एक नया रास्ता देगा। इससे एक विशेष समिति के गठन का रास्ता साफ होगा जो फंसे कर्जे की राशि को कम करने पर तेजी से फैसला करेगी।
यह समिति सभी बैंकों के लिए काम करेगी। साथ ही रिजर्व बैंक को एनपीए से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा अधिकार भी दिया जाएगा। माना जा रहा है कि बड़े ग्राहकों पर बकाये राशि का बड़ा हिस्सा माफ करने का रास्ता भी नए कानून से निकलेगा। पैसा नहीं लौटाने वाली कंपनियों की परिसंपत्तियों को दूसरी कंपनियों को बहुत ही आसानी से बेचने का रास्ता भी इससे निकलेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बिना कोई ब्यौरा दिए बगैर संवादाताओं से कैबिनेट ने बैंकिंग क्षेत्र के संबंध में कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की परंपरा रही है कि जब भी कोई प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो उनकी मंजूरी मिलने तक इसका खुलासा नहीं किया जाता। जैसे ही इसको मंजूरी मिलती है, इसका ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया जाएगा। नया कानून जान बूझ कर नहीं लौटाने वाले ग्राहकों पर सख्ती भी करेगा। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो वर्षो में जान बूझ कर कर्ज नहीं लौटाने वाले 9130 ग्राहकों में से सिर्फ 620 ग्राहकों के खिलाफ ही परिसंपत्ति जब्ती का काम शुरु हो पाया है।

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