Tuesday, 11 April 2017

ध्यान दें, माहवारी के दौरान गंदे कपड़े का प्रयोग बन सकता है बांझपन का कारण

ध्यान दें, माहवारी के दौरान गंदे कपड़े का प्रयोग बन सकता है बांझपन का कारण



भारत की कुल जनसंख्या की आधी आबादी महिलाओं की है. देश में लगभग 65 करोड़ महिलाएं हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें, तो आज भी महिलाओं तक स्वास्थ्य सुविधाएं उस तरह नहीं पहुंच पायीं, जिस तरह से पहुंचनी चाहिए. महिलाएं जिस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं, वह माहवारी से जुड़ी है. लेकिन भारत एक ऐसा देश है, जहां माहवारी पर चर्चा करने से महिलाएं बचती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दीगर है, शहरी क्षेत्रों की पढ़ी-लिखी महिलाएं और किशोरियां भी इस विषय पर बात करने से बचती हैं. परिणाम यह होता है कि जब किशोरियां और महिलाएं माहवारी संबंधित समस्याओं से ग्रसित रहती हैं, तो वे तब तक उसके बारे में किसी से नहीं बताती हैं, जब तक कि वह बीमारी बड़ी परेशानी का रूप न ले ले. माहवारी औरतों के शरीर में होने वाली एक जैविक प्रक्रिया है, इसलिए इसमें छुपाने जैसी कोई चीज नहीं है. लेकिन बेवजह इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है. जरूरत इस बात की है कि अगर समस्या है, तो उसे बतायें क्योंकि ना बताने से समस्या ठीक नहीं होती बल्कि आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.


जानकारी का अभाव
माहवारी को लेकर हमारे समाज में जानकारी का घोर अभाव है. ग्रामीण महिलाओं की बात तो छोड़ दें, शहरी महिलाओं के पास भी  माहवारी से संबंधित जानकारी अधूरी ही है. जिसके कारण माहवारी से संबंधित कई बीमारियां महिलाओं को हो जाती हैं और वे अनभिज्ञ रहती हैं. ऐसी भ्रांति समाज में है कि इस दौरान महिलाएं अपवित्र होती हैं गंदी होती हैं, जबकि यह बातें कोरी बकवास हैं
गंदे कपड़े का प्रयोग है बीमारी की बड़ी वजह
अकसर यह देखा गया है कि महिलाएं माहवारी के दिनों में सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग नहीं करतीं, इसके बदले वे कपड़े का प्रयोग करती हैं. कपड़ा भी ऐसा होता है, जो घर में बेकार हो. उसे नैपकिन के रूप में इस्तेमाल करने और उसकी उचित साफ-सफाई ना होने के कारण महिलाएं कई तरह के संक्रमण की शिकार हो जाती हैं. आज भी ग्रामीण इलाकों में कपड़े को सिर्फ पानी से धोया जाता है, जो संक्रमण का बड़ा कारण है. योनि में खुजली, पीला गाढ़ा का स्राव,कभी-कभी हरे रंग के पानी का स्राव भी होता है. बार-बार संक्रमण की वजह से कई बार महिलाएं बांझपन जैसी बीमारियों की शिकार भी हो जाती हैं.

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