यूसी ब्राउजर सुरक्षा से खिलवाड सरकार से कार्यवाही की मांग -प्रहलाद पटेल
दमोह/ देश की सुरक्षा से खिलबाड और क्या किया जाये क्या न किया जाये क्या प्रकाशित और प्रसारित हो इस बात पर नजर और निर्देश भारत सरकार की जगह अगर कोई अन्य देश करे तो आप इसे क्या कहेंगे? पर यह वह सच्चाई है जिसको लेकर संसद में मामला उठाते हुये क्षेत्रीय सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने सरकार से कार्यवाही की मांग की। पूरी प्रमाणिकता एवं साक्ष्यों को प्रस्तुत करते हुये श्री पटेल ने मामला यूसी ब्राउजर का मामला सदन में उठाया। सांसद श्री पटेल ने सरकार का ध्यान एक बडी समस्या की ओर आकृष्ट करते हुये कहा कि यूसी ब्राऊजर“ एक चाइनीज कम्पनी है जिसका एक और हिस्सा “यूसी न्यूज“ है जो मोबाइलों और कम्प्यूटर पर चलता है। इस पर भारत के विभिन्न अखबारों के डिजिटल अंक और विभिन्न न्यूज पोर्टल जुड़े हुए हैं, इस पर कौन सी खबर भारत में दिखाना है और कौन सी खबर नहीं दिखाना है उसका फैसला चीनी ऑनलाइन सेंसर तय करता है। इसकी पुष्टि स्वरूप मेरे संसदीय क्षेत्रान्तर्गत दमोह जिले में आईटीबीपी पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के शुरू होने से संबंधित खबर को यूसी ब्राऊजर द्वारा रोक दिया गया, उनके अनुसारष्त्मअपमू ब्वउउमदजे वि लवनत ।तजपबसम तिवउ न्ब् छमू म्कपजवतपंस जमंउरू ैवततल, जीपे ंतजपबसम ीं ेमदेपजपअम ूवतकेष्। यानी की समाचार में संवेदनशील शब्द हैं दोनों ही खबरों को संवेदनशील शब्द का इस्तेमाल बताकर रोका गया है। जबकि यूसी ब्राउसर पर अन्य आपत्तिजनक खबरें डाली जाती है। तिब्बत शब्द के चलते खबरें रोकी जा रही हैं। उनमें यूसी ब्राऊजर और यूसी न्यूज पहले से मोबाइल निर्माता कम्पनियां डाल कर दे रही हैं उसका मुख्य कारण है अधिकांश मोबाइल कम्पनियां चीनी हैं और वे चीन सरकार के कहे अनुसार कार्य करती हैं और उनको यूसी ब्राऊजर प्री-लोड करके देने पर यूसी ब्राऊजर से एक तयशुदा रकम मिलती है। वर्तमान में हमारे जितने भी सुरक्षा बलों के कर्मचारी सीमा क्षेत्रों में कार्यरत है उनके स्मार्ट फोनों में यूसी ब्राऊजर और यूसी न्यूज हैं उनकी लोकेशन ट्रेस करना सीमा पार से बहुत ही आसान है, इस हालात में हमारी सुरक्षा से पूरी तरह समझौता हो रहा है। श्री पटेल ने कहा कि मैं सरकार से मांग करता हूँ कि यूसी ब्राउजर और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ जैसे पर्दे के पीछे के खेल को गंभीरता से लेते हुए इस संबंध में कोई कारगर कार्यवाही शीघ्र की जाये। सूत्रों की माने तो भारत अकेले में लगभग आधे के करीब आबादी यानि 58 करोड यूसी ब्राउजर के यूजर बतलाये जाते हैं। ज्ञात हो उक्त बिषय को लेकर पत्रकार डा.एल.एन.वैष्णव ने लगातार समाचारों को प्रकाशन किया जिसको लेकर चीनी कंपनी यूसी ब्राउजर ने लगातार नोटिस देते हुये समाचारों में संवेदनशील शब्द बतलाते हुये रोक दिया था। चीन की उक्त कंपनी लगातार दमोह में लगने जा रहे भारत तिब्बत सीमा पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र के समाचारों एवं वहां की गतिविधियों पर नजर रखने की पुष्टि नोटिस एवं समाचारों के रोकने से हो रही थी।
दमोह/ देश की सुरक्षा से खिलबाड और क्या किया जाये क्या न किया जाये क्या प्रकाशित और प्रसारित हो इस बात पर नजर और निर्देश भारत सरकार की जगह अगर कोई अन्य देश करे तो आप इसे क्या कहेंगे? पर यह वह सच्चाई है जिसको लेकर संसद में मामला उठाते हुये क्षेत्रीय सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने सरकार से कार्यवाही की मांग की। पूरी प्रमाणिकता एवं साक्ष्यों को प्रस्तुत करते हुये श्री पटेल ने मामला यूसी ब्राउजर का मामला सदन में उठाया। सांसद श्री पटेल ने सरकार का ध्यान एक बडी समस्या की ओर आकृष्ट करते हुये कहा कि यूसी ब्राऊजर“ एक चाइनीज कम्पनी है जिसका एक और हिस्सा “यूसी न्यूज“ है जो मोबाइलों और कम्प्यूटर पर चलता है। इस पर भारत के विभिन्न अखबारों के डिजिटल अंक और विभिन्न न्यूज पोर्टल जुड़े हुए हैं, इस पर कौन सी खबर भारत में दिखाना है और कौन सी खबर नहीं दिखाना है उसका फैसला चीनी ऑनलाइन सेंसर तय करता है। इसकी पुष्टि स्वरूप मेरे संसदीय क्षेत्रान्तर्गत दमोह जिले में आईटीबीपी पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के शुरू होने से संबंधित खबर को यूसी ब्राऊजर द्वारा रोक दिया गया, उनके अनुसारष्त्मअपमू ब्वउउमदजे वि लवनत ।तजपबसम तिवउ न्ब् छमू म्कपजवतपंस जमंउरू ैवततल, जीपे ंतजपबसम ीं ेमदेपजपअम ूवतकेष्। यानी की समाचार में संवेदनशील शब्द हैं दोनों ही खबरों को संवेदनशील शब्द का इस्तेमाल बताकर रोका गया है। जबकि यूसी ब्राउसर पर अन्य आपत्तिजनक खबरें डाली जाती है। तिब्बत शब्द के चलते खबरें रोकी जा रही हैं। उनमें यूसी ब्राऊजर और यूसी न्यूज पहले से मोबाइल निर्माता कम्पनियां डाल कर दे रही हैं उसका मुख्य कारण है अधिकांश मोबाइल कम्पनियां चीनी हैं और वे चीन सरकार के कहे अनुसार कार्य करती हैं और उनको यूसी ब्राऊजर प्री-लोड करके देने पर यूसी ब्राऊजर से एक तयशुदा रकम मिलती है। वर्तमान में हमारे जितने भी सुरक्षा बलों के कर्मचारी सीमा क्षेत्रों में कार्यरत है उनके स्मार्ट फोनों में यूसी ब्राऊजर और यूसी न्यूज हैं उनकी लोकेशन ट्रेस करना सीमा पार से बहुत ही आसान है, इस हालात में हमारी सुरक्षा से पूरी तरह समझौता हो रहा है। श्री पटेल ने कहा कि मैं सरकार से मांग करता हूँ कि यूसी ब्राउजर और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ जैसे पर्दे के पीछे के खेल को गंभीरता से लेते हुए इस संबंध में कोई कारगर कार्यवाही शीघ्र की जाये। सूत्रों की माने तो भारत अकेले में लगभग आधे के करीब आबादी यानि 58 करोड यूसी ब्राउजर के यूजर बतलाये जाते हैं। ज्ञात हो उक्त बिषय को लेकर पत्रकार डा.एल.एन.वैष्णव ने लगातार समाचारों को प्रकाशन किया जिसको लेकर चीनी कंपनी यूसी ब्राउजर ने लगातार नोटिस देते हुये समाचारों में संवेदनशील शब्द बतलाते हुये रोक दिया था। चीन की उक्त कंपनी लगातार दमोह में लगने जा रहे भारत तिब्बत सीमा पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र के समाचारों एवं वहां की गतिविधियों पर नजर रखने की पुष्टि नोटिस एवं समाचारों के रोकने से हो रही थी।

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