Sunday, 19 March 2017

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अमूल्य धरोहर

वाणिज्य-उद्योग, रोजगार तथा खनिज साधन मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालय द्वारा पीढ़ियों को ऐसी शिक्षा दी जा रही है जो हमारी संस्कृति से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यह अमूल्य धरोहर है और इसे संरक्षित करना हम सबकी जवाबदारी है। श्री शुक्ल शनिवार को रीवा में आयुर्वेद महाविद्यालय में वार्षिकोत्सव समारोह आयुरूत्सव को संबोधित कर रहे थे।
श्री शुक्ल ने कहा कि इस भारतीय चिकित्सा पद्धति को बनाये रखे जाने के प्रयास सतत जारी रखे जाने चाहिए जो व्यक्तियों को रोगों से दूर रखने में महत्वपूर्ण कारक साबित होगा। उन्होंने कहा कि देश में कुछ व्यक्तियों ने इस चिकित्सा पद्धति में क्रान्ति लाने का कार्य किया है। अब लोग विदेशी चिकित्सा की अपेक्षा आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को अधिक महत्व दे रहे हैं।
मंत्री श्री शुक्ल ने महाविद्यालय के पंचकर्म विभाग द्वारा किये जा रहे कार्य की सराहना की। श्री शुक्ल ने कहा कि पूर्व में महाविद्यालय का काफी विकास हुआ है। जो कमियाँ हैं उसे भी दूर किया जायेगा। उद्योग मंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाले छात्रों को आधारभूत संरचना की सुविधाएँ उपलब्ध करवायी जायेंगी। आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर पर विचार किया जायेगा।
उद्योग मंत्री ने पंचकर्म पर केन्द्रित पुस्तक 'स्नेहन एवं स्वेदन चिकित्सा' का विमोचन भी किया। प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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