बैतूल ने रविवार को इतिहास रच दिया। जन-प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन एवं
शहर के समाजसेवी नागरिकों के सहयोग से 114 दिव्यांग जोड़ों ने
परिणय-मंत्रों के मंगलोच्चारण एवं संगीत की स्वर लहरियों के बीच सात फेरे
लिए। कन्याओं का विधिवत् कन्यादान भी किया गया। आयोजन को नई दिल्ली की
संस्था गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड ने अभी तक सबसे ज्यादा दिव्यांग
जोड़ों के सामूहिक विवाह के रूप में दर्ज किया। संस्था के रिकार्ड मैनेजर
श्री राकेश वैद्य ने वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज होने का प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया।
सामूहिक विवाह को लेकर रविवार को पूरे शहर में उत्साह का वातावरण था।
सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं एवं गीत मंडलियों ने मंगल-गान गाए। नगर
के दादावाड़ी मैरिज हाउस में रूके दिव्यांग युवकों की बारात ढोल, बाजे-गाजे
एवं आतिशबाजी के साथ विवाह स्थल पुलिस परेड ग्राउण्ड के लिए रवाना हुई। इस
दौरान दिव्यांगों के उत्साही परिजन ढोल और ताशों की धुन पर नाचे भी।
विवाह कार्यक्रम प्रारंभ करने के पहले विधिवत् दीप जलाया गया। उपस्थित गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विवाह की रस्मों की शुरुआत की गई। वैवाहिक रस्म के बाद अवसर था कन्याओं की बिदाई का, जिसमें न केवल उनके परिजनों की आंखें भीगीं, अपितु जिले के जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं समाजसेवियों के चेहरों पर भी बेटी की बिदाई का दर्द झलक आया। सभी ने इन कन्याओं की डोली अपने कंधों पर उठाकर बिदाई दी। इस अवसर पर वर या वधू किसी एक के दिव्यांग होने पर 50 हजार रूपए एवं दोनों के दिव्यांग होने पर एक लाख रूपए की शासन से मिलने वाली सहायता राशि के चेक भी इन दंपत्तियों को उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा घर-गृहस्थी के सामान के रूप में दंपत्तियों को बिस्तर, कम्बल, घर-गृहस्थी के बर्तन, पंखा, राशन एवं ट्रॉली बेग सहित डस्टबिन, घड़ी जैसी उपहार सामग्री भी भेंट की गई।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सूरजलाल जावरकर ने सभी दम्पत्तियों के सुखी एवं स्वस्थ रहने की कामना की। विधायक श्री हेमन्त खण्डेलवाल ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम को पुण्य कार्य बताया। कार्यक्रम में महिला-बाल विकास विभाग की तरफ से सभी दिव्यांग दंपत्तियों को आंवले एवं मुनगा का एक-एक पौधा भी भेंट किया गया।
विवाह कार्यक्रम प्रारंभ करने के पहले विधिवत् दीप जलाया गया। उपस्थित गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विवाह की रस्मों की शुरुआत की गई। वैवाहिक रस्म के बाद अवसर था कन्याओं की बिदाई का, जिसमें न केवल उनके परिजनों की आंखें भीगीं, अपितु जिले के जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं समाजसेवियों के चेहरों पर भी बेटी की बिदाई का दर्द झलक आया। सभी ने इन कन्याओं की डोली अपने कंधों पर उठाकर बिदाई दी। इस अवसर पर वर या वधू किसी एक के दिव्यांग होने पर 50 हजार रूपए एवं दोनों के दिव्यांग होने पर एक लाख रूपए की शासन से मिलने वाली सहायता राशि के चेक भी इन दंपत्तियों को उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा घर-गृहस्थी के सामान के रूप में दंपत्तियों को बिस्तर, कम्बल, घर-गृहस्थी के बर्तन, पंखा, राशन एवं ट्रॉली बेग सहित डस्टबिन, घड़ी जैसी उपहार सामग्री भी भेंट की गई।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सूरजलाल जावरकर ने सभी दम्पत्तियों के सुखी एवं स्वस्थ रहने की कामना की। विधायक श्री हेमन्त खण्डेलवाल ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम को पुण्य कार्य बताया। कार्यक्रम में महिला-बाल विकास विभाग की तरफ से सभी दिव्यांग दंपत्तियों को आंवले एवं मुनगा का एक-एक पौधा भी भेंट किया गया।

No comments:
Write comments