भाजपा का सहारनपुर-यमुनोत्री स्टेट हाईवे पर घोटाले का आरोप, अखिलेश से मांगा जवाब
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सहारनपुर-यमुनोत्री स्टेट हाईवे में घोटाले का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कटघरे में खड़ा किया है। पार्टी ने इस बारे में उनसे जवाब मांगा है। सहारनपुर यमुनोत्री स्टेट हाईवे घोटाले एवं नगर निगम की आपत्ति के बावजूद नालों को पाटकर साईकिल पथ बनाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछा कि यूपी स्टेट हाईवे आथारिटी (उप्सा) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव है वह बताएं कि हाईवे घोटाले और सफाई के अभाव में बजबजाते नालों से बदहाल जनजीवन का दोषी कौन है। प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि यूपी स्टेट हाईवे आथारिटी (उप्सा) के तहत फोरलेन सड़क बनाने को लेकर घोटाला सामने आया है। जिस कम्पनी को काम दिया गया, उसने 30 मार्च 2012 को 900 दिनों में काम करने का दावा किया और परियोजना कि अनुमानित लागत 1735 करोड़ रूपये आंकी। उन्होंने कहा कि कम्पनी ने 01 अप्रैल 2012 से काम चालू करवाया, जैसा की जानकारी आ रही है नवम्बर 2013 में काम बंद हो गया। पाठक ने कहा कि 11 जून 2014 को समय विस्तार देते हुए कम्पनी का काम पुनः शुरू करने की बात कही गयी लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। नवम्बर 2013 से मौके पर काम बंद है। इसकी जांच पड़ताल क्यों नहीं हुई? जो लोग कह रहे है कि काम बोलता है उनके कारनामे बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उप्सा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने क्यों नही अध्यक्ष के तौर पर इस कम्पनी द्वारा काम न करने की समीक्षा की? प्रदेश महामंत्री ने कहा कि पुनरीक्षित करने के बाद दोगनी कीमत हो जायेगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा? इसके अलावा आखिर चार जिले बागपत, शामली, सहारनपुर और गाजियाबाद को जोड़ने की परियोजना परवान नही चढ़ पाई तो कौन जिम्मेदार है? उन्होंने कहा कि क्या केन्द्र सरकार इस महत्वपूर्ण मार्ग को एन.एच.आई. को ट्रांस्फर करने के लिए कह रही थी तो ऐसा क्यों नहीं किया गया? उन्होंने कहा कि जब यह पी.पी.पी मोड पर परियोजना थी तो इसमें क्या पी.डब्लू.डी. का भी बजट खर्च किया गया और खर्च किया गया तो क्यों? पाठक ने कहा कि जिला मुख्यालय जोड़ों अभियान के तहत योजनाओं की मॉनिटरिंग होती थी तो इस परियोजना की हुई की नहीं, और हुई तो क्यों और किसके इशारे पर लगातार अनदेखी की जाती रही? उन्होंने कहा कि ठेकेदार कम्पनी की आर्थिक क्षमता का बिना आंकलन किये ठेका क्यों दिया गया? इसके अलावा उत्तर प्रदेश में विकास कार्य भी चेहेतों को लाभ देने के लिए कराये गये। सरकारी धन की लूट हुई। अनियोजित और अनियंत्रित परियोजनाएं बनाई गयी। प्रदेश महामंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सवाल है, कि दिल्ली-यमुनोत्री स्टेट हाइवे के निर्माण में हुए घोटाले का जिम्मेदार कौन है केवल 13.33 फीसदी काम 604 करोड़ के लगभग का भुगतान, किसकी तिजोरी में गया। मुख्यमंत्री जी बताएं कि काम 148 करोड़ का भुगतान 600 करोड़ से भी अधिक जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा कि 11 जून, 2014 काम न किए जाने के बावजूद 371 दिन का समय किसकी शह पर बढ़ाया गया? पाठक ने कहा कि 206 किलो मीटर की यह परियोजना जो 900 दिन में पूरी होनी थी निर्माण कार्य की गति प्राप्त नहीं होने के बावजूद लगातार समय क्यो बढ़ाया? जिसके कारण परियोजना की लागत 1735 करोड़ से बढ़कर 2800 करोड़ हो गई इसका जिम्मेदार कौन? उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार की रवानगी का अहसास कर अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुटे हैं। जिस प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग के दावे होते है उसमें इतना सब कुछ होता रहा, कोई कुछ जान कैसे नहीं पाया। प्रदेश के क्लीन चेहरे वाले मुख्यमंत्री जवाब दें, प्रदेश की जनता जवाब चाहती है। प्रदेश महामंत्री ने कहा कि इसके साथ ही गोमतीनगर में 13 करोड़ रूपये खर्च कर बीस किलोमीटर में बनाए गये साइकिल पथ तोड़े जाएंगे। नालों के ऊपर बनाए गये साइकिल पथ बारिश में भारी पड़ेंगे, लिहाजा नालों की सफाई करने के लिए नगर निगम ने उन्हें जगह-जगह तोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता के दबाव और नगर निगम की आपत्ति के बाद भी तेजी के साथ बनाए गये साइकिल पथ का उपयोग भी नहीं के बराबर है। पाठक ने कहा कि गोमतीनगर के विशाल खण्ड, विनम्र खण्ड, विराम खण्ड, अंबेडकर स्मारक से लेकर सिटी मांटेसरी स्कूल तक, पत्रकारपुरम से मनोज पाण्डेय से चौराहा, हुसड़िया चैराहे के पास साइकिल पथ के लिए नालों को बंद कर दिया गया था। एक दो जगह तो लम्बी दूरी मेनहोल बनाए गये, जबकि शेष पर सीसी सड़क बना दी गयी। ऐसे में नाले में फंसे कचरे को साफ करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जबाब दें कि क्या अपने चुनाव चिन्ह के प्रचार के लिए करोड़ों रूपये का सरकारी धन बर्बाद करके नाली-नालों को जाम कर शहर को बदहाल करने का काम किया है ?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सहारनपुर-यमुनोत्री स्टेट हाईवे में घोटाले का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कटघरे में खड़ा किया है। पार्टी ने इस बारे में उनसे जवाब मांगा है। सहारनपुर यमुनोत्री स्टेट हाईवे घोटाले एवं नगर निगम की आपत्ति के बावजूद नालों को पाटकर साईकिल पथ बनाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछा कि यूपी स्टेट हाईवे आथारिटी (उप्सा) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव है वह बताएं कि हाईवे घोटाले और सफाई के अभाव में बजबजाते नालों से बदहाल जनजीवन का दोषी कौन है। प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि यूपी स्टेट हाईवे आथारिटी (उप्सा) के तहत फोरलेन सड़क बनाने को लेकर घोटाला सामने आया है। जिस कम्पनी को काम दिया गया, उसने 30 मार्च 2012 को 900 दिनों में काम करने का दावा किया और परियोजना कि अनुमानित लागत 1735 करोड़ रूपये आंकी। उन्होंने कहा कि कम्पनी ने 01 अप्रैल 2012 से काम चालू करवाया, जैसा की जानकारी आ रही है नवम्बर 2013 में काम बंद हो गया। पाठक ने कहा कि 11 जून 2014 को समय विस्तार देते हुए कम्पनी का काम पुनः शुरू करने की बात कही गयी लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। नवम्बर 2013 से मौके पर काम बंद है। इसकी जांच पड़ताल क्यों नहीं हुई? जो लोग कह रहे है कि काम बोलता है उनके कारनामे बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उप्सा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने क्यों नही अध्यक्ष के तौर पर इस कम्पनी द्वारा काम न करने की समीक्षा की? प्रदेश महामंत्री ने कहा कि पुनरीक्षित करने के बाद दोगनी कीमत हो जायेगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा? इसके अलावा आखिर चार जिले बागपत, शामली, सहारनपुर और गाजियाबाद को जोड़ने की परियोजना परवान नही चढ़ पाई तो कौन जिम्मेदार है? उन्होंने कहा कि क्या केन्द्र सरकार इस महत्वपूर्ण मार्ग को एन.एच.आई. को ट्रांस्फर करने के लिए कह रही थी तो ऐसा क्यों नहीं किया गया? उन्होंने कहा कि जब यह पी.पी.पी मोड पर परियोजना थी तो इसमें क्या पी.डब्लू.डी. का भी बजट खर्च किया गया और खर्च किया गया तो क्यों? पाठक ने कहा कि जिला मुख्यालय जोड़ों अभियान के तहत योजनाओं की मॉनिटरिंग होती थी तो इस परियोजना की हुई की नहीं, और हुई तो क्यों और किसके इशारे पर लगातार अनदेखी की जाती रही? उन्होंने कहा कि ठेकेदार कम्पनी की आर्थिक क्षमता का बिना आंकलन किये ठेका क्यों दिया गया? इसके अलावा उत्तर प्रदेश में विकास कार्य भी चेहेतों को लाभ देने के लिए कराये गये। सरकारी धन की लूट हुई। अनियोजित और अनियंत्रित परियोजनाएं बनाई गयी। प्रदेश महामंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सवाल है, कि दिल्ली-यमुनोत्री स्टेट हाइवे के निर्माण में हुए घोटाले का जिम्मेदार कौन है केवल 13.33 फीसदी काम 604 करोड़ के लगभग का भुगतान, किसकी तिजोरी में गया। मुख्यमंत्री जी बताएं कि काम 148 करोड़ का भुगतान 600 करोड़ से भी अधिक जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा कि 11 जून, 2014 काम न किए जाने के बावजूद 371 दिन का समय किसकी शह पर बढ़ाया गया? पाठक ने कहा कि 206 किलो मीटर की यह परियोजना जो 900 दिन में पूरी होनी थी निर्माण कार्य की गति प्राप्त नहीं होने के बावजूद लगातार समय क्यो बढ़ाया? जिसके कारण परियोजना की लागत 1735 करोड़ से बढ़कर 2800 करोड़ हो गई इसका जिम्मेदार कौन? उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार की रवानगी का अहसास कर अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुटे हैं। जिस प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग के दावे होते है उसमें इतना सब कुछ होता रहा, कोई कुछ जान कैसे नहीं पाया। प्रदेश के क्लीन चेहरे वाले मुख्यमंत्री जवाब दें, प्रदेश की जनता जवाब चाहती है। प्रदेश महामंत्री ने कहा कि इसके साथ ही गोमतीनगर में 13 करोड़ रूपये खर्च कर बीस किलोमीटर में बनाए गये साइकिल पथ तोड़े जाएंगे। नालों के ऊपर बनाए गये साइकिल पथ बारिश में भारी पड़ेंगे, लिहाजा नालों की सफाई करने के लिए नगर निगम ने उन्हें जगह-जगह तोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता के दबाव और नगर निगम की आपत्ति के बाद भी तेजी के साथ बनाए गये साइकिल पथ का उपयोग भी नहीं के बराबर है। पाठक ने कहा कि गोमतीनगर के विशाल खण्ड, विनम्र खण्ड, विराम खण्ड, अंबेडकर स्मारक से लेकर सिटी मांटेसरी स्कूल तक, पत्रकारपुरम से मनोज पाण्डेय से चौराहा, हुसड़िया चैराहे के पास साइकिल पथ के लिए नालों को बंद कर दिया गया था। एक दो जगह तो लम्बी दूरी मेनहोल बनाए गये, जबकि शेष पर सीसी सड़क बना दी गयी। ऐसे में नाले में फंसे कचरे को साफ करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जबाब दें कि क्या अपने चुनाव चिन्ह के प्रचार के लिए करोड़ों रूपये का सरकारी धन बर्बाद करके नाली-नालों को जाम कर शहर को बदहाल करने का काम किया है ?

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