शशिकला का राजनैतिक भविष्य शुरू होने से पहले ही खत्म
सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अन्नाद्रमुक महासचिव शशिकला को दोषी करार देते हुए निचली अदालत के चार साल की सजा और 10 करोड़ जुर्माने को बरकरार रखा. मामले में शशिकला के अलावा उनके दो रिश्तेदार इलावरसी और सुधाकरण को भी दोषी पाया गया. पूर्व सीएम जयललिता के निधन के बाद उन पर चल रहे सभी मामलों को खत्म कर दिया गया. कोर्ट ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की.जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय की खंडपीठ ने शशिकला और अन्य आरोपियों को बंगलुरु की विशेष अदालत के सामने समर्पण करने और बाकी सजा को जेल में बिताने का आदेश दिया. खंडपीठ ने कहा कि आरोपियों ने अवैध धन कमाने के लिए गहरी साजिश रची. फर्जी कंपनियां बना कर धन को छिपाने की कोशिश की, ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके. भ्रष्टाचार के बढ़ते स्वरुप और समाज के हर क्षेत्र में व्यापक रूप को देखते हुए सख्त सजा देना जरूरी है, ताकि भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रवैया अपना सके.खंडपीठ ने कहा कि भ्रष्टाचारी समाज और देश के प्रति जबावदेह हैं, खासकर जनप्रतिनिधि, जिन पर समाज के कल्याण की जिम्मेवारी है. ऐसे में सार्वजनिक पद पर बैठे लोग सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर भ्रष्ट आचरण करते हैं, तो उन्हें सजा होनी चाहिए. शपथ लेकर भ्रष्ट आचरण करनेवाले समाज के दोषी हैं. उन्हें दंड देना जरूरी हैशशिकला की किस्मत का फैसला करनेवाला शीर्ष अदालत का बहुप्रतीक्षित निर्णय महज आठ मिनट में घोषित हो गया. दोनों जज, जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय कोर्ट छह में सुबह 10:32 बजे आसन पर पहुंचे. कर्मियों द्वारा इस फैसले की सील खोले जाने के बाद जजों ने कुछ देर चर्चा की.
जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी ने इस मामले में सबसे पहले 1996 में एक मामला दर्ज कराया. उन्होंने जयललिता पर आरोप लगाया कि 1991 से 1996 तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने 66.65 करोड़ की संपत्ति जमा की और यह उनके आय के स्रोत से अधिक है.
सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अन्नाद्रमुक महासचिव शशिकला को दोषी करार देते हुए निचली अदालत के चार साल की सजा और 10 करोड़ जुर्माने को बरकरार रखा. मामले में शशिकला के अलावा उनके दो रिश्तेदार इलावरसी और सुधाकरण को भी दोषी पाया गया. पूर्व सीएम जयललिता के निधन के बाद उन पर चल रहे सभी मामलों को खत्म कर दिया गया. कोर्ट ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की.जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय की खंडपीठ ने शशिकला और अन्य आरोपियों को बंगलुरु की विशेष अदालत के सामने समर्पण करने और बाकी सजा को जेल में बिताने का आदेश दिया. खंडपीठ ने कहा कि आरोपियों ने अवैध धन कमाने के लिए गहरी साजिश रची. फर्जी कंपनियां बना कर धन को छिपाने की कोशिश की, ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके. भ्रष्टाचार के बढ़ते स्वरुप और समाज के हर क्षेत्र में व्यापक रूप को देखते हुए सख्त सजा देना जरूरी है, ताकि भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रवैया अपना सके.खंडपीठ ने कहा कि भ्रष्टाचारी समाज और देश के प्रति जबावदेह हैं, खासकर जनप्रतिनिधि, जिन पर समाज के कल्याण की जिम्मेवारी है. ऐसे में सार्वजनिक पद पर बैठे लोग सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर भ्रष्ट आचरण करते हैं, तो उन्हें सजा होनी चाहिए. शपथ लेकर भ्रष्ट आचरण करनेवाले समाज के दोषी हैं. उन्हें दंड देना जरूरी हैशशिकला की किस्मत का फैसला करनेवाला शीर्ष अदालत का बहुप्रतीक्षित निर्णय महज आठ मिनट में घोषित हो गया. दोनों जज, जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय कोर्ट छह में सुबह 10:32 बजे आसन पर पहुंचे. कर्मियों द्वारा इस फैसले की सील खोले जाने के बाद जजों ने कुछ देर चर्चा की.
जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी ने इस मामले में सबसे पहले 1996 में एक मामला दर्ज कराया. उन्होंने जयललिता पर आरोप लगाया कि 1991 से 1996 तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने 66.65 करोड़ की संपत्ति जमा की और यह उनके आय के स्रोत से अधिक है.

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