पटवा के बिना मप्र में राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती: सीएम
मप्र विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन में दिवंगत नेताओं को श्रृद्धांजलि दी गई। भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और अन्य दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के बाद उनके सम्मान में सदन की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सुबह सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीतासरन शर्मा ने पटवा और अन्य दिवंगतों के निधन का उल्लेख करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वर्गीय पटवा को श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सुंदरलाल पटवा के बिना मप्र में राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती। वे कुशल संगठक और मौलिक चिंतक थे। प्रदेश में जहां जाते वहां जन सैलाब उमड़ पड़ता था। जिसके चलते उन्हें विधान पुरूष की संज्ञा दी गई थी। यह बहुत कम लोगों को मिलता हैं। लोकतंत्र की सही जनभावना उनके अंदर दिखाई देती थी। पटवा जी से जुड़ी एक घटना को याद करते हुए सीएम ने सदन में कहा कि पटवा जी ने छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव लडऩे का फैसला लिया था। मैने उनसे कहा वहां पर कमलनाथ लोकप्रिय नेता हैं। वहां मत जाओं कुछ नहीं मिलने वाला। इस पर पटवा जी बोले अब तो फैसला ले लिया हैं चुनाव तो लड़ूगा चाहे जो भी परिणाम हो। और छिंदवाड़ा के उस चुनाव के परिणाम जनता जानती हैं। वे प्रदेश के बाहर भी बड़ी शान से सुने जाते थे। वे हमेशा कुशल प्रशासक के तौर पर प्रदेशवासियों के दिल में बसे रहेंगे। ग्रामविकास की कल्पना को सही मायनों में स्वर्गीय पटवा ने ही जमीन पर उतारा। स्वर्गीय पटवा को हाल ही में पद्मविभूषण सम्मान मिलने को सीएम चौहान ने प्रदेश का सम्मान बताते हुए कहा कि वे अविभाजित मध्यप्रदेश में बस्तर से झाबुआ तक की यात्रा करने वाले एकमात्र नेता थे।

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