सफल जनप्रतिनिधि बनने के लिए सदन और समाज में अपनी सक्रियता को निरंतर बढ़ाना हैं - नंदकुमारसिंह चौहान
उद्घाटन सत्र के बाद विधायक की भूमिका और अधिकार सदन में विषय पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि भारत में जनता का शासन जनता के द्वारा जनता के लिए है, इसलिए संविधान में जिस लोक कल्याणकारी राज्य की कल्पना की गई है उसका ज्ञान हम सभी को होना चाहिए। इसके लिए हमारे विधायकों को गहन अध्ययन करना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ कानून केंद्र के होते हैं कुछ राज्य के होते हैं और कुछ समवर्ती सूची में होते हैं। इसकी हमें जानकारी होना चाहिए। हमारी गरिमा से सदन की गरिमा बढ़ती है और सदन की गरिमा से ही हमारी गरिमा बढ़ती है। उन्होंने मध्यप्रदेश के विधायकों को इस बात के लिए बधाई दी कि मध्यप्रदेश विधानसभा के बारे में देश भर में अच्छी राय है, क्योंकि यहां के विधायक अपने व्यवहार में आमतौर पर आचार संहिता का पालन करते हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही दूसरों के मुकाबले सार्थक और प्रभावी है। उन्होंने विधायकों से कहा कि सरकार बिल लेकर आती है उसे भी ठीक से पढ़ा करें। हर विषय पर अपनी पूरी तैयारी करें। बिल के अंत में उसके कारण और उद्देश्य लिखे होते हैं। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों से चलकर सूचना के माध्यम आज सोशल मीडिया तक पहुंच गए हैं और भारत की नई पीढ़ी बहुत तेजी से सोशल मीडिया से जुड़ रही है। उन्होंने कहा कि सवा सौ करोड़ के भारत में 108 करोड़ मोबाइल है और इनमें से 33 करोड़ स्मार्टफोन है। जो कुछ ही दिनों में 50 करोड़ के आसपास हो जाएंगे।उन्होंने कहा कि गत 2 वर्षों में इटली और फ्रांस की जनसंख्या के बराबर भारत में मोबाइल की संख्या बढ़ी है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार इस पर बहुत तेजी से काम कर रही है। उन्होंने रेलवे, विदेश मंत्रालय और उनके स्वयं के मंत्रालय के अनेक ऐसे उदाहरण भी बताएं, जिनका संबंध ट्विटर पर जानकारी मिलने के बाद समस्या के निष्पादन से था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि हमारे लिए गौरव की बात है कि देश के प्रधानमंत्री को 2 करोड़ से अधिक लोग ट्विटर पर फॉलो करते हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटलाइजेशन करने से देश में बिचैलियों की भूमिका समाप्त हो रही है। रसोई गैस सब्सिडी, राशन, मनरेगा और पेंशन आदि में डिजिटल व्यवस्था के कारण सिर्फ 2 साल में 50000 करोड रुपए बिचैलियों से बचाए जा सके है। श्री रविशंकर प्रसाद ने नर्मदा यात्रा को एक बड़े बदलाव का कार्यक्रम बताते हुए कहा कि यह आध्यात्म पर्यावरण और हरित क्रांति की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
श्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि दुनिया में फेसबुक पर 190 करोड लोग जुड़े हैं इनमें से लगभग 17 करोड़ भारतीय इसी प्रकार वाट्सअप पर दुनिया में 120 करोड़ लोग काम करते हैं। इसमें भारतीयों की संख्या 16 करोड़ ट्विटर पर काम करने वालों में दुनिया हकीकत 30 करोड़ लोगों में से दो करोड़ भारत में इन आंखों को देखते हुए हमें सोशल मीडिया के महत्व को समझना पड़ेगा। विधायकों के समन्वय पर बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत ने ऐसे विधायकों को बेहतर समन्वय का प्रतीक बताया जो कई बार से जीतकर विधानसभा में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि समन्वय शब्द नहीं स्वभाव है। यह प्रयत्न ही नहीं है, यह हमारी भारतीय परंपरा है कि सबके साथ चलना और सबको साथ लेकर चलना यही एकात्मता है और इसी पर भारत टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां संयुक्त परिवार शब्द नहीं था। यह हमें अंग्रेजों ने दिया हम तो एक स्वाभाविक परिवार है ही जो एक उदात्त लक्ष्य लेकर चलता है। हमें यह देखना चाहिए कि हजार वर्षों के भीतर हमारे परिवारभाव में कोई खरोच तो नहीं लगी है। कहीं विभक्तता तो नहीं बढ़ी है। व्यक्तिवाद भारत की परंपरा नहीं है, इसलिए जब हम समाज में बड़ा लक्ष्य लेकर चलते हैं तो छोटी चीजें छोड़ना होती है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद हमारे ऊपर हमले हुए, तोड़फोड़ हुई, लेकिन इसके बावजूद हमने प्रतिकार नहीं किया, क्योंकि हम सब जानते हैं। यह हमारा अपना भारतीय समाज ही है, इसलिए उसके विरोध में कोई काम क्यों करना। उन्होंने अटल जी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हमारे कार्यकर्ता की विशेषता है कि अटल जी के प्रधानमंत्री रहते वामपंथी विचार की डीएमके और दक्षिणपंथी विचारधारा की शिवसेना भी उनके साथ थी।
उद्घाटन सत्र के बाद विधायक की भूमिका और अधिकार सदन में विषय पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि भारत में जनता का शासन जनता के द्वारा जनता के लिए है, इसलिए संविधान में जिस लोक कल्याणकारी राज्य की कल्पना की गई है उसका ज्ञान हम सभी को होना चाहिए। इसके लिए हमारे विधायकों को गहन अध्ययन करना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ कानून केंद्र के होते हैं कुछ राज्य के होते हैं और कुछ समवर्ती सूची में होते हैं। इसकी हमें जानकारी होना चाहिए। हमारी गरिमा से सदन की गरिमा बढ़ती है और सदन की गरिमा से ही हमारी गरिमा बढ़ती है। उन्होंने मध्यप्रदेश के विधायकों को इस बात के लिए बधाई दी कि मध्यप्रदेश विधानसभा के बारे में देश भर में अच्छी राय है, क्योंकि यहां के विधायक अपने व्यवहार में आमतौर पर आचार संहिता का पालन करते हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही दूसरों के मुकाबले सार्थक और प्रभावी है। उन्होंने विधायकों से कहा कि सरकार बिल लेकर आती है उसे भी ठीक से पढ़ा करें। हर विषय पर अपनी पूरी तैयारी करें। बिल के अंत में उसके कारण और उद्देश्य लिखे होते हैं। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों से चलकर सूचना के माध्यम आज सोशल मीडिया तक पहुंच गए हैं और भारत की नई पीढ़ी बहुत तेजी से सोशल मीडिया से जुड़ रही है। उन्होंने कहा कि सवा सौ करोड़ के भारत में 108 करोड़ मोबाइल है और इनमें से 33 करोड़ स्मार्टफोन है। जो कुछ ही दिनों में 50 करोड़ के आसपास हो जाएंगे।उन्होंने कहा कि गत 2 वर्षों में इटली और फ्रांस की जनसंख्या के बराबर भारत में मोबाइल की संख्या बढ़ी है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार इस पर बहुत तेजी से काम कर रही है। उन्होंने रेलवे, विदेश मंत्रालय और उनके स्वयं के मंत्रालय के अनेक ऐसे उदाहरण भी बताएं, जिनका संबंध ट्विटर पर जानकारी मिलने के बाद समस्या के निष्पादन से था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि हमारे लिए गौरव की बात है कि देश के प्रधानमंत्री को 2 करोड़ से अधिक लोग ट्विटर पर फॉलो करते हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटलाइजेशन करने से देश में बिचैलियों की भूमिका समाप्त हो रही है। रसोई गैस सब्सिडी, राशन, मनरेगा और पेंशन आदि में डिजिटल व्यवस्था के कारण सिर्फ 2 साल में 50000 करोड रुपए बिचैलियों से बचाए जा सके है। श्री रविशंकर प्रसाद ने नर्मदा यात्रा को एक बड़े बदलाव का कार्यक्रम बताते हुए कहा कि यह आध्यात्म पर्यावरण और हरित क्रांति की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
श्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि दुनिया में फेसबुक पर 190 करोड लोग जुड़े हैं इनमें से लगभग 17 करोड़ भारतीय इसी प्रकार वाट्सअप पर दुनिया में 120 करोड़ लोग काम करते हैं। इसमें भारतीयों की संख्या 16 करोड़ ट्विटर पर काम करने वालों में दुनिया हकीकत 30 करोड़ लोगों में से दो करोड़ भारत में इन आंखों को देखते हुए हमें सोशल मीडिया के महत्व को समझना पड़ेगा। विधायकों के समन्वय पर बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत ने ऐसे विधायकों को बेहतर समन्वय का प्रतीक बताया जो कई बार से जीतकर विधानसभा में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि समन्वय शब्द नहीं स्वभाव है। यह प्रयत्न ही नहीं है, यह हमारी भारतीय परंपरा है कि सबके साथ चलना और सबको साथ लेकर चलना यही एकात्मता है और इसी पर भारत टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां संयुक्त परिवार शब्द नहीं था। यह हमें अंग्रेजों ने दिया हम तो एक स्वाभाविक परिवार है ही जो एक उदात्त लक्ष्य लेकर चलता है। हमें यह देखना चाहिए कि हजार वर्षों के भीतर हमारे परिवारभाव में कोई खरोच तो नहीं लगी है। कहीं विभक्तता तो नहीं बढ़ी है। व्यक्तिवाद भारत की परंपरा नहीं है, इसलिए जब हम समाज में बड़ा लक्ष्य लेकर चलते हैं तो छोटी चीजें छोड़ना होती है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद हमारे ऊपर हमले हुए, तोड़फोड़ हुई, लेकिन इसके बावजूद हमने प्रतिकार नहीं किया, क्योंकि हम सब जानते हैं। यह हमारा अपना भारतीय समाज ही है, इसलिए उसके विरोध में कोई काम क्यों करना। उन्होंने अटल जी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हमारे कार्यकर्ता की विशेषता है कि अटल जी के प्रधानमंत्री रहते वामपंथी विचार की डीएमके और दक्षिणपंथी विचारधारा की शिवसेना भी उनके साथ थी।
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