पन्ना टाइगर रिजर्व में एक नया ही माहौल था, जिसमें वन-पक्षियों के
कलरव के साथ पहली बार जंगल घूमने आये दिव्यांगों का उत्साह भी शामिल था।
रिजर्व ने पन्ना के आशा भवन में अध्ययनरत 26 दिव्यांग छात्र-छात्राओं के
लिये विशेष प्रकृति शिविर का आयोजन किया था।
दिव्यांगों ने हिनौता गेट से प्रवेश किया। उन्हें विजिटर सेंटर का भ्रमण
करवाते हुए दी गई जानकारी को बड़ी रुचि और उत्साह के साथ सुना और महसूस
किया। दिव्यांगों ने जंगल में धुंधुआ सेहा, बड़गड़ी, भण्डार आदि क्षेत्र का
भ्रमण कर चीतल, नील गाय, सांभर, चिंकारा, चौसिंघा, गिद्ध और कई तरह के
पक्षियों की आवाजें सुनीं। वन अधिकारी-कर्मचारियों ने दिव्यांगों को इन
पशु-पक्षियों के प्रकृति-व्यवहार के बारे में जानकारी दी। दिव्यांगों ने
पेड़ों की छाल, पत्तियों, पौधों और फूलों को छूकर, सूंघ कर उनके बारे में
जानकारी ली।
विद्यार्थियों को द लास्ट वाइल्डरनेस फाउण्डेशन संस्था की सुश्री रोशनी डिसूजा, रिसोर्स पर्सन श्री देवीदत्त चतुर्वेदी और श्री भवानीदीन ने वन, वन्य-प्राणियों और उनके संरक्षण के बारे में जानकारी दी।
दिव्यांगों ने हिनौता गेट से प्रवेश किया। उन्हें विजिटर सेंटर का भ्रमण
करवाते हुए दी गई जानकारी को बड़ी रुचि और उत्साह के साथ सुना और महसूस
किया। दिव्यांगों ने जंगल में धुंधुआ सेहा, बड़गड़ी, भण्डार आदि क्षेत्र का
भ्रमण कर चीतल, नील गाय, सांभर, चिंकारा, चौसिंघा, गिद्ध और कई तरह के
पक्षियों की आवाजें सुनीं। वन अधिकारी-कर्मचारियों ने दिव्यांगों को इन
पशु-पक्षियों के प्रकृति-व्यवहार के बारे में जानकारी दी। दिव्यांगों ने
पेड़ों की छाल, पत्तियों, पौधों और फूलों को छूकर, सूंघ कर उनके बारे में
जानकारी ली।विद्यार्थियों को द लास्ट वाइल्डरनेस फाउण्डेशन संस्था की सुश्री रोशनी डिसूजा, रिसोर्स पर्सन श्री देवीदत्त चतुर्वेदी और श्री भवानीदीन ने वन, वन्य-प्राणियों और उनके संरक्षण के बारे में जानकारी दी।
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