जीएसटी: बीस लाख तक कारोबार करने वाली इकाइयों को छूट
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर गठित परिषद् ने शुक्रवार को यहां अपनी पहली बैठक की। बैठक में व्यापारियों को जीएसटी से छूट देने संबंधित राजस्व सीमा और केन्द्र व राज्यों के बीच प्रशासनिक शक्तियों के बंटवारे को लेकर सहमति बनी।बीस लाख रुपये तक सालाना कारोबार करने वाली इकाइयों को जीएसटी में छूट दी जायेगी वहीं पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों में यह छूट 10 लाख रुपये होगी। इसके साथ ही सभी उपकर जीएसटी में समाहित किए जायेंगे।बैठक में फैसला लिया गया कि 1.5 करोड़ रुपये से कम के सालाना कारोबार करने वाले करदाता राज्य के दायरे में आएंगे। वहीं 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले व्यापारी से केंद्र या राज्य का कोई एक अधिकारी पूछताछ करेगा।हालांकि सेवाकर से जुड़ी विशेषज्ञता के अभाव के चलते सभी 11 लाख सेवा करदाता फिलहाल केंद्र के अन्तर्गत ही बने रहेंगे। इस श्रेणी में जो नये करदाता सूची में आएंगे, उसे केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित किया जाएगा।परिषद की अगली बैठक 30 सितंबर को होगी। जिसमें छूट देने संबंधी नियमों के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। वहीं जीएसटी टैक्स स्लैब के बारे में निर्णय 17-19 अक्टूबर को होने वाली बैठक में लिया जाएगा।बैठक के बारे में बताते हुए वित्तमंत्री अरूण जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद में आज सभी निर्णय आम सहमति से किये गये। जीएसटी परिषद की बैठक में इस बात को लेकर आम सहमति थी कि नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के कारण राज्यों के राजस्व में किसी प्रकार के नुकसान को लेकर मुआवजे का भुगतान नियमित अंतराल (तिमाही या दो महीने) पर किया जाना चाहिए। मुआवजे के आकलन के लिये आधार वर्ष 2015-16 होगा और भुगतान के लिये राज्य एवं केंद्र मिलकर कोई नीति तय करेंगे।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर गठित परिषद् ने शुक्रवार को यहां अपनी पहली बैठक की। बैठक में व्यापारियों को जीएसटी से छूट देने संबंधित राजस्व सीमा और केन्द्र व राज्यों के बीच प्रशासनिक शक्तियों के बंटवारे को लेकर सहमति बनी।बीस लाख रुपये तक सालाना कारोबार करने वाली इकाइयों को जीएसटी में छूट दी जायेगी वहीं पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों में यह छूट 10 लाख रुपये होगी। इसके साथ ही सभी उपकर जीएसटी में समाहित किए जायेंगे।बैठक में फैसला लिया गया कि 1.5 करोड़ रुपये से कम के सालाना कारोबार करने वाले करदाता राज्य के दायरे में आएंगे। वहीं 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले व्यापारी से केंद्र या राज्य का कोई एक अधिकारी पूछताछ करेगा।हालांकि सेवाकर से जुड़ी विशेषज्ञता के अभाव के चलते सभी 11 लाख सेवा करदाता फिलहाल केंद्र के अन्तर्गत ही बने रहेंगे। इस श्रेणी में जो नये करदाता सूची में आएंगे, उसे केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित किया जाएगा।परिषद की अगली बैठक 30 सितंबर को होगी। जिसमें छूट देने संबंधी नियमों के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। वहीं जीएसटी टैक्स स्लैब के बारे में निर्णय 17-19 अक्टूबर को होने वाली बैठक में लिया जाएगा।बैठक के बारे में बताते हुए वित्तमंत्री अरूण जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद में आज सभी निर्णय आम सहमति से किये गये। जीएसटी परिषद की बैठक में इस बात को लेकर आम सहमति थी कि नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के कारण राज्यों के राजस्व में किसी प्रकार के नुकसान को लेकर मुआवजे का भुगतान नियमित अंतराल (तिमाही या दो महीने) पर किया जाना चाहिए। मुआवजे के आकलन के लिये आधार वर्ष 2015-16 होगा और भुगतान के लिये राज्य एवं केंद्र मिलकर कोई नीति तय करेंगे।

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