सदन में अपनों से ही घिरे खनिज मंत्री ,नाराज विधायक ने दी इस्तीफे की धमकी
शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने ही पार्टी के विधायकों की वजह से मुसीबत में फंसती नजर आ रही है। पहले पूर्व बाबूलाल गौर और अब छतरपुर जिले से भाजपा विधायक आरडी प्रजापति ने अवैध खनन का सवाल उठाकर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। विवाद इतना ज्यादा बढ़ा, कि खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल को भाजपा के लगभग 40 विधायकों ने घेर लिया। दरअसल, विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को विधायक आरडी प्रजापति ने छतरपुर जिले में अवैध उत्खनन का मामला उठाया। विधायक ने कहा कि यूपी से खनिज माफिया और उनके गुंडे आकर रेत का उत्खनन करते हैं। वहीं मंत्री कहते हैं, कि उत्खनन नहीं हो रहा है। अधिकारी गलत जानकारी दे रहे हैं। यदि मैं गलत हूं तो मेरे खिलाफ एफआईआर की जाए। खनिज अधिकारी चांदला को निलंबित करने की मांग नहीं माने जाने पर उन्होने इस्तीफे की धमकी दे डाली। इसके बाद कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने इस पूरे मामले का समर्थन करते हुए सरकार से पूछा कि वह अवैध उत्खनन को लेकर क्या कदम उठा रही है। जवाब में मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल के मुकाबले अब ज्यादा रॉयल्टी सरकार को मिलती है। भारी शोर शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा ने सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया। विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधायक आरडी प्रजापति ने वरिष्ठ सदस्यों के कहने पर बयान दिया कि इस मुद्दे पर उनकी मंत्री से बात हुई और मिले आश्वासन से पूरी तरह सहमत हुए।विधानसभा में उत्पन्न हुए गतिरोध को अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा ने अध्यक्षीय व्यवस्था देकर दूर किया। विधानसभा की कार्रवाई जब पुन: शुरू हुई तो, कांग्रेस के बाला बच्चन तथा रामनिवास रावत ने तर्क दिया कि जबाव आना चाहिए। क्योंकि जो प्रश्न सदन में उठा, उसका जबाव सदन में ही आना चाहिए, न कि सदन के बाहर दिया जाए। यह सदन की गरिमा और सदस्यों के अधिकारों का विषय है। वहीं अध्यक्ष ने कहा, कि संबंधित सदस्य के यह कहने के बाद फिर विवाद का कोई विषय बचता ही नहीं है, कि समाधान हो गया है। क्योंकि परंपरानुसार प्रश्नकाल के बाद कार्रवाई स्थगित होने या भोजन अवकाश के बाद यह स्थगित होने के बाद पूर्व के विषय पुन: शुरू हुई कार्रवाई के दौरान नहीं उठाए जा सकते हैं।
शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने ही पार्टी के विधायकों की वजह से मुसीबत में फंसती नजर आ रही है। पहले पूर्व बाबूलाल गौर और अब छतरपुर जिले से भाजपा विधायक आरडी प्रजापति ने अवैध खनन का सवाल उठाकर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। विवाद इतना ज्यादा बढ़ा, कि खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल को भाजपा के लगभग 40 विधायकों ने घेर लिया। दरअसल, विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को विधायक आरडी प्रजापति ने छतरपुर जिले में अवैध उत्खनन का मामला उठाया। विधायक ने कहा कि यूपी से खनिज माफिया और उनके गुंडे आकर रेत का उत्खनन करते हैं। वहीं मंत्री कहते हैं, कि उत्खनन नहीं हो रहा है। अधिकारी गलत जानकारी दे रहे हैं। यदि मैं गलत हूं तो मेरे खिलाफ एफआईआर की जाए। खनिज अधिकारी चांदला को निलंबित करने की मांग नहीं माने जाने पर उन्होने इस्तीफे की धमकी दे डाली। इसके बाद कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने इस पूरे मामले का समर्थन करते हुए सरकार से पूछा कि वह अवैध उत्खनन को लेकर क्या कदम उठा रही है। जवाब में मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल के मुकाबले अब ज्यादा रॉयल्टी सरकार को मिलती है। भारी शोर शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा ने सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया। विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधायक आरडी प्रजापति ने वरिष्ठ सदस्यों के कहने पर बयान दिया कि इस मुद्दे पर उनकी मंत्री से बात हुई और मिले आश्वासन से पूरी तरह सहमत हुए।विधानसभा में उत्पन्न हुए गतिरोध को अध्यक्ष डॉ सीताशरण शर्मा ने अध्यक्षीय व्यवस्था देकर दूर किया। विधानसभा की कार्रवाई जब पुन: शुरू हुई तो, कांग्रेस के बाला बच्चन तथा रामनिवास रावत ने तर्क दिया कि जबाव आना चाहिए। क्योंकि जो प्रश्न सदन में उठा, उसका जबाव सदन में ही आना चाहिए, न कि सदन के बाहर दिया जाए। यह सदन की गरिमा और सदस्यों के अधिकारों का विषय है। वहीं अध्यक्ष ने कहा, कि संबंधित सदस्य के यह कहने के बाद फिर विवाद का कोई विषय बचता ही नहीं है, कि समाधान हो गया है। क्योंकि परंपरानुसार प्रश्नकाल के बाद कार्रवाई स्थगित होने या भोजन अवकाश के बाद यह स्थगित होने के बाद पूर्व के विषय पुन: शुरू हुई कार्रवाई के दौरान नहीं उठाए जा सकते हैं।

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