सात माह के दौरान प्रदेश में 19 बाघों की मौत ,वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने राज्यसभा में सौंपे दस्तावेज
बाघों के लिहाज से वर्ष 2016 बेहद खराब रहा। मध्यप्रदेश में भी साल के शुरुआत सात महीनों के दौरान 19 बाघों की मौत हो चुकी हं। यह जानकारी वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी है। वहीं इस वर्ष अब तक देश में बाघ की मौतों के 70 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, वहीं जिनमें तस्करों द्वारा मारे जाने की 21 घटनाएं शामिल हैं। यानी हर महीने 10 बाघों की मौत हो रही है। वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2014 में देश भर में बाघों की संख्या में 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ और उनकी अनुमानित संख्या 2226 (1945-2491 रेंज) थी, 2010 में अनुमानित संख्या 1706 (1520-1909) थी, दवे ने बताया कि पिछले साल कुल 78 बाघों के मरने की जानकारी मिली। इनमें तस्करों द्वारा मारने के 14 मामले शामिल हैं। स्वाभाविक मौत एवं अन्य कारणों से 28 की मौत हुई जबकि 36 मामलों की समीक्षा की जा रही है। मंत्री के गृह राज्य मध्य प्रदेश में भी बाघों की बुरी स्थिति हैं। यहां इस साल 19 बाघों की मौत हो चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि राज्यों ने अभी तक 73 बाघों की मौत की जानकारी दी है। इनमें 21 की तस्करों द्वारा मारे जाने की पुष्टि हुई है। सात मामलों में स्वाभाविक मौत हुई है। शेष 45 मामलों की जांच की जा रही है। प्रदेश सरकार के वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने मौजूदा मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में बताया कि प्रदेश में पिछले डेढ़ साल में 34 बाघों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि बाघों के शिकार एवं अन्य आरोपों के सिलसिले में इस अवधि में कुल 56 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।कभी देश में बाघों के मामले में पहले स्थान रहने वाला मध्य प्रदेश आज इस सूची में तीसरे स्थान पर आ गया है। प्रदेश में कुल 308 बाघों ही बचे हैं। वहीं कर्नाटका में सबसे ज्यादा 408 बाघ पाए गए हैं। इस सूची में उत्तराखण्ड दूसरे स्थान पर है जिसमें 340 बाघों की मौजूदगी पाई गई है।
बाघों के लिहाज से वर्ष 2016 बेहद खराब रहा। मध्यप्रदेश में भी साल के शुरुआत सात महीनों के दौरान 19 बाघों की मौत हो चुकी हं। यह जानकारी वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी है। वहीं इस वर्ष अब तक देश में बाघ की मौतों के 70 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, वहीं जिनमें तस्करों द्वारा मारे जाने की 21 घटनाएं शामिल हैं। यानी हर महीने 10 बाघों की मौत हो रही है। वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2014 में देश भर में बाघों की संख्या में 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ और उनकी अनुमानित संख्या 2226 (1945-2491 रेंज) थी, 2010 में अनुमानित संख्या 1706 (1520-1909) थी, दवे ने बताया कि पिछले साल कुल 78 बाघों के मरने की जानकारी मिली। इनमें तस्करों द्वारा मारने के 14 मामले शामिल हैं। स्वाभाविक मौत एवं अन्य कारणों से 28 की मौत हुई जबकि 36 मामलों की समीक्षा की जा रही है। मंत्री के गृह राज्य मध्य प्रदेश में भी बाघों की बुरी स्थिति हैं। यहां इस साल 19 बाघों की मौत हो चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि राज्यों ने अभी तक 73 बाघों की मौत की जानकारी दी है। इनमें 21 की तस्करों द्वारा मारे जाने की पुष्टि हुई है। सात मामलों में स्वाभाविक मौत हुई है। शेष 45 मामलों की जांच की जा रही है। प्रदेश सरकार के वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने मौजूदा मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में बताया कि प्रदेश में पिछले डेढ़ साल में 34 बाघों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि बाघों के शिकार एवं अन्य आरोपों के सिलसिले में इस अवधि में कुल 56 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।कभी देश में बाघों के मामले में पहले स्थान रहने वाला मध्य प्रदेश आज इस सूची में तीसरे स्थान पर आ गया है। प्रदेश में कुल 308 बाघों ही बचे हैं। वहीं कर्नाटका में सबसे ज्यादा 408 बाघ पाए गए हैं। इस सूची में उत्तराखण्ड दूसरे स्थान पर है जिसमें 340 बाघों की मौजूदगी पाई गई है।

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