Tuesday, 14 June 2016

SIMHASTH में COLLATOR AND INSURANCE COMPANY की मिलीभगत से लगी करोड़ों की चपत: CONGRESS

SIMHASTH   में COLLATOR  AND INSURANCE COMPANY  की मिलीभगत से लगी करोड़ों की चपत: CONGRESS

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रवि सक्सेना ने उज्जैन जिलाधीश और बीमा कंपनी की मिली भगत से सिंहस्थ में सरकार को लगी करोड़ों रूपयों की चपत का खुलासा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से सिंहस्थ के दौरान साठ दिनों के लिये सिंहस्थ में प्रत्येक आने वाले नागरिक का दो लाख रूपये का बीमा किया था, जिसका सरकार ने बीमा कंपनी को 1 करोड़ 76 लाख 37 हजार 542 रूपयों का प्रीमियम अदा किया था, जिसम न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने दुर्घटना, मृत्यु, आगजनी, तूफान या शासकीय संपत्ति के नुकसान होने पर बीमा कंपनी को मुआवजे की राशि अदा करनी थी। 8 अप्रैल, 2016 से 8 जून, 2016 तक इस बीमा कवर में मेला, संपूर्ण नगर निगम सीमा क्षेत्र में कार्यरत पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारी/कर्मचारी भी शामिल थे। इस बीमा कवर में शासकीय संपत्ति के 100 करोड़ तक का नुकसान, तूफान, भूकंप, आतंकी गतिविधियों से नुकसान पर 50 करोड़ तक की राशि भुगतान करनी थी, आग लगने से हुए नुकसान पर प्रत्येक व्यक्ति को 25 हजार से 01 लाख तक भुगतान करने का प्रावधान था।न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के चीफ रीजनल मैनेजर दीपक भारद्वाज एवं मेला अधिकारी अविनाश लवानिया के बीच एमओयू पर 8 अप्रैल, 2016 को हस्ताक्षर किये गये थे, जिसमें प्रत्येक नागरिक को उक्त स्थितियों में हुए नुकसान पर 2 लाख रूपयों की क्षतिपूर्ति 7 दिवस में एवं शासकीय कर्मचारी को 5 लाख दिये जाने का प्रावधान भी किया गया था, किंतु सिंहस्थ में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आंधी, तूफान तथा डूबने के कारण हुईं मृत्यु पर लगभग 206 पोस्ट मार्टम हुए तथा यात्रियों की लगभग 96 मौतें विभिन्न दुर्घटनाओं में हुईं, किंतु नोडल अधिकारी की अकर्मण्यता के कारण एक भी दावा बीमा कंपनी में प्रस्तुत नहीं किया गया।सिंहस्थ में आंधी, तूफान से 6 लोगों की मृत्यु तथा सैकड़ों घायल यात्रियों के क्लेम बीमा कंपनी में सिंहस्थ नोडल अधिकारी ने प्रस्तुत नहीं किये, जिससे करोड़ों रूपयों की क्षतिपूर्ति का भार सरकार को उठाना पड़ा। बीमा कंपनी और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को क्षतिपूर्ति के रूप में करोड़ों रूपयों का भुगतान करना पड़ा और सिंहस्थ नोडल अधिकारी एवं बीमा कंपनी ने जमकर कमीशनखोरी की।

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