Friday, 24 June 2016

एनएसजी (NSG) की बैठक खत्म, भारत की सदस्यता पर कोई निर्णय नहीं


एनएसजी(NSG) की बैठक खत्म, भारत की सदस्यता पर कोई निर्णय नहीं 

दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में दो-दिवसीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की बैठक शुक्रवार को भारत की सदस्यता पर कोई निर्णय लिये बिना ही समाप्त हो गयी जिससे इस 48 सदस्यीय परमाणु संघ में जाने के लिए भारत के प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा। भारत ने कहा कि उसके आवेदन पर शीघ्र निर्णय वैश्विक हित में होगा I एक प्रारंभिक सकारात्मक निर्णय भारत के लिए जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते पर आगे बढ़ने के लिए सहायक सिद्ध होगा I एनएसजी के अधिकांश सदस्य देशों ने भारत का समर्थन किया परन्तु मुख्य तौर पर चीन के विरोध के कारण भारत की राह कठिन हो गयी I एनएसजी में देर रात्रि तक भारत की सदस्यता पर चर्चा होती रही परन्तु चीन और कुछ सदस्य देशों के विरोध के कारण भारत की सदस्यता पर कोई सहमति नहीं बन पायी I विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य में शुक्रवार को कहा कि भारत का मानना है कि उसके आवेदन पर एक शीघ्र निर्णय वैश्विक हित में होगा और एनएसजी में भारत की भागीदारी परमाणु अप्रसार को मजबूत करने और वैश्विक परमाणु व्यापार को अधिक सुरक्षित बनाने में सहायक सिद्द होगी I वक्तव्य में कहा गया है कि यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए अग्रिम और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए कुछ अलग करने का प्रयास होगा I उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एनएसजी इन लाभों को पहचानते हुए इस मुद्दे पर आगे विचार करेगा Iविदेश मंत्रालय के अनुसार यह कहा गया है कि एनएसजी में सदस्यता के लिए परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है परन्तु भारत का मत एनपीटी पर सर्वविदित है विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा कि सितम्बर 2008 में एनएसजी ने स्वयं इस विषय पर टिप्पणी की थी I सितम्बर 28 के फैसले के पैराग्राफ 1 में कहा गया है कि भारत का निर्णय संधि के प्रावधानों और उद्देश्यों को परमाणु हथियारों के अप्रसार पर अधिकतम संभव कार्यान्वयन करने के लिए योगदान देता है । इस कारण एनपीटी और एनएसजी के साथ भारत के क़रीबी रिश्तों में विरोधाभास नहीं है विकास स्वरुप ने कहा कि भारत का मानना है कि अधिकांश देश इसपर एक शीघ्र निर्णय चाहते हैं। कुछ देशों ने भारत की एनएसजी में प्रवेश की प्रक्रिया पर सवाल उठाये थे I यह साफ है कि यदि यह देश भारत की सदस्य्ता के विरुद्ध होते तो प्रक्रिया का सवाल नहीं उठाते I यह उन देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय सम्बन्धों से साफ़ पता चलता है I प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने 12 मई को अपनी सदस्य्ता के लिए आवेदन दिया था जिससे एनएसजी के साथ भारत के संबंधों का पता चलता है I भारत ने इन संबंधों की शुरुआत 2014 में की थी I एनएसजी ने सितम्बर 2008 में भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग पर आम सहमति से निर्णय लिया था I उसके पश्चात एनएसजी के साथ विचार विमर्श होता रहा I इसलिए भारत के लिए यह कुछ नया नहीं है I बल्कि एनएसजी में यह विषय पर वर्ष 2011 के पश्चात से प्रत्येक बैठक में चर्चा हुई I
वर्ष 2030 तक 40 प्रतिशत गैर- जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता की परिकल्पना के सन्दर्भ में भारत के आवेदन पर शीघ्रता अनिवार्य है I एनएसजी द्वारा एक प्रारंभिक सकारात्मक निर्णय भारत को पेरिस समझौते पर आगे बढ़ने के लिए सहायक सिद्ध होता I

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