Wednesday, 22 June 2016

रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कपड़ा उद्योग को 6 हजार करोड़ का पैकेज

रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कपड़ा उद्योग को 6 हजार करोड़ का पैकेज

केन्द्र सरकार ने आज कपड़ा उद्योग में रोजगार सृजन और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए 6 हजार करोड़ रूपये के एक पैकेज को मंजूरी दी।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्तमंत्री अरूण जेटली ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार के इस निर्णय से अगले तीन साल के भीतर एक करोड़ लोगों को इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष से खासतौर से महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ 74,000 करोड़ रूपये के निवेश में वृद्धि होगी और 30 अरब डालर का निर्यात भी बढ़ेगा। वस्त्रों के निर्यात पर पांच प्रतिशत की अतिरिक्त डयूटी ड्राबैक प्रदान की जायेगी। इस पर 5,500 करोड़ रूपये व्यय होगा।जेटली ने बताया कि इस पैकेज से वैश्विक बाजार में लागत प्रतिस्पर्धा में सुधार के साथ भारतीय कपड़ा और सिले सिलाए वस्त्र क्षेत्र सुदृढ़ होगा। सिले सिलाए वस्त्र उद्योग में 70 प्रतिशत महिला कामगार होती हैं और इस पैकेज के जरिये महिलाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस क्षेत्र के नियोक्ताओं को एक बड़ी राहत दी है कि 15 हजार रूपये से कम कमाने वाले नये कामगारों के वास्ते पहले तीन साल तक कर्मचारी भविष्य निधि में 12 प्रतिशत नियोक्ताओं के योगदान को सरकार वहन करेगी। भविष्य निधि में नियोक्ता मौजूदा सरकारी प्रावधान के तहत 8.33 प्रतिशत का योगदान करते है जिसे प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत बढ़ा कर12 प्रतिशत कर दिया गया है। आज के निर्णय से कपड़ा मंत्रालय भविष्य निधि में नियोक्ताओं के योगदान में शेष 3.67 प्रतिशत की राशि देगा जो अगले तीन साल में 1,170 करोड़ रूपये होगी। 15000 रूपये से कम अर्जित करने वाले कामगार के वास्ते भविष्य निधि वैकल्पिक होगी। इस प्रकार से इस क्षेत्र के कामगार के हाथ में अधिक पैसा आयेगा।वित्तमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मानकों के अनुसार एक सप्ताह में कामगार आठ घंटे अधिक कार्य करके धन कमा सकता है। इसके अलावा सीजनल प्रकृति का उद्योग होने के नाते वस़्त्र क्षेत्र में निर्धारित अवधि का रोजगार के नियम को लागू किया जायेगा।उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर बढ़ाने के वास्ते संशोधित टुफ के तहत गारमेंट इकाईयों की सब्सिडी को 15 प्रतिशत से बढाकर 25 प्रतिशत किया जा रहा है।जेटली ने बताया कि भारत के सिले सिलाए वस्त्रों के निर्यात को पहले चीन से चुनौती मिल रही थी लेकिन चीन में अब मजदूरी मंहगी होने के कारण उसका रूझान प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ा है। अभी भारत के समक्ष बांग्लादेश और वियतनाम की चुनौती है।

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