26 सरकारी बैंकों के विलय से बनेंगे 6 बड़े बैंक
सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदलने का फैसला कर लिया है। सरकार 26 सरकारी बैंकों का विलय करके 6 बड़े बैंक बनाना चाहती है। इस दिशा में भारतीय स्टेट बैंक को और बड़ा करने की मंजूरी मिल चुकी है। बैंक कर्मचारी सरकार के विलय फॉर्मूले का विरोध कर रहे हैं।सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदलने की तैयारी कर ली है। नरेंद्र मोदी सरकार बैंकों की लंबी-चौड़ी लिस्ट को कम करना चाहती है। सरकार की योजना है कि 26 सरकारी बैंको को 6 छतरी के नीचे लाया जाए। जिसकी शुरुआत भारतीय स्टेट बैंक से हो रही है। सरकार ने SBI के साथ उसके पांच एसोसिएट्स बैंक और भारतीय महिला बैंक के विलय को मंजूरी दे दी है। लेकिन, माना जा रहा है कि आनेवाले दिनों में देश में सिर्फ 6 सरकारी बैंक रह जाएंगे- भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया।सरकार के इस फैसले से छोटे सरकारी बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी डरे हुए हैं। कर्मचारियों को लगता है कि सरकार के विलय फॉर्मूले से उनकी नौकरी खतरे में आ जाएगी। लेकिन, अर्थव्यवस्था की नब्ज टटोलनेवालों का मानना है कि इससे देश में बैंकिंग सर्विस और मजबूत होगी। हिंदुस्तान में बैंकों के विलय पहले भी हो चुका है। इससे किसी की नौकरी पर आंच नहीं आई। जानकारों का मानना है कि 26 सरकारी बैंकों के 6 बन जाने से हिंदुस्तान में बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदल जाएगी।सरकारी बैंकों के विलय का विरोध भी शुरु हो चुका है। बैंकों के कुछ यूनियन ने 12 और 13 जुलाई को हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। 12 जुलाई को एसबीआई एसोसिएट बैंक के 45,000 कर्मचारी एसबीआई के साथ विलय के विरोध में हड़ताल पर उतरने वाले हैं। तो दो यूनियनों के करीब 3.5 लाख बैंक कर्मचारी विलय के विरोध में 13 जुलाई को हड़ताल पर रहेंगे। आज की तारीख में देश के सरकारी बैंकों में करीब 10 लाख कर्मचारी काम करते हैं।
सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदलने का फैसला कर लिया है। सरकार 26 सरकारी बैंकों का विलय करके 6 बड़े बैंक बनाना चाहती है। इस दिशा में भारतीय स्टेट बैंक को और बड़ा करने की मंजूरी मिल चुकी है। बैंक कर्मचारी सरकार के विलय फॉर्मूले का विरोध कर रहे हैं।सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदलने की तैयारी कर ली है। नरेंद्र मोदी सरकार बैंकों की लंबी-चौड़ी लिस्ट को कम करना चाहती है। सरकार की योजना है कि 26 सरकारी बैंको को 6 छतरी के नीचे लाया जाए। जिसकी शुरुआत भारतीय स्टेट बैंक से हो रही है। सरकार ने SBI के साथ उसके पांच एसोसिएट्स बैंक और भारतीय महिला बैंक के विलय को मंजूरी दे दी है। लेकिन, माना जा रहा है कि आनेवाले दिनों में देश में सिर्फ 6 सरकारी बैंक रह जाएंगे- भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया।सरकार के इस फैसले से छोटे सरकारी बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी डरे हुए हैं। कर्मचारियों को लगता है कि सरकार के विलय फॉर्मूले से उनकी नौकरी खतरे में आ जाएगी। लेकिन, अर्थव्यवस्था की नब्ज टटोलनेवालों का मानना है कि इससे देश में बैंकिंग सर्विस और मजबूत होगी। हिंदुस्तान में बैंकों के विलय पहले भी हो चुका है। इससे किसी की नौकरी पर आंच नहीं आई। जानकारों का मानना है कि 26 सरकारी बैंकों के 6 बन जाने से हिंदुस्तान में बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदल जाएगी।सरकारी बैंकों के विलय का विरोध भी शुरु हो चुका है। बैंकों के कुछ यूनियन ने 12 और 13 जुलाई को हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। 12 जुलाई को एसबीआई एसोसिएट बैंक के 45,000 कर्मचारी एसबीआई के साथ विलय के विरोध में हड़ताल पर उतरने वाले हैं। तो दो यूनियनों के करीब 3.5 लाख बैंक कर्मचारी विलय के विरोध में 13 जुलाई को हड़ताल पर रहेंगे। आज की तारीख में देश के सरकारी बैंकों में करीब 10 लाख कर्मचारी काम करते हैं।

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