Saturday, 21 May 2016

(हेल्थ इंश्योरेंस) HEALTH INSURANCE लेते समय ये चेक करना ना भूलें, वर्ना बाद में होगी परेशानी

(हेल्थ इंश्योरेंस) HEALTH INSURANCE  लेते समय ये चेक करना ना भूलें, वर्ना बाद में होगी परेशानी

आजकल की भागदौड़-तनाव भरी जिंदगी में हेल्थ इंश्योरेंस लेना एक आम जरूरत बन चुकी है. बढ़ती महंगाई में किसी बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस ही काम आता है. आपका एकदम सटीक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान कैसा हो और उसे लेते समय किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, ये आपको इस खबर से पता चल जाएगा. तो पढ़ें और जानें कि हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए.जितनी ज्यादा उमर में आप हेल्थ इंश्योरेंस लेंगे उसका प्रीमियम उतना ही ज्यादा होगा, लिहाजा कम उम्र में कमाई शुरू होते ही हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ले लें जिससे आपको किसी भी बीमारी या जरूरत में बढ़े खर्च का सामना ना करना पड़े.प्री-एक्जिजटिंग डिजीज और नो क्लेम बोनस जैसी सुविधा कम उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर आसानी से मिल सकती है तो अपनी हेल्थ इंश्योरेंस की योजना को टालने की गलती ना करें.सिर्फ एंप्लॉयर द्वारा मिले हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर ना रहें. ये एक बहुत बड़ी गलती है जो हममें से ज्यादातर लोग करते हैं तो इस गलती से बचें. जब आप नौकरी बदल रहे होते हैं तो आप हेल्थ इंश्योरेंस से महरूम रहते हैं जो बहुत बड़ा खतरा होता है. यानी एंप्लॉयर के साथ अपनी खुद का पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लें. खासकर कर फैमिली फ्लोटर लेंगे तो आपके पूरे परिवार की स्वास्थ्य की सुरक्षा हो जाएगी.सस्ती प्रीमियम वाली पॉलिसी में बहुत से फायदे नहीं मिलते जैसे क्रिटिकल इलनेस होने पर कंपनियां क्लेम का पूरा खर्चा नहीं देती या कई तरह की बीमारियां ही कवर नहीं करती. सस्ते प्रीमियम के चक्कर में आप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले तो लेंगे लेकिन जरूरत पड़ने पर पता चले कि वो गंभीर या कुछ खास बीमारियों या सर्जरी आदि को कवर ही नहीं करती तो इसका फायदा क्या होगा. पॉलिसी लेने से पहले सारी शर्तें, टर्म्स एंड कंडीशन पढ़ लें क्योंकि अक्सर होता है कि एजेंट आकर दस्तावेज पर बस बता देता है कि अमुक जगह साइन कर दें और हम ऐसा ही कर देते हैं जो पूरी तरह गलत है. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले पूरे दस्तावेज पढ़ें जरूर. जैसे कि कैशलैस हॉस्पिटलाइजेशन आपकी पॉलिसी में कवर हो रहा है या नहीं. पॉलिसी में कैशलेस ट्रीटमेंट होगा या रीइंबर्समेंट होगा यानी पहले आपको खर्चा करना पड़ेगा और फिर बाद में आपको क्लेम मिलेगा.कई बार पॉलिसी में रूम रेंट, हॉस्पिटल चार्ज पॉलिसी की सम एश्योर्ड का 1 फीसदी तक ही होता है तो यानी 2 लाख रुपये तक की पॉलिसी पर आपको 1 दिन का 2000 रुपये से ज्यादा का रूम चार्ज नहीं मिल पाएगा. बाकी आपको खुद देना होगा. तो इस तरह की तकनीकी बातें जरूर जानें. कई पॉलिसी में को-पेमेंट कॉस्ट होती है यानी आपको इलाज का खर्च इंश्योरर के साथ शेयर करना होता है.

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