मध्यप्रदेश में रेलवे ट्रेक से जुड़ेंगे सैकड़ों गांव, होंगे वाई-फाई
नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए लगता है भारतीय रेलवे ने अपनी कमर कस ली है। इसी के तहत मध्यप्रदेश में भी जोर-शोर से काम शुरू हो गया है। जिस तेजी से इन दिनों भारतीय रेलवे की कम्युनिकेशन यूनिट रेलटेल और दूरसंचार विभाग सूबे में रेल लाइनों के बीच कस्बों व गांवों के रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई हॉटस्पॉट लगाने पर काम कर रहे हैं। उससे लगता है कि अगले साल के अंत तक कई गांवों में यह सुविधा सहज हो जाएगी। इससे मध्यप्रदेश के उन ग्रामीण इलाकों को फायदा होगा जो अभी तक दूरसंचार की आधारभूत सुविधाओं के दायरे में नहीं पहुंच सके हैं।रेलवे की माने तो देशभर के लिए 400 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। रेलटेल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर आरके बहुगुणा ने बताया, कि हमारी इस संदर्भ में दूरसंचार विभाग के साथ बातचीत चल रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत कम से कम 4,000 ग्रामीण रेलवे स्टेशनों को हाई स्पीड इंटरनेट जोन में बदला जाएगा जिससे लोगों तक इंटरनेट की सुविधा पहुंचेगी। अभी रेलवे ने यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन (यूएसओ) के जरिए फंड जुटाने के लिए दूरसंचार विभाग से मंजूरी मांगी है। यह फंड 2003 में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में किफायती कीमत पर कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी पहुंचाने के लिए बनाया गया था।रेलवे के इस अधिकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन के इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) बनाया जा सकता है। जिससे कि रेलवे स्टेशनों के 8 से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों को कवर किया जा सके और वहां आसानी से वाइ-फाई की सुविधा उपलब्ध हो जाए। जितनी जल्दी यह योजना पूरी होगी उतनी जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम अपने चरम को प्राप्त कर लेगा क्यों कि इसमें ग्रामीण इलाके काफी अहम हैं और रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई कनेक्टिविटी से ग्रामीण आबादी को रोजगार, बैंकिंग, एजुकेशन और हेल्थकेयर जैसी सर्विसेज मिल जाएगी। जिसका कि जिक्र शुक्रवार को भोपाल में केंद्र सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धी गिनाते हुए संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री चौधरी बीरेंन्द्र सिंह और भाजपा सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी की है।उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे का रेलटेल ऑप्टिक फाइबर केबल (ओफएफसी) नेटवर्क के जरिए देश की करीब 70 फीसद आबादी को जोड़ती है, जिसमें कि देश के बड़े कस्बों और ग्रामीण इलाकें शामिल हैं। वहीं रेलटेल के पास रेलवे ट्रैक के बराबर में 45,000 किलोमीटर तक ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क है। इसमें बड़े शहरों के 10,000 किलोमीटर का रूट भी शामिल है।
नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए लगता है भारतीय रेलवे ने अपनी कमर कस ली है। इसी के तहत मध्यप्रदेश में भी जोर-शोर से काम शुरू हो गया है। जिस तेजी से इन दिनों भारतीय रेलवे की कम्युनिकेशन यूनिट रेलटेल और दूरसंचार विभाग सूबे में रेल लाइनों के बीच कस्बों व गांवों के रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई हॉटस्पॉट लगाने पर काम कर रहे हैं। उससे लगता है कि अगले साल के अंत तक कई गांवों में यह सुविधा सहज हो जाएगी। इससे मध्यप्रदेश के उन ग्रामीण इलाकों को फायदा होगा जो अभी तक दूरसंचार की आधारभूत सुविधाओं के दायरे में नहीं पहुंच सके हैं।रेलवे की माने तो देशभर के लिए 400 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। रेलटेल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर आरके बहुगुणा ने बताया, कि हमारी इस संदर्भ में दूरसंचार विभाग के साथ बातचीत चल रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत कम से कम 4,000 ग्रामीण रेलवे स्टेशनों को हाई स्पीड इंटरनेट जोन में बदला जाएगा जिससे लोगों तक इंटरनेट की सुविधा पहुंचेगी। अभी रेलवे ने यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन (यूएसओ) के जरिए फंड जुटाने के लिए दूरसंचार विभाग से मंजूरी मांगी है। यह फंड 2003 में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में किफायती कीमत पर कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी पहुंचाने के लिए बनाया गया था।रेलवे के इस अधिकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन के इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) बनाया जा सकता है। जिससे कि रेलवे स्टेशनों के 8 से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों को कवर किया जा सके और वहां आसानी से वाइ-फाई की सुविधा उपलब्ध हो जाए। जितनी जल्दी यह योजना पूरी होगी उतनी जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम अपने चरम को प्राप्त कर लेगा क्यों कि इसमें ग्रामीण इलाके काफी अहम हैं और रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई कनेक्टिविटी से ग्रामीण आबादी को रोजगार, बैंकिंग, एजुकेशन और हेल्थकेयर जैसी सर्विसेज मिल जाएगी। जिसका कि जिक्र शुक्रवार को भोपाल में केंद्र सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धी गिनाते हुए संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री चौधरी बीरेंन्द्र सिंह और भाजपा सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी की है।उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे का रेलटेल ऑप्टिक फाइबर केबल (ओफएफसी) नेटवर्क के जरिए देश की करीब 70 फीसद आबादी को जोड़ती है, जिसमें कि देश के बड़े कस्बों और ग्रामीण इलाकें शामिल हैं। वहीं रेलटेल के पास रेलवे ट्रैक के बराबर में 45,000 किलोमीटर तक ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क है। इसमें बड़े शहरों के 10,000 किलोमीटर का रूट भी शामिल है।

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