देश को समाप्त करने का विदेशी षड्यंत्र रचा जा रहां हैं,शंकराचार्य
देश को समाप्त करने का विदेशी षड्यंत्र रचा जा रहां हैं शिक्षा ही नहीं हर क्षेत्र में हिंदुस्तान को विलुप्त करने के लिए विदेशी षड्यंत्र रच रहे हैं। केन्द्र और प्रांत की सरकारें इन षड्यंत्रों का हिस्सा बन रही हैं। हमारे सनातन सिद्धांत अकाट्य हैं। जिन्हें चुनौती देने का सामथ्र्य किसी में नहीं है। दिशाहीनता ही ऐसे लोगों को परास्त करेगी और हमारा देश अपने वैभव को प्राप्त करेगा । यह बात पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कही है । महाराज श्री यह बात ग्वालियर के जयेन्द्रगंज में केके मिशन में आयोजित कार्यक्रम लोगो के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान में जो शिक्षा पद्धति के साथ ही विधि, कृषि, वाणिज्य आदि क्षेत्र में जो नीतियां हैं वह हमारी सनातन संस्कृति के विपरीत हैं।ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सीमा में अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए। राजनीतिक दल समाज को कूपमंडूक बनाने का कार्य कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि हिंदू समाज इसमें अपनी सहभागिता निभाए । शंकराचार्य जी ने कहा, देश की आजादी के बाद संविधान बना, हमारा इस संविधान में पूर्ण विश्वास है, लेकिन अब यह संविधान हमारे मठ और मंदिरों तक पहुंच गया है, हमारी धार्मिक मर्यादाओं तक पहुंच गया है। यह एक धारणा बना दी है, सब में सभी का अधिकार है। उन्होंने कहा, सनातन धर्म में शिखर का दर्शन करने वाले को भी वही फल मिलता है जो पुजारी को मिलता है। जिस प्रकार न्याय के मंदिर में जज और वकील का स्थान नियत है, उसी प्रकार हमारी व्यवस्थाओं में भी सभी का स्थान नियत है।उन्होंने कहा राम नाम मंत्र का जाप कोई भी कर सकता है। हर व्यक्ति मंत्र से शक्ति ग्रहण कर सकता है, जबकि अन्य मंत्रों के साथ ऐसा नहीं है । जगदगुरू शंकराचार्य ने अखंड भारत, गौहत्या के संबंध में कहा कि परिवर्तन होकर रहेगा। इसके लिए जो भी परिस्थिति शासन प्रणाली से अपेक्षित है उसे हम लेकर रहेंगे। हम लोग कोई व्यर्थ की चेष्ठा नहीं करते, हमारा संकल्प व्यर्थ नहीं होता। हम संकेत ही कर सकते हैं। शासन तंत्र को घुटने टेकना ही पड़ेंगे। उन्होंने कहा, हमने पीएम नरेन्द्र मोदी को भी संकेत दे दिया है ।
देश को समाप्त करने का विदेशी षड्यंत्र रचा जा रहां हैं शिक्षा ही नहीं हर क्षेत्र में हिंदुस्तान को विलुप्त करने के लिए विदेशी षड्यंत्र रच रहे हैं। केन्द्र और प्रांत की सरकारें इन षड्यंत्रों का हिस्सा बन रही हैं। हमारे सनातन सिद्धांत अकाट्य हैं। जिन्हें चुनौती देने का सामथ्र्य किसी में नहीं है। दिशाहीनता ही ऐसे लोगों को परास्त करेगी और हमारा देश अपने वैभव को प्राप्त करेगा । यह बात पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कही है । महाराज श्री यह बात ग्वालियर के जयेन्द्रगंज में केके मिशन में आयोजित कार्यक्रम लोगो के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान में जो शिक्षा पद्धति के साथ ही विधि, कृषि, वाणिज्य आदि क्षेत्र में जो नीतियां हैं वह हमारी सनातन संस्कृति के विपरीत हैं।ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सीमा में अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए। राजनीतिक दल समाज को कूपमंडूक बनाने का कार्य कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि हिंदू समाज इसमें अपनी सहभागिता निभाए । शंकराचार्य जी ने कहा, देश की आजादी के बाद संविधान बना, हमारा इस संविधान में पूर्ण विश्वास है, लेकिन अब यह संविधान हमारे मठ और मंदिरों तक पहुंच गया है, हमारी धार्मिक मर्यादाओं तक पहुंच गया है। यह एक धारणा बना दी है, सब में सभी का अधिकार है। उन्होंने कहा, सनातन धर्म में शिखर का दर्शन करने वाले को भी वही फल मिलता है जो पुजारी को मिलता है। जिस प्रकार न्याय के मंदिर में जज और वकील का स्थान नियत है, उसी प्रकार हमारी व्यवस्थाओं में भी सभी का स्थान नियत है।उन्होंने कहा राम नाम मंत्र का जाप कोई भी कर सकता है। हर व्यक्ति मंत्र से शक्ति ग्रहण कर सकता है, जबकि अन्य मंत्रों के साथ ऐसा नहीं है । जगदगुरू शंकराचार्य ने अखंड भारत, गौहत्या के संबंध में कहा कि परिवर्तन होकर रहेगा। इसके लिए जो भी परिस्थिति शासन प्रणाली से अपेक्षित है उसे हम लेकर रहेंगे। हम लोग कोई व्यर्थ की चेष्ठा नहीं करते, हमारा संकल्प व्यर्थ नहीं होता। हम संकेत ही कर सकते हैं। शासन तंत्र को घुटने टेकना ही पड़ेंगे। उन्होंने कहा, हमने पीएम नरेन्द्र मोदी को भी संकेत दे दिया है ।

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