Wednesday, 16 March 2016

खुली विधायकों की कुंडली,शुरू हुआ विधायकों का सर्वे सूत्र!

खुली विधायकों की कुंडली,शुरू हुआ विधायकों का सर्वे सूत्र!

BJP ने शुरू कराया अपने विधायकों का सर्वे, संपत्ति,जीवन स्तर में वृद्धि के साथ परिवारिक रसूख और धंधों की भी पड़ताल,अपने विधायकों के आचरण से चितिंत भाजपा को अभी से चुनाव की चिंता सताने लगी है। उसने अपने सभी 157 विधायकों का सर्वे शुरू कराया है। दिल्ली की एक कंपनी द्वारा किए जा इस सर्वे के बाद विधायकों से मुख्यमंत्री वन टू वन बात करेंगे। कुछ विधायकों की संगठन को मिल रही लगातार शिकायतों के बाद सर्वे शुरू कराया गया हैतीसरी बार सत्ता में आने के बाद भाजपा विधायकों का लगभग ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। भाजपा अपने संभागीय संगठन मंत्रियों से हर तीन माह मेंं विधायकों के कामकाज की रिपोर्ट लेती है। सूत्रों की माने तो संगठन मंत्रियों की रिपोर्ट में अधिकांश विधायकों का आचरण ठीक न होना और जनता से बेहतर संवाद न होने की बात सामने आई है। यही वजह है कि प्रदेश संगठन ने विधायकों के ढाई साल के काम का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इस महीने से शुरू हुए इस सर्वे की रिपोर्ट अप्रैल माह में ही संगठन को मिल जाएगी पर इस पर संगठन नेता और सीएम विधायकों से सिंहस्थ के बाद वन टू वन चर्चा करेंगे। संगठन की माने तो सर्वे में पुअर परफार्मेन्स वाले विधायकों को एक साल का मौका काम सुधारने के लिए दिया जाएगा। यही सर्वे आगे जाकर उनके टिकट मिलने और कटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके अलावा भाजपा विधायकों के पार्टी के कामकाज में रुचि का अलग से सर्वे करा रही है।पार्टी संगठन अपने हिसाब से विधायकों के कामों का सर्वे कराता रहता है। यह अच्छी बात है। इस तरह के सर्वे में विधायकों के कामों को देखा जाता है। इससे उनके कामकाज में सुधारा भी आता है और विधायक को भी अपने काम के मूल्यांकन का पता चलता है।ढाई साल में सम्पत्ति में कितना इजाफा हुआ। खुद और परिवार के सदस्यों के जीवनस्तर में क्या बदलाव हुआ।विधायक बनने के बाद परिवार के किन सदस्यों ने सरकारी विभागों में ठेकेदारी और अन्य काम शुरू किए।जनता के बीच विधायक कितना रहते हैं और इस दौरान उनका व्यवहार कैसा है।विधायक निधि और सरकारी योजनाओं से क्षेत्र में कितने काम कराए और उनकी गुणवत्ता कैसी है।क्षेत्र के प्रबुद्ध वर्ग के बीच छवि कैसी है। ग्रामीणों के बीच और कार्यकर्ताओं के बीच छवि।संगठन ने पिछली बार दो बार अपने विधायकों के कामकाज का सर्वे कराया था। पहला सर्वे सरकार बनने के ठीक दो साल बाद हुआ था, इसके बाद चुनाव से एक साल पहले फिर सर्वे करवाया गया था। इसी सर्वे के आधार पर टिकट बांटे और कांटे गए थे। गौरतलब है कि पिछले पांच साल में तीन बार हुए सर्वे के बाद भाजपा ने अपने लगभग आधे विधायकों के टिकट साफ कर दिए थे।

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