लोक सभा से पारित हुआ आधार विधेयक
केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के लक्षित वितरण) विधेयक-2016 शुक्रवार को लोकसभा से पारित हो गया। विधेयक का उद्देश्य देश के लक्षित नागरिक समूहों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड के आधार पर उन्हें सरकारी सेवा एवं लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता देना हैं।लोकसभा से शुक्रवार को आधार बिल पारित होने के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां कहा कि केन्द्र सरकार की सब्सिडी देने वाली कई योजनाओं को आधार कार्ड के जरिए जोड़ा जा चुका है। आधार कार्ड के ज़रिए एलपीजी ग्राहकों को दी गई सब्सिडी से केंद्र को 15,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। बिल के उद्देश्य की बात करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि बिल के पारित होने के बाद यह निर्धारित की जाएगी कि सरकारी सब्सिडी लेने के दौरान लक्षित समूहों द्वारा आधार कार्ड पेश करना अनिवार्य बनाया जाए। इससे पूर्व बिल की प्रसांगिकता को लेकर विपक्षी पार्टियों ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लक्षित समूहों द्वारा सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड को कानूनी रुप से आवश्यक बनाना सही नहीं है, इससे उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारियों का उजागर होने का खतरा बन सकता हैं। विपक्षी पार्टियों को विश्वास दिलाते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि केन्द्र सरकार इस बात को हमेशा ध्यान में रखेगी कि आधार कार्ड धारकों की व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी अधिकृत आधिकारी इस आदेश को अनदेखा करता हैं तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगीकेंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि देश के 97 फीसदी वयस्कों के पास वर्तमान में आधार कार्ड हैं। विधेयक के पास होने से देश के नागरिकों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड देकर और उसके आधार पर उन्हें सेवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड उन सभी को दिया जाएगा, जो आधार आवेदन करने से पहले साल में 182 दिनों के लिए देश में रह चुके हैं।इससे पूर्व बिल को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता मलिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बिल को लेकर कोई विरोध नहीं कर रही हैं। पार्टी, केन्द्र सरकार को इसपर समर्थन करने को तैयार है, लेकिन यह विधेयक धन विधेयक के रुप में पेश नहीं किया जाए। इसपर जेटली ने संसद में कहा कि कांग्रेस पार्टी विधेयक को लेकर जो कुछ बोल रही हैं, वो पूरी तरह से विधेयक से अलग हैं।
केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के लक्षित वितरण) विधेयक-2016 शुक्रवार को लोकसभा से पारित हो गया। विधेयक का उद्देश्य देश के लक्षित नागरिक समूहों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड के आधार पर उन्हें सरकारी सेवा एवं लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता देना हैं।लोकसभा से शुक्रवार को आधार बिल पारित होने के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां कहा कि केन्द्र सरकार की सब्सिडी देने वाली कई योजनाओं को आधार कार्ड के जरिए जोड़ा जा चुका है। आधार कार्ड के ज़रिए एलपीजी ग्राहकों को दी गई सब्सिडी से केंद्र को 15,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। बिल के उद्देश्य की बात करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि बिल के पारित होने के बाद यह निर्धारित की जाएगी कि सरकारी सब्सिडी लेने के दौरान लक्षित समूहों द्वारा आधार कार्ड पेश करना अनिवार्य बनाया जाए। इससे पूर्व बिल की प्रसांगिकता को लेकर विपक्षी पार्टियों ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लक्षित समूहों द्वारा सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड को कानूनी रुप से आवश्यक बनाना सही नहीं है, इससे उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारियों का उजागर होने का खतरा बन सकता हैं। विपक्षी पार्टियों को विश्वास दिलाते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि केन्द्र सरकार इस बात को हमेशा ध्यान में रखेगी कि आधार कार्ड धारकों की व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी अधिकृत आधिकारी इस आदेश को अनदेखा करता हैं तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगीकेंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि देश के 97 फीसदी वयस्कों के पास वर्तमान में आधार कार्ड हैं। विधेयक के पास होने से देश के नागरिकों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड देकर और उसके आधार पर उन्हें सेवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड उन सभी को दिया जाएगा, जो आधार आवेदन करने से पहले साल में 182 दिनों के लिए देश में रह चुके हैं।इससे पूर्व बिल को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता मलिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बिल को लेकर कोई विरोध नहीं कर रही हैं। पार्टी, केन्द्र सरकार को इसपर समर्थन करने को तैयार है, लेकिन यह विधेयक धन विधेयक के रुप में पेश नहीं किया जाए। इसपर जेटली ने संसद में कहा कि कांग्रेस पार्टी विधेयक को लेकर जो कुछ बोल रही हैं, वो पूरी तरह से विधेयक से अलग हैं।

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