Wednesday, 27 January 2016

भारत ने लांच किया पांचवां नौवहन उपग्रह,अंतरिक्ष के क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबी!

भारत ने लांच किया पांचवां नौवहन उपग्रह,अंतरिक्ष के क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबी!
भारत ने आज अपने पांचवें दिशासूचक उपग्रह IRNSS-1E का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया. भारत ने अमेरिका आधारित जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) जैसी अपनी उपग्रह दिशासूचक प्रणाली से लैस देशों के समूह में शामिल होने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए यह प्रक्षेपण अपने विश्वसनीय ‘पीएसएलवी: C31 के माध्यम से किया.ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान ‘पीएसएलवी: C31’ ने अपने सफर का आगाज बिल्कुल सटीक तरह से करते हुए सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह नौ बजकर 31 मिनट पर उड़ान भरी और फिर 19 मिनट 20 सेकेंड के बाद इसने उपग्रह को कक्षा में प्रवेश करवा दिया. यह अंतरिक्ष केंद्र चेन्नई से लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस प्रक्षेपण के लिए इसरो टीम को बधाई दी है.उन्होंने कहा, ‘‘इसरो टीम को इस सफल प्रक्षेपण पर हार्दिक बधाई.’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों के ‘‘उत्साह और दृढ़ संकल्प’’ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश को गौरवांवित किया है.मोदी ने ट्विटर पर कहा, ‘‘पीएसएलवी सी31 के सफल प्रक्षेपण और आईआरएनएसएस-1ई को सटीकता के साथ कक्षा में स्थापित किए जाने के अवसर पर इसरो और हमारे वैज्ञानिकों को उनके उत्साह और दृढ़ संकल्प के लिए बधाई.’’ मोदी ने कहा, ‘‘इसरो के वैज्ञानिकों से बात की और उनकी आज की उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी. हमारे वैज्ञानिक हमें गौरवांवित महसूस करवाते रहते हैं.IRNSS-1E आईआरएनएसएस अंतरिक्ष प्रणाली का पांचवा दिशासूचक उपग्रह है. इस प्रणाली के तहत कुल सात उपग्रह हैं और इन सभी का प्रक्षेपण हो जाने के बाद यह प्रणाली अमेरिका आधारित जीपीएस के समकक्ष हो जाएगा. कुल 48 घंटे तक चली उल्टी गिनती के बाद जब रॉकेट एकदम साफ नीले आकाश में उड़ा तो पीएसएलवी के चारों चरणों को प्रोग्रामिंग के हिसाब से ही काम करते देख मिशन नियंत्रण केंद्र पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई.IRNSS-1E के दो सौर पैनल भूस्थतिक कक्षा में उपग्रह को भेजे जाने के बाद एक-एक करके स्वत: ही क्रियाशील हो जाएंगे.कर्नाटक के हासन स्थित ‘मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी’ कक्षा उत्थान अभियानों का नियंत्रण अपने हाथ में लेगी.आईआरएनएसएस प्रणाली का संचालन शुरू करने के लिए वैसे तो चार ही उपग्रह काफी होंगे लेकिन बाकी के तीन उपग्रह इसे ज्यादा ‘‘सटीक और दक्ष’’ बनाएंगे.इसरो टीम को बधाई देते हुए इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने कहा, ‘‘आज इस नए साल में हम भारतीय क्षेत्रीय दिशासूचक उपग्रह के पांचवे प्रक्षेपण के साथ शुरूआत कर रहे हैं. यह सात उपग्रहों के समूह में से पांचवा उपग्रह है. इस उपग्रह को प्रक्षेपित करके हमारे देश के भीतर हम प्रतिदिन 24 घंटे किसी की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी सटीक जानकारी हासिल कर सकेंगे.उन्होंने कहा, ‘‘हमें अभी लंबा सफर तय करना है. मैं अपने सभी सहकर्मियों को यह याद दिलाना चाहूंगा कि चूंकि हमने नए साल की शुरूआत सफलता के साथ की है, हमें अपने हाथ में लिए काम को पूर्ण समर्पण के साथ पूरा करना है.’’मिशन के निदेशक बी जयकुमार ने कहा, ‘‘इसरो ने नए साल की शुरूआत एक बड़ी जीत के साथ की है. आईआरएनएसएस-1ई को बेहद सटीक ढंग से तय कक्षा में प्रवेश करवा दिया गया है. हमने इस प्रक्षेपण के लिए, अपने साथ उपग्रह ले जा सकने वाले सबसे ताकतवर यान को लगाया. हमारे पास पीएसएलवी की तीन किस्में हैं. और इस प्रक्षेपण के साथ हमने पीएसएलवी द्वारा 33 प्रक्षेपण पूरे कर लिए हैं.’’IRNSS-1E का विन्यास इसके पूर्ववत्र्ती आईआरएनएसएस- 1A, 1बB, 1सC और 1D जैसा है और यह अपने साथ दो तरह के पेलोड नेविगेशन पेलोड और रेंजिंग पेलोड ले गया है.नेविगेशन पेलोड दिशासूचक सेवाओं से जुड़े सिग्नल प्रयोगकर्ताओं तक पहुंचाएगा जबकि अन्य उपग्रह की रेंज के सटीक निर्धारण में मदद करता है.IRNSS-1E के मिशन की अवधि 12 साल है.

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