साल के पहले दिन अन्ना ने किया मोदी पर वार, भुला दिए सारे वादे!
नए साल के पहले ही दिन प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। कहा, मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार और नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली मौजूदा राजग सरकार में कोई अंतर नहीं है। मोदी ने लोकसभा चुनाव के समय किए गए अपने वादे भुला दिए हैं।प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित अपने तीन पेज के बयान में अन्ना हजारे ने कहा, देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए लोकपाल और लोकायुक्त व्यवस्था को लागू किया जाना आवश्यक है। कृषि उपज का बेहतर मूल्य देकर किसानों की आत्महत्या की समस्या से निजात पाई जा सकती है। अन्ना ने कहा, चुनाव के समय मोदी ने वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाया जाएगा।लेकिन भ्रष्टाचार बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं हो रहा है। इस लिहाज से संप्रग और मौजूदा राजग सरकार में कोई अंतर नहीं है। यहां तक कि मंहगाई भी कम नहीं हुई है। वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ने याद दिलाया कि मोदी ने जब संसद के भीतर पहला कदम रखा था तब कहा था कि वह इसे मंदिर जैसा पवित्र बनाने का कार्य करेंगे। लेकिन संसद के सत्र आपसी झगड़े और बेवजह की बहस में बीतते जा रहे हैं। उसे चलाने में जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहे हैं।प्रधानमंत्री को संबोधित बयान में अन्ना ने विदेश में जमा काले धन की वापसी का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव के दौरान मोदी ने एक सौ दिन में काला धन वापस लाने और प्रत्येक भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रुपये डालने की बात कही थी। लेकिन उसके लिए अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है। 15 लाख तो छोड़ो, अभी तक भारतीयों के बैंक अकाउंट में 15 रुपये तक नहीं आए हैं। आप (मोदी के लिए) लोकायुक्त और लोकपाल की बात कभी नहीं करते हैं। अन्ना ने आशा जताई कि मोदी "मन की बात" के अपने अगले संबोधन में इन मुद्दों पर जरूर बोलेंगे।अन्ना ने पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि पीवी नरसिंह राव अक्सर फोन करके मुझसे विभिन्न मुद्दों पर बात करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी भी जब महाराष्ट्र के दौरे पर आए थे तो मेरे बारे में जानकारी की थी। यहां तक कि डॉ. मनमोहन सिंह, जिन्हें उन्होंने सबसे ज्यादा निशाना बनाया, अक्सर उनके (अन्ना के) लिखे पत्रों के उत्तर देते थे। लेकिन मोदी ने उनके लिखे एक भी पत्र का उत्तर नहीं दिया। ऐसा लगता है कि वे उन्हें कूड़ेदान में फेंक देते हैं।
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