हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले में स्थित प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर में आज शाम अखरोटों की बारिश की जाएगी। यह उत्सव यहां हर साल बैकुंठ चौदस पर्व के अवसर पर मनायी जाती है।
परम्परा के अनुसार, इस पर्व के मौके पर इस ऐतिहासिक मंदिर में 11,000 अखरोटों की बारिश की जाती है और यह पिछले कई सालों से बदस्तूर होती आ रही है। अखरोटों की यह बारिश संध्याकालीन आरती के बाद की जाती है, जिसे मंदिर में मौजूद भक्तगण प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
पहले होती थी यहां हीरे-जवाहरात की बारिश
पौराणिक कथा के अनुसार एकबार शंकासुर नामक एक राक्षस ने देवताओं पर जीत हासिल कर ली। लेकिन विजेता होने के बाद भी वह देवताओं की शक्ति से पार न पा सका। फिर उसे मालूम हुआ कि देवता पवित्र वेद-मंत्रों के कारण उस पर भारी पड़ रहे हैं, तब उसने वेद मंत्रों को छीनकर जल में प्रवाहित कर दिया। इस कारण देवताओं की शक्ति क्षीण होने लगी।
देवताओं को शक्तिहीन होने से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य का रूप धारण कर वेद मंत्रों को वापस लाकर देवताओं को सौंपा था। कहते हैं कि इस खुशी में पहले हीरे-जवाहरात की बारिश की जाती थी। उस परंपरा को निभाने के लिए ही वर्तमान में इस मंदिर में अखरोटों की बारिश की जाती है ।
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