Sunday, 29 November 2015

द. अफ्रीका का ही नहीं इन महारथियों के अश्वमेध को भी टीम इंडिया ने रोका!

टीम इंडिया ने फिर रोका एक टीम का अश्वमेध। ये पहला मौका नहीं है जब किसी विरोधी टीम का जीत का विजयरथ भारत ने रोका हों। दक्षिण अफ्रीका से पहले क्रिकेट की महाशक्तियां ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज भी अपने शिखर पर टीम इंडिया का शिकार हो चुकी हैं।अश्वमेध यज्ञ। महाभारत और रामायण के किस्सों में आपने ये नाम सुना ही होगा। कैसे शक्तिशाली राजा पूरी दुनिया में राज करने के लिए एक घोड़ा छोड़ देते थे और पूरी दुनिया में घूमकर अगर ये घोड़ा वापस आ जाता था तो वो विश्व विजेता बन जाता था। इस घोड़े को  रोकने का मतबल युद्ध को दावत देना।क्रिकेट में भी कई टीमों ने दुनिया में राज करने के इरादे से अपना विजयरथ आगे बढ़ाया और ऐसे ही मिशन पर दुनिया की नंबर 1 टीम दक्षिण अफ्रीका भी भारत आई। विदेशी जमीं पर पिछले 9 साल और 15 सीरीज से दक्षिण अफ्रीका को कोई नहीं हरा सका था। लेकिन टीम इंडिया ने नागपुर में ये विजयरथ रोक दिया।
खास बात ये है कि देश की राजधानी दिल्ली पहुंचने से पहले ही दक्षिण अफ्रीका का दम फूल गया और एक टेस्ट बारिश में धुलने के बावजूद आखिरी टेस्ट मैच से पहली ही टीम इंडिया ने सीरीज जीत ली। वैेस आमला दुनिया के पहले ऐसे कप्तान नहीं है जिनके अश्वमेध को भारत ने रोका हो।कुछ इसी तरह टीम इंडिया ने 2008 के पर्थ टेस्ट में भी नंबर-1 ऑस्ट्रेलिया का विजयरथ रोका था। इस टेस्ट से पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम लगातार 16 टेस्ट जीत चुकी थी, लेकिन अनिल कुंबले की सेना ऑस्ट्रेलया के अश्वमेध को थाम दिया और ऐतिहासिक जीत दर्ज की।ऑस्ट्रेलिया को अपने गढ़ पर्थ में 31 साल बाद जिस टीम से हार मिली वो टीम इंडिया ही थी। यही नहीं इस हार के साथ कंगारुओं का घर में 25 टेस्ट से अजेय रहने का रिकॉर्ड भी भारतीय टीम ने ही तोड़ा।खास बात ये है कि ऑस्ट्रेलिया का इससे पहले का विजयरथ भी टीम इंडिया ने ही रोका था। 2001 में कोलकाता टेस्ट में टीम इंडिया ने स्टीव वॉ की सेना को औंधे मुंह गिराकर इतिहास रचा।2008 की तरह 2001 में भी ऑस्टेलियाई टीम लगातार 16 टेस्ट जीत का रिकॉर्ड बना चुकी थी। लेकिन टीम इंडिया ने इस पर रोक लगा दी। टेस्ट ही नहीं वन-डे क्रिकेट में भी टीम इंडिया ने महारथियों के अश्वमेध को रोका है। टीम इंडिया ने सबसे बड़ा इतिहास तब रचा जब 1983 में वेस्टइंडीज का विजयरथ रोका।कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था कि दो बार की वर्ल्ड चैंपियन टीम का अश्वमेध भारत रोकेगा। लेकिन टीम इंडिया ने तीसरे वर्ल्ड कप में न सिर्फ वेस्टइंडीज का विजयरथ रोका बल्कि उन्हीं को हराकर वर्ल्ड चैंपियन भी बनीं।वेस्टइंडीज की टीम ने 1975 और 1979 वर्ल्ड में लगातार 9 मैच जीते, लेकिन 1983 वर्ल्ड कप के अपने पहले ही मैच में टीम इंडिया ने उसका विजयरथ रोक दिया और बाद में फाइनल में हराया। आलम ये है कि इसके बाद आने वाले 32 सालों में कैरिबियाई टीम दोबारा फाइनल में भी नहीं पहुंच पायी।यानी टीम इंडिया ने सिर्फ अपने देश में ही नहीं विदेशी जमीं पर भी दुनिया की ताकतवार टीमों की बादशाहत खत्म की और उनके अश्वमेध को रोककर अपना लोहा मनवाया।

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