बुरहानपुर में नवरात्रि पर्व के दिनों में असीरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित आशा देवी मंदिर में रोज एक शेर अपनी पूंछ से सफाई करने आता है.बुरहानपुर से करीब 25 किमी दूर असीरगढ़ के जंगलों में पहाड़ी पर स्थित आशा देवी का मंदिर हैं.बताया जाता है कि यह मंदिर आशा अहीर नाम के युवक ने बनवाया था, जो कि मुगल काल का मंदिर कहलाता हैं.इस मंदिर को लेकर किवदंती है कि मंदिर में शेर आता है और अपनी पूंछ से मंदिर में सफाई करके चला जाता है. कुछ लोगों का दावा है कि उन्होंने असीरगढ़ पहाड़ी पर शेर को देखा है.यह मंदिर असीरगढ़ रोड से करीब 5 किमी दूर जंगल में पहाडी पर स्थित हैं. यहां पहुचने वालों में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, और गुजरात के अधिकांश भक्त होते हैं. आशादेवी मंदिर पर नवरात्रि में भक्त अपनी विभिन्न मुरादें लेकर आते हैं. यहां आने वाले भक्त पेड़ पर कपडा बांधना नहीं भूलते.मान्यता है कि मंदिर परिसर में पेड़ से कपड़ा बांधने से मन्नतें पूरी होती हैं. साथ ही कहा जाता है कि यहां पत्थर के ऊपर पत्थर रखने से भक्तों के मकान बनाने का सपना पूरा होता है.
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