नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा को 2016 में संत की उपाधि दे दी जाएगी। संत बनने की जो प्रक्रिया है उसमें वह धन्य घोषित हो चुकी हैं। मदर को यह उपाधि अगले वर्ष चार सितंबर को उनकी मौत की 19वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर दी जा सकती है।जानकारी के मुताबिक, मदर टेरेसा की मृत्यु के बाद पेट के ट्यूमर से पीड़ित एक महिला की बीमारी उनके चमत्कार से ठीक हो जाने के कारण उन्हें संत की उपाधि से नवाजा जाएगा। बताया जाता है कि महिला का रोग लाइलाज था।तत्कालीन पोप फ्रांसिस ने वर्ष 2002 में ही महिला के इस कथन को सही ठहराया था कि मदर टेरेसा की मौत के एक साल बाद वह उनकी तस्वीर देखकर ठीक हो गई। इस महिला के पेट में गांठ यानी ट्यूमर था। इसके लिए पोप जॉन पॉल द्वितीय ने अक्टूबर 2003 में मदर को धन्य घोषित किया था।ईसाई धर्म में संत की उपाधि देने के लिए काफी लंबी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके तहत इस साल वेटिकन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल को गर्मियों के समय मदर टेरेसा के चमत्कार की जांच के लिए ब्राजील के साओ पाउलो भेजा गया था।मदर टेरेसा का जन्म मेसेडोनिया गणराज्य में हुआ था। 1948 में वह भारत आईं और यहीं की होकर रह गईं। उन्होंने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। पांच सितंबर, 1997 को उनका निधन हो गया।Friday, 20 November 2015
2016 में मदर टेरेसा को मिलेगी संत की उपाधि
नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा को 2016 में संत की उपाधि दे दी जाएगी। संत बनने की जो प्रक्रिया है उसमें वह धन्य घोषित हो चुकी हैं। मदर को यह उपाधि अगले वर्ष चार सितंबर को उनकी मौत की 19वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर दी जा सकती है।जानकारी के मुताबिक, मदर टेरेसा की मृत्यु के बाद पेट के ट्यूमर से पीड़ित एक महिला की बीमारी उनके चमत्कार से ठीक हो जाने के कारण उन्हें संत की उपाधि से नवाजा जाएगा। बताया जाता है कि महिला का रोग लाइलाज था।तत्कालीन पोप फ्रांसिस ने वर्ष 2002 में ही महिला के इस कथन को सही ठहराया था कि मदर टेरेसा की मौत के एक साल बाद वह उनकी तस्वीर देखकर ठीक हो गई। इस महिला के पेट में गांठ यानी ट्यूमर था। इसके लिए पोप जॉन पॉल द्वितीय ने अक्टूबर 2003 में मदर को धन्य घोषित किया था।ईसाई धर्म में संत की उपाधि देने के लिए काफी लंबी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके तहत इस साल वेटिकन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल को गर्मियों के समय मदर टेरेसा के चमत्कार की जांच के लिए ब्राजील के साओ पाउलो भेजा गया था।मदर टेरेसा का जन्म मेसेडोनिया गणराज्य में हुआ था। 1948 में वह भारत आईं और यहीं की होकर रह गईं। उन्होंने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। पांच सितंबर, 1997 को उनका निधन हो गया।
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