नहीं रहे बॉलीवुड के 'दयावान' विनोद खन्ना
1968 में सुनील दत्त की फिल्म 'मन का मीत' से फिल्मी करियर शुरू करने वाले विनोद खन्ना की फिल्म 'एक थी रानी ऐसी भी' इसी महीने रिलीज़ हुई है.
140 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय
1968 में सुनील दत्त की फिल्म 'मन का मीत' से फिल्मी करियर शुरू करने वाले विनोद खन्ना की फिल्म 'एक थी रानी ऐसी भी' इसी महीने रिलीज़ हुई है.
140 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय
करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने सहायक अभिनेता और खलनायक के किरदारों में काम किया था.
'मेरे अपने', 'दयावान', 'कुर्बानी', 'मेरा गांव मेरा देश', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लेकिन', 'हेराफेरी', 'अमर अकबर एंथनी', 'जुर्म', 'चांदनी', और 'क्षत्रिय' जैसी फिल्मों को उनकी यादगार भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है.
अपने करियर के शिखर दौर में विनोद खन्ना अचानक अभिनय को विदा कहकर आध्यात्मिक गुरु रजनीश के शिष्य हो गए थे.
इसके बाद उनकी वापसी 1987 में 'सत्यमेव जयते' से हुई.
गुरदासपुर से सांसद
1997 में विनोद खन्ना भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और पंजाब की गुरदासपुर सीट से चार बार लोकसभा सांसद रहे.
उन्होंने 1998, 1999, 2004 और 2014 का लोकसभा चुनाव जीता मगर 2009 का चुनाव वो हार गए थे.
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने पर्यटन और संस्कृति मंत्री के तौर पर काम किया. बाद में उन्हें विदेश राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी दी गई थी.
'मेरे अपने', 'दयावान', 'कुर्बानी', 'मेरा गांव मेरा देश', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लेकिन', 'हेराफेरी', 'अमर अकबर एंथनी', 'जुर्म', 'चांदनी', और 'क्षत्रिय' जैसी फिल्मों को उनकी यादगार भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है.
अपने करियर के शिखर दौर में विनोद खन्ना अचानक अभिनय को विदा कहकर आध्यात्मिक गुरु रजनीश के शिष्य हो गए थे.
इसके बाद उनकी वापसी 1987 में 'सत्यमेव जयते' से हुई.
गुरदासपुर से सांसद
1997 में विनोद खन्ना भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और पंजाब की गुरदासपुर सीट से चार बार लोकसभा सांसद रहे.
उन्होंने 1998, 1999, 2004 और 2014 का लोकसभा चुनाव जीता मगर 2009 का चुनाव वो हार गए थे.
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने पर्यटन और संस्कृति मंत्री के तौर पर काम किया. बाद में उन्हें विदेश राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी दी गई थी.

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