शनिवार को वेंबली एरीना में ब्रिटेन के 27 साल के एंथनी जोशुआ ने यूक्रेन के पूर्व वर्ल्ड चैंपियन 41 साल के व्लादिमिर क्लित्चको को हराकर वर्ल्ड बॉक्सिंग सुपर हैवीवेट खिताब अपने नाम कर लिया. जोशुआ ने आईबीएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद अब डब्ल्यूबीए बेल्ट भी अपने नाम की है.मुक़ाबला देखने के लिए नेशनल स्टेडियम में 90 हज़ार से ज़्यादा दर्शक मौजूद थे. लाखों लोग टीवी पर इस मुक़ाबले को देख रहे थे.
अब तक अजेय रहे जोशुआ ने शनिवार को अपना 19वां मुक़ाबला भी जीत लिया.
बॉक्सिंग रिंग के इस चैंपियन में वो सभी विशेषताएं हैं जो एक विजेता मुक्केबाज़ में होनी चाहिए, लेकिन उनकी ज़िंदगी का एक स्याह पहलू भी है.
जोशुआ की ज़िंदगी में खिताबों के अलावा एक कड़वा सच भी है. क़रीब 6 साल पहले जोशुआ को ड्रग डीलिंग के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
लेकिन जब जज को पता चला कि वो एक बॉक्सर हैं तो नरमी बरतते हुए उन्हें सज़ा के तौर पर कम्यूनिटी वर्क करने के लिए कहा गया. साथ ही जज ने वादा लिया कि वो दिए गए इस मौक़े को फ़ायदा उठाएंगे.
जोशुआ अपने वादे पर खरे उतरे. इसके कुछ वक़्त बाद ही 2012 में उन्होंने लंदन ओलंपिक में सुपर हैविवेट श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता.
साल 2016 में अपनी 16वीं फाइट में अमरीका के चार्ल्स मार्टिन को दूसरे राउंड में ही नॉक आउट करके दूसरी बार आईबीएफ़ हैवीवेट का ख़िताब अपने नाम कर लिया था.
अमूमन मुक्केबाज़ों की ज़िंदगी एशो-आराम, शाही ज़िंदगी औऱ महंगी कारों जैसी चीज़ों भरी होती है. लेकिन जोशुआ इनसे अलग हैं.
वो आज भी उत्तरी लंदन में अपनी मां के पास वाले एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते हैं. वो एक ऐसे विनम्र और आकर्षक मुक्केबाज़ हैं जो अपने प्रशंसकों के साथ फोटो खींचने के महत्व जानते हैं.
No comments:
Write comments