नमामि देवि नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा ने 101 वें दिन रायसेन जिले में
प्रवेश किया और आज 109 वें दिन नरसिंहपुर जिले के लिए विदा हो रही है। इन
नौ दिन की यात्रा से समाज में नव-चेतना का संचार हुआ जिससे माँ नर्मदा के
प्रति आस्था के साथ-साथ स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने का कर्त्तव्यबोध लोगों
में जागृत हुआ।
यात्रा के दौरान
रोजाना दोपहर एवं शाम को जन संवाद कार्यक्रमों ने नर्मदा सहित अन्य नदियों
एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ ही सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की लोगों
में अलख जगाई। यात्रा से समाजिक बदलाव के लिए भी सकारात्मक वातावरण निर्मित
हुआ है। जन संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के
पर्यावरणविद, सभी धर्म के गुरूओं, समाज सेवियों, प्रसिद्ध कलाकारों एवं
राजनेताओं के विचारों से लोग उद्वेलित हुए हैं। एक तरह से सामाजिक बदलाव की
दिशा में नर्मदा सेवा यात्रा एक जन-आन्दोलन का रूप ले चुकी है।
11 दिसम्बर 2016 को अमरकंटक से प्रारंभ नर्मदा सेवा यात्रा अब केवल नर्मदा नदी एवं पर्यावरण संरक्षण तक ही सीमित न होकर बहुउद्देश्यीय हो गई है। यात्रा के माध्यम से नशामुक्ति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता, संस्कृति एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रति लोगों में सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत हुई है। स्व-प्रेरणा से असंख्य लोगों का नर्मदा सेवा यात्रा से जुड़ना इस अभियान की सफलता का द्योतक है।
नर्मदा की पवित्रता और अविरलता को बनाए रखने के धर्मगुरूओं द्वारा देश, काल एवं परिस्थितियों के अनुसार पूजा पद्धति में परिवर्तन करने के संदेश का व्यापक असर हो रहा है। यात्रा के दौरान नर्मदा तट के अनेक घाट पर कई लोगों द्वारा पूजन के पश्चात् अपशिष्ट, पूजन-सामग्री को वापस ले जाने के दृश्य दिखाई देने लगे हैं। नर्मदा तट के किसानों द्वारा पौधे लगाने का संकल्प लेने, नर्मदा में अपशिष्ट नहीं डालने तथा गाँव में शौचालय बनाकर नियमित उपयोग करने के लिए प्रेरित होना यात्रा की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
यात्रा के दौरान
रोजाना दोपहर एवं शाम को जन संवाद कार्यक्रमों ने नर्मदा सहित अन्य नदियों
एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ ही सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की लोगों
में अलख जगाई। यात्रा से समाजिक बदलाव के लिए भी सकारात्मक वातावरण निर्मित
हुआ है। जन संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के
पर्यावरणविद, सभी धर्म के गुरूओं, समाज सेवियों, प्रसिद्ध कलाकारों एवं
राजनेताओं के विचारों से लोग उद्वेलित हुए हैं। एक तरह से सामाजिक बदलाव की
दिशा में नर्मदा सेवा यात्रा एक जन-आन्दोलन का रूप ले चुकी है।11 दिसम्बर 2016 को अमरकंटक से प्रारंभ नर्मदा सेवा यात्रा अब केवल नर्मदा नदी एवं पर्यावरण संरक्षण तक ही सीमित न होकर बहुउद्देश्यीय हो गई है। यात्रा के माध्यम से नशामुक्ति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता, संस्कृति एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रति लोगों में सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत हुई है। स्व-प्रेरणा से असंख्य लोगों का नर्मदा सेवा यात्रा से जुड़ना इस अभियान की सफलता का द्योतक है।
नर्मदा की पवित्रता और अविरलता को बनाए रखने के धर्मगुरूओं द्वारा देश, काल एवं परिस्थितियों के अनुसार पूजा पद्धति में परिवर्तन करने के संदेश का व्यापक असर हो रहा है। यात्रा के दौरान नर्मदा तट के अनेक घाट पर कई लोगों द्वारा पूजन के पश्चात् अपशिष्ट, पूजन-सामग्री को वापस ले जाने के दृश्य दिखाई देने लगे हैं। नर्मदा तट के किसानों द्वारा पौधे लगाने का संकल्प लेने, नर्मदा में अपशिष्ट नहीं डालने तथा गाँव में शौचालय बनाकर नियमित उपयोग करने के लिए प्रेरित होना यात्रा की सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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