रचनाकारों के लिए शानदार ‘प्लेटफॉर्म’ बना फेसबुक
रचनाओं के लिए समय निकालना नहीं पड़ता, वो तो बरबस फूट पड़ती हैं और लेखक/कवि उसे अपने मन से कागज पर उकेर देता है. ये रचनाएं बेहतरीन होती हैं लेकिन कुछ वर्षों पहले तक ऐसी रचनाएं लोगों के सामने नहीं आ पाती थीं, क्योंकि हर रचनाकार की रचना को किसी साहित्यिक पत्रिका में जगह मिले, ऐसा संभव नहीं हो पाता था, लेकिन जब से मार्क जुकरबर्ग ने लोगों के हाथ में फेसबुक जैसा हथियार थमाया है, ऐसी रचनाएं रचनाकार के मन से फूटते ही फेसबुक के जरिये पाठकों तक पहुंच जाती है. आज फेसबुक रचनाकारों के लिए एक शानदार मंच बन गया है. जिसके जरिये लोग अपनी बातें हजारों लोगों तक पहुंचा रहे हैं और साहित्य जगत में अपनी पैठ बना रहे हैं. वैसी महिलाएं जो गृहस्थी में रमकर अपनी लेखनक्षमता को भुला बैठती थीं, वैसी महिलाओं के लिए तो फेसबुक अचूक हथियार बन गया है. आइए जानें कुछ वैसे रचनाकारों की राय जिन्होंने फेसबुक को एक मंच के रूप में अपनाया और अपनी बातों को लोगों तक पहुंचाया.
रचनाओं के लिए समय निकालना नहीं पड़ता, वो तो बरबस फूट पड़ती हैं और लेखक/कवि उसे अपने मन से कागज पर उकेर देता है. ये रचनाएं बेहतरीन होती हैं लेकिन कुछ वर्षों पहले तक ऐसी रचनाएं लोगों के सामने नहीं आ पाती थीं, क्योंकि हर रचनाकार की रचना को किसी साहित्यिक पत्रिका में जगह मिले, ऐसा संभव नहीं हो पाता था, लेकिन जब से मार्क जुकरबर्ग ने लोगों के हाथ में फेसबुक जैसा हथियार थमाया है, ऐसी रचनाएं रचनाकार के मन से फूटते ही फेसबुक के जरिये पाठकों तक पहुंच जाती है. आज फेसबुक रचनाकारों के लिए एक शानदार मंच बन गया है. जिसके जरिये लोग अपनी बातें हजारों लोगों तक पहुंचा रहे हैं और साहित्य जगत में अपनी पैठ बना रहे हैं. वैसी महिलाएं जो गृहस्थी में रमकर अपनी लेखनक्षमता को भुला बैठती थीं, वैसी महिलाओं के लिए तो फेसबुक अचूक हथियार बन गया है. आइए जानें कुछ वैसे रचनाकारों की राय जिन्होंने फेसबुक को एक मंच के रूप में अपनाया और अपनी बातों को लोगों तक पहुंचाया.

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