प्रदेश में सरप्लस बिजली होने के बाद भी की जा रही है कटौती: रवि सक्सेना
भोपाल, 17 अप्रैल। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता श्री रवि सक्सेना ने कहा है कि प्रदेश में सरप्लस बिजली होने के बावजूद भी विद्युत उपभोक्ताओं को चौबीस घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही हैं। जहां शासन की अटल ज्योति योजना के तहत शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं को विद्युत कंपनियों द्वारा 24 घंटे बिजली प्रदाय किये जाने के दावे किये जा रहे हैं, वहीं केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ें विद्युत कंपनियों के दावों की पोल खोल रहे हैं, केंद्रीय मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हर महीने ओसतन दस घंटे बिजली की कटौती की जा रही है।
श्री सक्सेना ने कहा कि जहां प्रदेश में सरप्लस बिजली की बात कहीं जा रही है, वहीं प्रदेश में आज भी 50 प्रतिशत से ज्यादा विद्युत लाईने और उपकरण जर्जर हालात में हैं, विद्युत कंपनी भी इसे बदलने के अपेक्षा सुधार कर काम चला रही है। न तो उपकरणांे की क्षमता बढ़ाई जा रही है और न ही सुधार कार्य समय पर होता है। श्री सक्सेना ने कहा कि बिजली कटौती को लेकर देश में मध्यप्रदेश का 10 वां स्थान है, जहां हर महीने औसतन 15 बार बिजली गुल हो रही है। श्री सक्सेना ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में स्थिति बहुत ही भयावह है।
श्री सक्सेना ने कहा कि जहां एक और विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी कर उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल रही है, वहीं महंगाई की मार से जूझ रही जनता को इस भीषण और विषम परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार और विद्युत नियामक आयोग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
भोपाल, 17 अप्रैल। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता श्री रवि सक्सेना ने कहा है कि प्रदेश में सरप्लस बिजली होने के बावजूद भी विद्युत उपभोक्ताओं को चौबीस घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही हैं। जहां शासन की अटल ज्योति योजना के तहत शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं को विद्युत कंपनियों द्वारा 24 घंटे बिजली प्रदाय किये जाने के दावे किये जा रहे हैं, वहीं केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ें विद्युत कंपनियों के दावों की पोल खोल रहे हैं, केंद्रीय मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हर महीने ओसतन दस घंटे बिजली की कटौती की जा रही है।
श्री सक्सेना ने कहा कि जहां प्रदेश में सरप्लस बिजली की बात कहीं जा रही है, वहीं प्रदेश में आज भी 50 प्रतिशत से ज्यादा विद्युत लाईने और उपकरण जर्जर हालात में हैं, विद्युत कंपनी भी इसे बदलने के अपेक्षा सुधार कर काम चला रही है। न तो उपकरणांे की क्षमता बढ़ाई जा रही है और न ही सुधार कार्य समय पर होता है। श्री सक्सेना ने कहा कि बिजली कटौती को लेकर देश में मध्यप्रदेश का 10 वां स्थान है, जहां हर महीने औसतन 15 बार बिजली गुल हो रही है। श्री सक्सेना ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में स्थिति बहुत ही भयावह है।
श्री सक्सेना ने कहा कि जहां एक और विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी कर उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल रही है, वहीं महंगाई की मार से जूझ रही जनता को इस भीषण और विषम परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार और विद्युत नियामक आयोग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

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