बालिकाओं को आरक्षक भर्ती तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जिला
स्तर पर आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जायेगा। इससे वे अधिक से अधिक
संख्या में चयनित होकर अन्य बालिकाओं के लिए रोल मॉडल बन सकें। यह जानकारी
मुख्य सचिव श्री बसंत प्रताप सिंह की अध्यक्षता में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ'
योजना की समीक्षा में दी गई। बताया गया कि इस प्रयास से बड़ी कक्षाओं में
बालिकाओं के शाला छोड़ने की दर को कम किया जा सकेगा।
'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना
प्रदेश के कम लिंगानुपात वाले 6 जिलों क्रमश: भिंड , मुरैना, ग्वालियर,
दतिया, रीवा और टीकमगढ़ में लागू है। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव श्री सिंह
ने कहा कि महिला ग्राम सभाओं का नियमित आयोजन तथा उसमें अधिकाधिक सहभागिता
सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।
'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना
प्रदेश के कम लिंगानुपात वाले 6 जिलों क्रमश: भिंड , मुरैना, ग्वालियर,
दतिया, रीवा और टीकमगढ़ में लागू है। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव श्री सिंह
ने कहा कि महिला ग्राम सभाओं का नियमित आयोजन तथा उसमें अधिकाधिक सहभागिता
सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।
बैठक में शक्ति चौपाल, हर घर दस्तक जैसे जागरूकता कार्यक्रमों की समीक्षा
के साथ पीसीपीएनडीटी एक्ट, गर्भवती महिलाओं को दी जा रही सुविधाओं,
बालिकाओं में कुपोषण एवं एनीमिया की स्थिति में सुधार के लिए किये जा रहे
प्रयासों, शालाओं में नामांकन तथा बालिका छात्रावासों की स्थिति की भी
समीक्षा की गयी।
बैठक में प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्री जे.एन. कंसोटिया, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय श्रीमती नीलम शमी राव, आयुक्त महिला सशक्तिकरण श्रीमती जयश्री कियावत तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्री जे.एन. कंसोटिया, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय श्रीमती नीलम शमी राव, आयुक्त महिला सशक्तिकरण श्रीमती जयश्री कियावत तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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