अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रवर्तक,
सनातन धर्म के पुनरूद्धारक और सांस्कृतिक एकता के देवदूत आदि शंकराचार्य
का प्रकटोत्सव आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक गरिमा के साथ वैशाख शुक्ल
पंचमी-षष्ठी, एक
मई पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। यह पहला अवसर है जब भारत में महान
प्रज्ञा पुरूष आदि शंकराचार्य के अप्रतिम अवदान को समग्रता में याद करने और
उसे लोकव्यापी बनाने का सांस्कृतिक अभियान साकार हो सका है। भोपाल में
भारत की महान संत परम्परा के अनुयायी और मनीषियों के सान्निध्य में आदि
शंकराचार्य पावन स्मरण का मुख्य समारोह आयोजित किया जा रहा है।
इसी के साथ प्रदेश के सभी 51 जिलों
में आदि शंकराचार्य के महान अवदान पर केंद्रित गतिविधियों का सिलसिला भी
शुरू होगा। संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन के संयोजन में यह अनुष्ठान
परिकल्पित किया गया है।
सोमवार को सुबह 11
बजे भोपाल में विधानसभा के मानसरोवर सभागार में जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी
जयेन्द्र सरस्वती, कांची कामकोटि पीठ की वरद उपस्थिति में विमर्श होगा।
समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री शिवाराज सिंह चौहान करेंगे। 'आदि
शंकराचार्य के दर्शन और सांस्कृतिक एकता' पर केंद्रित व्याख्यान में स्वामी
परमानंद गिरि, हरिद्वार, स्वामी गोविन्द देव गिरि, पुणे, स्वामी
सुबोधानंद, सिद्धबाड़ी और विट्ठल सी. नाडकर्णी, दिल्ली का सारस्वत उदबोधन
होगा। विषय प्रवर्तन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। विधानसभा
अध्यक्ष श्री सीतासरन शर्मा, श्री रामलाल राष्ट्रीय संगठन मंत्री भाजपा,
श्री राम माधव राष्ट्रीय महासचिव भाजपा और श्री विनय सहस्रबुद्धे राष्ट्रीय
उपाध्यक्ष भाजपा विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। समारोह की शुरुआत ध्रुपद गायक
अभिजीत सुखदाणे और साथियों द्वारा आदि शंकराचार्य रचित स्रोतों के गायन से
होगी। कला समीक्षक श्री विनय उपाध्याय सूत्र-संचालन करेंगे।
शाम
को रवीन्द्र भवन में आदि शंकराचार्य के संस्कृत काव्य पदों पर आधारित
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लब्ध-प्रतिष्ठित पद्मभूषण पंडित राजन-साजन
मिश्र और प्रख्यात नृत्यांगना सुजाता महापात्र ने अपने कला समूह के साथ
आदि शंकराचार्य प्रकटोत्सव को देखते हुए अपनी प्रस्तुतियाँ संयोजित की हैं।
मध्यप्रदेश के संदर्भ में यह विशेष उल्लेखनीय है कि दक्षिण भारत में जन्में आदि शंकराचार्य की शिक्षा-दीक्षा
ओंकारेश्वर में हुई थी। देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए उन्होंने चार
वेदों के आधार पर चार पीठों की स्थापना की थी। वे एक ऐसे राष्ट्र नायक के
रूप में पूज्य हैं जिन्होंने प्राचीन भारत के मर्म को छुआ और वेदांत दर्शन
का प्रतिपादन किया।

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