मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज पूज्य मोरारी बापू वाचित श्री
रामकथा महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने 'मानस में विष्णु पर केंद्रित
आत्मिक-तात्विक चिंतन' का श्रवण किया।
पूज्य मोरारी बापू ने कहा कि भोपाल से प्रस्थान से पहले वे 11 पौधों का रोपण करेंगे। उन्होंने श्रोताओं का आव्हान किया कि रामनवमी पौध-रोपण कर मनायें। रामनवमी के दिन एक पौधे का रोपण अवश्य करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद 'सर्वजन-हिताय सर्वजन-सुखाय' सूत्र को विस्तारित किया है। उसे सर्वभूत-हिताय, सर्वभूत-सुखाय, सर्वभूत-प्रियाय: कर दिया है। प्रकृति में केवल जन ही नहीं, धरती, नदी, आकाश आदि भी है। सबके हित, सुख की कामना की जानी चाहिए। उनसे प्रेम करना चाहिए।
पूज्य मोरारी बापू ने कहा कि भोपाल से प्रस्थान से पहले वे 11 पौधों का रोपण करेंगे। उन्होंने श्रोताओं का आव्हान किया कि रामनवमी पौध-रोपण कर मनायें। रामनवमी के दिन एक पौधे का रोपण अवश्य करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद 'सर्वजन-हिताय सर्वजन-सुखाय' सूत्र को विस्तारित किया है। उसे सर्वभूत-हिताय, सर्वभूत-सुखाय, सर्वभूत-प्रियाय: कर दिया है। प्रकृति में केवल जन ही नहीं, धरती, नदी, आकाश आदि भी है। सबके हित, सुख की कामना की जानी चाहिए। उनसे प्रेम करना चाहिए।
पूज्य
मोरारी बापू ने कहा कि नदी का भी व्यक्त्वि है। हमें उसके सुख और हित की
चिंता करने के साथ ही उससे प्रेम भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नर्मदा
नदी से भी प्रेम करें। ऐसा पूजा-पाठ और कार्य नहीं करे जिससे नदी प्रदूषित
हो। उन्होंने अपील की है कि नर्मदा में शव प्रवाहित नहीं करें। देश और
प्रांत को हरा-भरा बनाने में प्रत्येक व्यक्ति योगदान करें। उन्होंने बताया
कि प्रदेश में नर्मदा तट पर आगामी 2 जुलाई को करोड़ों पौधों का रोपण हो रहा
है। मध्यप्रदेश और भोपाल हिन्दुस्तान का हृदय है। इसे अधिक से अधिक
हरा-भरा बनाया जाये।
रामकथा महोत्सव में पूज्य मोरारी बापू ने 'मानस में विष्णु पर केन्द्रित आत्मिक-तात्विक चिंतन' के दौरान गुरू को ही दशावतार बताया। उन्होंने कहा कि गुरू व्यक्ति नहीं, अस्तित्व है। इसीलिये वह सहानुभूति नहीं, समानभूति वाला बुद्ध पुरुष होता है।
रामकथा महोत्सव में पूज्य मोरारी बापू ने 'मानस में विष्णु पर केन्द्रित आत्मिक-तात्विक चिंतन' के दौरान गुरू को ही दशावतार बताया। उन्होंने कहा कि गुरू व्यक्ति नहीं, अस्तित्व है। इसीलिये वह सहानुभूति नहीं, समानभूति वाला बुद्ध पुरुष होता है।

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