कौशल विकास के साथ ही गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाये। गुणवत्ता ऐसी हो
कि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को तत्काल रोजगार मिले। तकनीकी शिक्षा और
कौशल विकास (स्वतंत्र प्रभार), स्कूल शिक्षा एवं श्रम राज्य मंत्री श्री
दीपक जोशी ने यह बात 'राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (एनएसक्यूएफ)'
कार्यशाला में कही।
श्री जोशी ने
कहा कि आईटीआई के प्राचार्यों से गुणवत्ता बढ़ाने के संबंध में सुझाव लिये
जाये। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्य-शालाएँ भविष्य में भी होती रहना
चाहिये।
संचालक कौशल विकास श्री संजीव सिंह ने बताया कि एनएसक्यूएफ
एक राष्ट्रीय ढाँचा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा और प्रशिक्षण के सामान्य और
व्यावसायिक स्तर को एकीकृत करना है। ढाँचा 10 स्तर पर योग्यता का निर्धारण
करता है। स्तर-1 सबसे बुनियादी और स्तर-10 सबसे उन्नत है। एनएसक्यूएफ के
क्रियान्वयन के बाद व्यावसायिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा,
तकनीकी शिक्षा और नौकरी बाजारों के बीच एकीकरण होगा। अंतर्राष्ट्रीय-स्तर
पर कौशल प्रवीणता को पहचान मिलेगी।
कार्यशाला में स्कूल शिक्षा, ग्रामीण आजीविका मिशन और आदिम-जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
संचालक कौशल विकास श्री संजीव सिंह ने बताया कि एनएसक्यूएफ
एक राष्ट्रीय ढाँचा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा और प्रशिक्षण के सामान्य और
व्यावसायिक स्तर को एकीकृत करना है। ढाँचा 10 स्तर पर योग्यता का निर्धारण
करता है। स्तर-1 सबसे बुनियादी और स्तर-10 सबसे उन्नत है। एनएसक्यूएफ के
क्रियान्वयन के बाद व्यावसायिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा,
तकनीकी शिक्षा और नौकरी बाजारों के बीच एकीकरण होगा। अंतर्राष्ट्रीय-स्तर
पर कौशल प्रवीणता को पहचान मिलेगी।कार्यशाला में स्कूल शिक्षा, ग्रामीण आजीविका मिशन और आदिम-जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
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