Saturday, 18 February 2017

विकास संभव और चिरस्थाई नहीं जब तक वह मानव कल्याण के लिए न हो : सुमित्रा महाजन

विकास संभव और चिरस्थाई नहीं जब तक वह मानव कल्याण के लिए न हो : सुमित्रा महाजन

लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा है कि विकास तब तक संभव और चिरस्थायी नहीं हो सकता जब तक यह मानव-कल्याण के लिए न हो । इस संबंध में उन्होंने पंडित दीन दयाल उपाध्याय की कही बात को उद्धृत किया कि 'एकात्म मानववाद ही विकास का आधार है क्योंकि इसमें ऐसे स्वदेशी आर्थिक तंत्र का समर्थन किया गया है जिसमें मानव-कल्याण को केंद्र में रखा गया है। 'महाजन शनिवार को इंदौर में होटल रैडिसन ब्लू में दक्षिण एशियाई देशों के अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन का उद्घाटन कर रही थी। महाजन ने कहा कि हमारी संस्कृति की कीमत पर होने वाला विकास चिरस्थायी नहीं होगा। इतिहास इस बात का गवाह है कि अपनी सभ्यता की ताकत के बल पर हमने कैसे आधुनिक चुनौतियों का भी डटकर सामना किया है। महाजन ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों से मानव-जाति के विकास के लिए विश्वव्यापी प्राथमिकताएँ निर्धारित हुई हैं। इनका उद्देश्य आर्थिक, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के तीन महत्वपूर्ण पहलु के बीच संतुलन बनाना है। इन लक्ष्यों के पीछे छिपी हितकारी सोच की सराहना करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देशवासियों को हर हाल में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ती खाई को पाटने के लिए समावेशी और व्यापक आधार वाले आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। श्रीमती महाजन ने कहा कि दक्षिण एशिया के देशों का न केवल सांझा इतिहास और साथ जुड़ा हुआ भौगौलिक क्षेत्र है, बल्कि हमारी नियति भी सांझी है। उन्होंने जोर दिया कि इन क्षेत्रों को अपने देशवासियों की खुशहाली और शान्ति के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने उन अनुमानों का उल्लेख किया जिनके अनुसार पूरे संसार में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रति वर्ष अनुमानित व्यय लगभग 5 से 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। इनमें से विकासशील देशों को प्रति वर्ष लगभग 3.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होती है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत की सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अगले 15 सालों में प्रति वर्ष लगभग 565 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजना है। महाजन ने कहा कि भारत एक महत्वाकांक्षी, व्यापक और समतावादी विकास का अजेंडा तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि लोगों और उनकी सरकार के बीच संपर्क सूत्र होने के नाते सांसद इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने पीढ़ियों के बीच इक्विटी; देशों के बीच विकास संबंधी असमानता; विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी दिए जाने की आवश्यकता; पर्यावरणीय सरोकारों को ध्यान में रखते हुए अधिक समतावादी विकास करने से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने का आग्रह किया। महाजन ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इंदौर सम्मेलन में सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन के लिए संसाधन, महिला-पुरुष समानता, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन के विषय पर चर्चा करने का प्रयास किया जा रहा है। महाजन ने देवी अहिल्याबाई होलकर का स्मरण करते हुए कहा कि वह लोगों के दिलों पर राज करती थी। उनके महान प्रशासनिक गुणों और बिना किसी भय और पक्षपात के न्याय करने के लिए आज भी उनकी पूजा की जाती है। महाजन ने कहा कि उनके लिए बहुत गर्व की बात है कि वह पिछले 28 सालों से उस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं जिस पर ऐसी सुप्रसिद्ध महिला ने शासन किया था।

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