इसरो ने रचा इतिहास, रिकॉर्ड 104 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन लॉन्चिंग सेंटर से पीएसएलवी-सी37 ने सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर उड़ान भरी। इसरो ने प्रक्षेपण के 34 मिनट बाद 10 बजकर दो मिनट पर सफल लॉन्चिंग का ऐलान किया। इसरो के सफल प्रक्षेपण पर पीएम मोदी ने भी इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "पीएसएलवी- सी37 और कार्टोसैट सैटेलाइट के एक साथ 103 नैनो सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के साथ ही देश के लिए गर्व का क्षण है। भारत अपने वैज्ञानिकों को सलाम करता है।" इसरो के अनुसार, पीएसएलवी-सी37-काटरेसेट 2 श्रृंखला के सेटेलाइट मिशन के प्रक्षेपण के लिए उलटी गिनती बुधवार सुबह 5.28 बजे शुरू हुई। मिशन रेडीनेस रिव्यू कमेटी एंड लांच ऑथोराइजेशन बोर्ड ने प्रक्षेपण की मंजूरी दी थी। अंतरिक्ष एजेंसी का विश्वस्त 'ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान' (पीएसएलवी-सी 37) अपने 39वें मिशन पर अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं से जुड़े रिकॉर्ड 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया। प्रक्षेपण के बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में रॉकेट से उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से एक बार में 37 उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण की तुलना में भारत एक बार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने में सफलता हासिल कर इतिहास रचने वाला पहला देश बन गया है। भारत ने इससे पहले जून 2015 में एक बार में 23 उपग्रहों को प्रक्षेपण किया था। यह उसका दूसरा सफल प्रयास है। पीएसएलवी पहले 714 किलोग्राम वजनी काटरेसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह का पृथ्वी पर निगरानी के लिए प्रक्षेपण करेगा और उसके बाद 103 सहयोगी उपग्रहों को पृथ्वी से करीब 520 किलोमीटर दूर ध्रुवीय सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में प्रविष्ट कराएगा जिनका अंतरिक्ष में कुल वजन 664 किलोग्राम है। इसरो के वैज्ञानिकों ने एक्सएल वैरियंट का इस्तेमाल किया है जो सबसे शक्तिशाली रॉकेट है और इसका इस्तेमाल महत्वाकांक्षी चंद्रयान में और मंगल मिशन में किया जा चुका है। इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के, पांच क्रमश: इसरो के अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों- इजरायल, कजाकिस्तान, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात के हैं। रॉकेट में दो अन्य भारतीय सूक्ष्म उपग्रह भी हैं, जिनका कुल वजन करीब 1378 किलोग्राम है। दोनों भारतीय नैनो-सेटेलाइट आईएनएस-1ए और आईएनएस-1बी को पीएसएलवी पर बड़े उपग्रहों का साथ देने के लिए विकसित किया गया था। अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की नैनो-सेटेलाइटों का प्रक्षेपण इसरो की व्यावसायिक शाखा एंट्रिक्स कॉपरेरेशन लिमिटेड की व्यवस्था के तहत किया जा रहा है। काटरेसेट-2 श्रृंखला के मिशन का समय पांच साल का है।राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएसएलवी-सी 37 से एक साथ 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर नया कीर्तिमान स्थापित करने पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को ट्विटर पर जारी अपने संदेश में कहा, 'इसरो को पीएसएलवी-सी37 के सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई। अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में आज का दिन मील का पत्थर साबित होगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन लॉन्चिंग सेंटर से पीएसएलवी-सी37 ने सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर उड़ान भरी। इसरो ने प्रक्षेपण के 34 मिनट बाद 10 बजकर दो मिनट पर सफल लॉन्चिंग का ऐलान किया। इसरो के सफल प्रक्षेपण पर पीएम मोदी ने भी इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "पीएसएलवी- सी37 और कार्टोसैट सैटेलाइट के एक साथ 103 नैनो सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के साथ ही देश के लिए गर्व का क्षण है। भारत अपने वैज्ञानिकों को सलाम करता है।" इसरो के अनुसार, पीएसएलवी-सी37-काटरेसेट 2 श्रृंखला के सेटेलाइट मिशन के प्रक्षेपण के लिए उलटी गिनती बुधवार सुबह 5.28 बजे शुरू हुई। मिशन रेडीनेस रिव्यू कमेटी एंड लांच ऑथोराइजेशन बोर्ड ने प्रक्षेपण की मंजूरी दी थी। अंतरिक्ष एजेंसी का विश्वस्त 'ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान' (पीएसएलवी-सी 37) अपने 39वें मिशन पर अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं से जुड़े रिकॉर्ड 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया। प्रक्षेपण के बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में रॉकेट से उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से एक बार में 37 उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण की तुलना में भारत एक बार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने में सफलता हासिल कर इतिहास रचने वाला पहला देश बन गया है। भारत ने इससे पहले जून 2015 में एक बार में 23 उपग्रहों को प्रक्षेपण किया था। यह उसका दूसरा सफल प्रयास है। पीएसएलवी पहले 714 किलोग्राम वजनी काटरेसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह का पृथ्वी पर निगरानी के लिए प्रक्षेपण करेगा और उसके बाद 103 सहयोगी उपग्रहों को पृथ्वी से करीब 520 किलोमीटर दूर ध्रुवीय सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में प्रविष्ट कराएगा जिनका अंतरिक्ष में कुल वजन 664 किलोग्राम है। इसरो के वैज्ञानिकों ने एक्सएल वैरियंट का इस्तेमाल किया है जो सबसे शक्तिशाली रॉकेट है और इसका इस्तेमाल महत्वाकांक्षी चंद्रयान में और मंगल मिशन में किया जा चुका है। इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के, पांच क्रमश: इसरो के अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों- इजरायल, कजाकिस्तान, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात के हैं। रॉकेट में दो अन्य भारतीय सूक्ष्म उपग्रह भी हैं, जिनका कुल वजन करीब 1378 किलोग्राम है। दोनों भारतीय नैनो-सेटेलाइट आईएनएस-1ए और आईएनएस-1बी को पीएसएलवी पर बड़े उपग्रहों का साथ देने के लिए विकसित किया गया था। अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की नैनो-सेटेलाइटों का प्रक्षेपण इसरो की व्यावसायिक शाखा एंट्रिक्स कॉपरेरेशन लिमिटेड की व्यवस्था के तहत किया जा रहा है। काटरेसेट-2 श्रृंखला के मिशन का समय पांच साल का है।राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएसएलवी-सी 37 से एक साथ 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर नया कीर्तिमान स्थापित करने पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को ट्विटर पर जारी अपने संदेश में कहा, 'इसरो को पीएसएलवी-सी37 के सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई। अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में आज का दिन मील का पत्थर साबित होगा।

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