Friday, 17 February 2017

सिंचाई प्रबंधन में किसानों को भागीदारी देने वाला मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बना- रामेश्वर शर्मा

सिंचाई प्रबंधन में किसानों को भागीदारी देने वाला मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बना- रामेश्वर शर्मा

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने कहा कि देश में सिंचाई प्रबंधन में किसानों को कानून और परंपरागत हिस्सेदारी देने वाला मध्यप्रदेश दूसरा राज्य है। इसका नतीजा उत्साहवर्द्धक रहा है और सिंचाई के रकबे में वृद्धि हुई है। रबी में सिंचाई का क्षेत्र साढ़े छब्बीस लाख हेक्टेयर हो चुका है। खरीफ में भी ढ़ाई लाख से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की गयी। प्रदेश में सिंचन क्षमता साढ़े सात लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28 लाख हेक्टेयर पहंुच गयी है। इसके वर्षान्त तक 40 लाख हेक्टेयर तक हो जाने की आशा है। श्री शर्मा ने सिंचन क्षमता में हो रही उल्लेखनीय वृद्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चैहान और जल संसाधन विकास मंत्री डाॅ. नरोत्तम मिश्रा को बधाई दी है।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संसाधन विकास की महत्वाकांक्षी योजना बनायी गयी है और आगामी तीन वर्षो में 25000 करोड़ रूपए का विनिवेश किया जायेगा। प्रदेश में सिंचाई क्षमता 60 लाख हेक्टेयर हो जायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जल संपदा में अत्यंत समृद्ध है। नर्मदा, चंबल, बेतवा, केन, ताप्ती, पेंच, बाणगंगा और माही नदियों का उद्गम हुआ। प्रदेश में सरप्लस वाटर का औसत 81500 क्यूबिक मीटर है। इसमें से 56000 मिलियन क्यूबिक मीटर मध्यप्रदेश के हिस्से में आया है। मध्यप्रदेश में 4871 सिंचाई योजनाएं है जिनमें 15 वृहद योजनाएं 85 मध्यम और 4771 लघु योजनाएं है। प्रदेश में सिंचाई के अंतर्गत आने वाले दिनों में हर वर्ष डेढ़ लाख सिंचाई क्षमता वृद्धि की योजना से ‘‘हर खेत को पानी’’ की कल्पना साकार होगी।

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