Wednesday, 22 February 2017

चौथे चरण के मतदान ने उप्र में विपक्ष की उड़ा दी नींद : आलोक संजर

चौथे चरण के मतदान ने उप्र में विपक्ष की उड़ा दी नींद : आलोक संजर

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और सांसद आलोक संजर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के साथ ही विपक्ष की नींद हवा हो गयी है। पराजय बोध से ग्रसित सपा अध्यक्ष और कांग्रेस के उपाध्यक्ष द्वारा भाजपा पर दोषारोपण उनकी कुंठा की परिणति है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रचार अभियान में लगातार विकास की चर्चा की और सबका साथ-सबका विकास के आव्हान के साथ समर्थन मांगा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़े सकारात्मक ढंग से 15 वर्षों तक उत्तर प्रदेश की उपेक्षा करने वाले दलों की विफलता उजागर की। भाजपा का पक्का विश्वास है कि हिन्दू और मुसलमान भारत माता की दो आंखें है, इसलिए उनके साथ समान व्यवहार हो। यदि ईद रोशन होती है तो दीपावली भी गुलजार रहे। इसे यदि साम्प्रदायिकता के नजरिये से देखा जाता है तो यह तो दृष्टि दोष है। उन्होनें कहा कि जमाना बदल गया है और उत्तर प्रदेश की जनता जानती है कि सपा, बसपा और कांग्रेस ने ही उत्तर प्रदेश में राजनीति का अपराधीकरण किया है। 2002 से ही सपा ने दस्यु परिवार के बालकुमार बसपा के विरूद्ध रेवतीराम सिंह को उतारा था। 2007 में बालकुमार ने प्रतापगढ़ पट्टी से चुनाव लड़ा और हार गये। बाद में सपा ने ही टिकट देकर उन्हें सांसद बनाया। डकैत बालकुमार के बेटे रामसिंह ने पट्टी से ददुआ के बेटे वीरसिंह ने चित्रकूट से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गये। 2017 में सपा ने उन्हें फिर प्रत्याशी बनाया है, बसपा और सपा के नाम राजनीति के अपराधीकरण का रिकार्ड दर्ज हो गया। आलोक संजर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रचुर जल भंडार होते हुए खेती के लिए पानी नहीं और काश्तकारी तथा उद्योगों के लिए बिजली नहीं होने से मशीनों के पहिये थम गये है। इसका असर रोजगार पर पड़ रहा है। जनता परेशान है, उसे भारतीय जनता पार्टी में ही आशा की किरण दिखाई दे रही है। श्री संजर ने कहा कि मतदान का ट्रेंड बदला है। सत्तासीन होकर सपा और बसपा ने मतदाता सूचियों में जो करामात की थी, पुनरीक्षण में सूचियों में संशोधन हुआ है। नाम कटे है लेकिन फिर भी मतदान केन्द्र पर लंबी कतारें लगी है। इसका स्पष्ट संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकास के लिए मतदाताओं का आव्हान किया, जिससे युवा मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया है। यह मतदान परंपरा से हटकर हुआ न कि जाति-पांति पर हुआ है और न सम्प्रदायवाद पर। मतदान विकास के लिए परिवर्तन की अपेक्षा है। इस मतदान की सघनता ने उन दलों के चेहरों पर हवाईयां बिखेर दी है, जो अब तक जाति-पांति के गणित में लगे हुए थे।

No comments:
Write comments

Recommended Posts × +