Tuesday, 9 August 2016

कश्मीरियों के हाथों में लैपटॉप की जगह पत्थर क्यों : मोदी

कश्मीरियों के हाथों में लैपटॉप की जगह पत्थर क्यों : मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को महान क्रांतिकारी अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की जन्मस्थली भाबरा (अलीराजपुर) पहुंचकर पुनीत रज को माथे से लगाया और उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। भारत छोड़ो आंदोलन की जयंती पर ‘ 'आजादी 70 साल-याद करो कुर्बानी' अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह भूमि वीरों की है। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत वहां की स्थानीय बोली में की। कश्मीर मुद्दे पर विरोधियों व विपक्ष की आलोचना का सामना कर रहे नरेंद्र मोदी ने आज यहां अपना संबोधन कश्मीर पर केंद्रित रखा।प्रधानमंत्री ने कहा कि मुट्ठी भर गुमराह लोग जम्मू-कश्मीर में कश्मीर की महान तहजीब, परंपराओं और संस्कृति को आघात पहुंचा रहे है। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने कश्मीर की इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की आवश्यकता रेखांकित की थी। हमें वह संदेश कश्मीर के अवाम तक पहुंचाना है। आजादी के दीवानों ने जो आजादी सुनिश्चित की है, उसका पूरा लाभ जम्मू-कश्मीर को भी मिला है और उसकी सुखद अनुभूति हो, हमें यह सुनिश्चित करना है। यह हमारी आन-बान और शान का सवाल है। कश्मीर में एकता और शांति हमें मिलजुल कर कायम करना है। अमरनाथ यात्रा शान के साथ चल रही है, सभी यात्री खुशहाल रहें। हमारी कामना है कि कश्मीर दुनिया का स्वर्ग बनें, यह हमारा संकल्प दिवस की चिंता और रात्रि का स्वप्न है।उन्होंने भारी मन से कहा कि जिन युवा कश्मीरियों, किशोरों के हाथ में लैपटॉप, किताबें, खेल की गेंद होना चाहिए, उन्हें देश के दुश्मनों ने पत्थर और हिंसा का सामान पकड़ा दिया है। उन निर्दोषों के हाथ गुमराह करनें की तहजीब देश के लिए घातक है। हम संकल्प लें कि जम्मू-कश्मीर की महान परंपराओं को आंच नहीं आने देंगे। उन्होनें माओवाद को राष्ट्र के लिए घातक बताते हुए कहा कि राह भटके लोगों को इससे अपने आपको अलग करनें के लिए पुर्नविचार करनें की आवश्यकता है। उन्होनें भरोसा दिलाया कि जम्मू-कश्मीर की सरकार और केन्द्र की सरकार मिलजुल कर हर समस्या का समाधान करनें के लिए कृत संकल्प है।श्री मोदी ने कहा कि आजादी प्राप्त करने के लिए राष्ट्र के लिए समर्पित वीर क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया, अपने परिवारों के उजडऩे, बिखरनें की चिंता न करते हुए सिर्फ देश को आजाद करनें की चिंता की। हमें यह आजादी विरासत में मिली है। अब हमें आजादी के लिए मर मिटनें का अवसर नहीं है, लेकिन देश में व्याप्त समस्याओं गरीबी, निरक्षरता, पिछड़ापन को मिटाने के लिए जीने का दुर्लभ सुअवसर मिला है। हम पूर्ण निष्ठा के साथ अपने जीवन का अर्थ समझें और अनुन्नत वर्ग की समुन्नति के मार्ग पर ले जाने के लिए समर्पित हों। श्री मोदी ने कहा कि ‘आजादी-70 याद करो कुर्बानी’ अभियान के अवसर पर हम सबको संकल्प लेना है कि हम देश और देश की जनता के हित में जियेंगे।

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