गंगा में देशवासियों ने जो प्रदूषण फैलाया है, उसका पश्चाताप है नमामि गंगे: उमा भारती
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने गंगा किनारे के लोकसभा सदस्यों से अनुरोध किया है कि वे नमामि गंगे कार्यक्रम की सफलता के लिए अपना सक्रिय योगदान और सहयोग दें।गंगा को प्रदूषण के ‘‘पश्चाताप’’ के रूप में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने नदी के किनारे वाले क्षेत्रों के सांसदों से अपील की कि अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। एक आधिकारिक बयान में उनके हवाले से कहा गया, ‘‘गंगा में देशवासियों ने जो प्रदूषण फैलाया उसका पश्चाताप है नमामि गंगे… कार्यक्रम से गंगा पर हम कोई उपकार नहीं कर रहे हैं।’’ उन्होंने कार्यक्रम की निगरानी के लिए गंगोत्री से गंगासागर तक पदयात्रा की इच्छा जताई।
इन सांसदों के साथ अपने निवास पर आयोजित एक बैठक में उन्होंने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम में गंगा के सभी पहलुओं का ध्यान रखा गया है जिनमें प्रदूषण निवारण, गंगा की अविरलता, जैव विविधता और उसके आसपास की वनस्पतियों का संरक्षण शामिल हैं।भारती ने कहा कि ‘’यदि मुझे प्रधानमंत्री जी से अनुमति मिल गई तो मेरी गंगोत्री से गंगासागर तक पदयात्रा करने की इच्छा है ताकि मैं स्वयं प्रत्येक स्थान पर कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा कर सकूं, लोगों से हाथ जोड़कर विनती कर सकूं कि वे इस कार्यक्रम को सफल करने में अपना सहयोग दें।उन्होंने कहा कि हम गंगा किनारे के प्रत्येक गांव के सींचेवाल मॉडल पर विकास के लिए आरंभ में आठ-आठ लाख रुपए खर्च करेंगे। गंगा किनारे के लगभग 400 गांवों ने सींचेवाल मॉडल पर अपने विकास की तैयारी शुरू कर दी है। झारखंड में तो गंगा किनारे के सभी गांव इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इसमें गांवों को निर्मल करने के अलावा उसका सौन्दर्यीकरण भी शामिल होगा।
बैठक में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बलियान, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री सुश्री अनुप्रिया पटेल, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ.महेन्द्र नाथ पांडे समेत कई सांसदों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने गंगा किनारे के लोकसभा सदस्यों से अनुरोध किया है कि वे नमामि गंगे कार्यक्रम की सफलता के लिए अपना सक्रिय योगदान और सहयोग दें।गंगा को प्रदूषण के ‘‘पश्चाताप’’ के रूप में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने नदी के किनारे वाले क्षेत्रों के सांसदों से अपील की कि अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। एक आधिकारिक बयान में उनके हवाले से कहा गया, ‘‘गंगा में देशवासियों ने जो प्रदूषण फैलाया उसका पश्चाताप है नमामि गंगे… कार्यक्रम से गंगा पर हम कोई उपकार नहीं कर रहे हैं।’’ उन्होंने कार्यक्रम की निगरानी के लिए गंगोत्री से गंगासागर तक पदयात्रा की इच्छा जताई।
इन सांसदों के साथ अपने निवास पर आयोजित एक बैठक में उन्होंने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम में गंगा के सभी पहलुओं का ध्यान रखा गया है जिनमें प्रदूषण निवारण, गंगा की अविरलता, जैव विविधता और उसके आसपास की वनस्पतियों का संरक्षण शामिल हैं।भारती ने कहा कि ‘’यदि मुझे प्रधानमंत्री जी से अनुमति मिल गई तो मेरी गंगोत्री से गंगासागर तक पदयात्रा करने की इच्छा है ताकि मैं स्वयं प्रत्येक स्थान पर कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा कर सकूं, लोगों से हाथ जोड़कर विनती कर सकूं कि वे इस कार्यक्रम को सफल करने में अपना सहयोग दें।उन्होंने कहा कि हम गंगा किनारे के प्रत्येक गांव के सींचेवाल मॉडल पर विकास के लिए आरंभ में आठ-आठ लाख रुपए खर्च करेंगे। गंगा किनारे के लगभग 400 गांवों ने सींचेवाल मॉडल पर अपने विकास की तैयारी शुरू कर दी है। झारखंड में तो गंगा किनारे के सभी गांव इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इसमें गांवों को निर्मल करने के अलावा उसका सौन्दर्यीकरण भी शामिल होगा।
बैठक में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बलियान, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री सुश्री अनुप्रिया पटेल, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ.महेन्द्र नाथ पांडे समेत कई सांसदों ने हिस्सा लिया।
No comments:
Write comments