Sunday, 28 August 2016

संसद और विधानसभाओं में बैठे दस हजार लोग खतरनाक हैं: जैन मुनि तरुण सागर

संसद और विधानसभाओं में बैठे दस हजार लोग खतरनाक हैं: जैन मुनि तरुण सागर 

अपने कड़वे प्रवचन के लिए मशहूर जैन मुनि तरुण सागर ने हरियाणा विधानसभा में दिए गए अपने प्रवचन पर संगीतकार विशाल ददलानी की विवादस्पद टिप्पणी विवाद पर तरुण सागर ने कहा कि सभी एक विचार के नहीं होते. निंदा उसी की होती है जो जिन्दा रहता है. हाथी चलता है तो कुत्ते भौंकते ही हैं. संविधान सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है. उन्होंने अपने ऊपर किए गए विशाल ददलानी की विवादित टिप्पणी और उनकी माफी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ना तो उन्हें इसकी जानकारी है ना ही किसी से नाराजगी है और वो सबको माफ करते हैं. ददलानी को जैन मुनि ने कहा कि जहां अच्छा काम हो रहा है वहां उन्हें जुड़ना चाहिए.तरुण सागर ने कहा कि सुधार की प्रक्रिया ऊपर से शुरू होनी चाहिए. संसद और विधानसभाओं में बैठे दस हजार लोग खतरनाक हैं. 160 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज है. इसलिए वो नेताओं को प्रवचन देते हैं. ये राजनीति के सुद्धिकरण की प्रक्रिया है.राजनीति में नीति का मतलब धर्म ही होता है. उसके बगैर राजनीति मदमस्त हाथी की तरह हो जाएगी. तरुण सागर ने बताया कि कुछ दिनों पहले केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने उनसे संसद को संबोधित करने का व्यक्तिगत अनुरोध किया. जैन मुनि ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी चाहेंगे तो वो संसद में प्रवचन देने के लिए तैयार हैं.
जैन मुनि ने ये भी कहा कि धर्म में भी बुराइयां आ गई हैं. एक हजार साल बाद धर्म को आग लगा देना चाहिए. महिलाओं में सवाल पर उन्होंने कहा कि महिलाएं पूजनीय है. हालांकि उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सन्त का काम बोलने का है, कौन क्या अर्थ निकालता है इसकी उन्हें परवाह नहीं है.जैन मुनि ने भले ही विशाल ददलानी की टिप्पणी को गंभीरता से ना लिया हो लेकिन जैन समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी धर्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और वो ददलानी पर क़ानूनी कार्रवाई के लिए विचार कर रहे हैं. ददलानी को माफी मांगनी है तो खुद आकर तरुण सागर से माफ़ी मांगे.

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