बिहार में बाढ़ हुई भयावह, 29 लाख आबादी प्रभावित
बिहार में बाढ़ प्रभावित बारह जिलों की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। पटना, बेगूसराय, सहित कई अन्य क्षेत्रों में नदियों का जल स्तर बढ़ने के चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। प्रभावित लोगों को दियारा क्षेत्र से सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में लाया जा रहा है। पिछले 24 घंटे के दौरान 7 और लोगों की मौत हो गई जबकि 29.71 लाख आबादी प्रभावित है।
पूर्वी इलाकों में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गंगा और सोन नदी का जलस्तर कई इलाकों में अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। पटना के दीघा घाट, गांधी घाट और मनेर में गंगा खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर उपर बह रही है। आपदा प्रबंधन विभाग ने गुरुवार शाम तक इन नदियों के जलस्तर में कमी की संभावना जताई है। सोन के जलस्तर में भारी कमी के बाद गंगा के उफान पर भी ब्रेक लगा है। यमुना और टेहरी से आने वाले पानी का असर गंगा पर साफ दिख रहा है। सोन का डिस्चार्ज घट जाने के बाद भी इसके जलस्तर में कमी नही हो रही है। हालांकि, गंगा मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में ऊपर बढ़ रही है। बीच-बीच में जलस्तर बढ़ जाता है।सोन में पानी का स्तर बुधवार की रात घटकर 1.82 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। सोन नदी इन्द्रपुरी और कोईलवर में तेजी से घट रही है। हालांकि इसके पानी के गंगा में प्रवेश के कारण गंगा का जलस्तर कम नहीं हो पाया है।
बूढ़ी गंडक खगड़िया में लाल निशान से 203 सेमी ऊपर है और इसका जलस्तर 60 सेमी और बढ़ सकता है। कोसी पूर्णिया और कटिहार दोनों जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर है। कटिहार में खतरे के निशान से 137 सेमी तो पूर्णिया में 15 सेमी ऊपर है। यहां इसके जलस्तर में 9 से 12 सेमी कमी की संभावना है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ से समस्तीपुर जिले में पांच और खगड़िया एवं नालंदा जिला में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गयी है। भोजपुर जिला में 12, वैशाली में 6, भागलपुर में 2 और बक्सर एवं लखीसराय जिला में एक-एक व्यक्ति सहित कुल 29 लोगों की� मौत हो चुकी है।
सूबे में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 179 राहत शिविरों चलाये जा रहे है। पशुओं के लिए भी 140 शिविर चलाए जा रहे हैं। करीब एक लाख 80 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ की 21 और एसडीआरएफ की आठ टीमें तैनात है।
उधर, नेपाल में बारिश थमने के बाद उत्तर बिहार की नदियों के जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई है। इसके कारण बागमती, कमला बलान, भूतही बलान, ललबकिया, अधवारा समूह, खिरोई, महानंदा और घाघरा समेत अन्य बड़ी नदियां लाल निशान के नीचे पहुंच गई है। कोसी वीरपुर बराज पर घटकर 89 हजार क्यूसेक पर तो गंडक वाल्मीकिनगर बराज पर घटकर मात्र 47 हजार क्यूसेक रह गया है।
पूर्वी इलाकों में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गंगा और सोन नदी का जलस्तर कई इलाकों में अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। पटना के दीघा घाट, गांधी घाट और मनेर में गंगा खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर उपर बह रही है। आपदा प्रबंधन विभाग ने गुरुवार शाम तक इन नदियों के जलस्तर में कमी की संभावना जताई है। सोन के जलस्तर में भारी कमी के बाद गंगा के उफान पर भी ब्रेक लगा है। यमुना और टेहरी से आने वाले पानी का असर गंगा पर साफ दिख रहा है। सोन का डिस्चार्ज घट जाने के बाद भी इसके जलस्तर में कमी नही हो रही है। हालांकि, गंगा मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में ऊपर बढ़ रही है। बीच-बीच में जलस्तर बढ़ जाता है।सोन में पानी का स्तर बुधवार की रात घटकर 1.82 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। सोन नदी इन्द्रपुरी और कोईलवर में तेजी से घट रही है। हालांकि इसके पानी के गंगा में प्रवेश के कारण गंगा का जलस्तर कम नहीं हो पाया है।
बूढ़ी गंडक खगड़िया में लाल निशान से 203 सेमी ऊपर है और इसका जलस्तर 60 सेमी और बढ़ सकता है। कोसी पूर्णिया और कटिहार दोनों जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर है। कटिहार में खतरे के निशान से 137 सेमी तो पूर्णिया में 15 सेमी ऊपर है। यहां इसके जलस्तर में 9 से 12 सेमी कमी की संभावना है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ से समस्तीपुर जिले में पांच और खगड़िया एवं नालंदा जिला में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गयी है। भोजपुर जिला में 12, वैशाली में 6, भागलपुर में 2 और बक्सर एवं लखीसराय जिला में एक-एक व्यक्ति सहित कुल 29 लोगों की� मौत हो चुकी है।
सूबे में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 179 राहत शिविरों चलाये जा रहे है। पशुओं के लिए भी 140 शिविर चलाए जा रहे हैं। करीब एक लाख 80 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ की 21 और एसडीआरएफ की आठ टीमें तैनात है।
उधर, नेपाल में बारिश थमने के बाद उत्तर बिहार की नदियों के जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई है। इसके कारण बागमती, कमला बलान, भूतही बलान, ललबकिया, अधवारा समूह, खिरोई, महानंदा और घाघरा समेत अन्य बड़ी नदियां लाल निशान के नीचे पहुंच गई है। कोसी वीरपुर बराज पर घटकर 89 हजार क्यूसेक पर तो गंडक वाल्मीकिनगर बराज पर घटकर मात्र 47 हजार क्यूसेक रह गया है।
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